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उर्स में आल इंडिया मुशायरे का आगाज,
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झिझाना उर्स मेले में आयोजित मुशायरे का का दीप जला कर शुभारंभ करते नगर पंचायत चेयरमैन नौशाद कुरैश
- फोटो : SHAMLI
एक आइना, एक ही सूरत, सबकी एक कहानी...
झिंझाना। कस्बे में उर्स के मेले में आल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। शायरों ने अपनी शायरी से महफिल को नवाजा और दर्शकों की वाहवाही लूटी।
शनिवार रात कस्बे में औलिया हजरत सैयद इमाम महमूद नसीरुद्दीन सब्जवारी शहीद रहमतुल्लाह अलैह के 853वें उर्स मुबारक के मौके पर आयोजित मुशायरे की निजामत रियाजउद्दीन सागर ने उम्दा लहजे में की। सदर जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम दिल्ली के सदर जनाब सैयद याहया बुखारी ने मुशायरे की सदारत की है। मुशायरे का आगाज नगर पंचायत के चेयरमैन नौशाद कुरैशी और भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने शमा रोशन कर किया। उत्तराखंड हज कमेटी के चेयरमैन दर्जा राज्यमंत्री जनाब शमीम आलम ने कहा कि मुशायरा लोगों को आपस में जोड़ने का काम करता है। भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि मुशायरा हिंदू-मुस्लिमों की आपसी मोहब्बत का पैगाम देता है। मुशायरे की निजामत कर रहे रियाजुद्दीन सागर ने कुछ इस अंदाज में शायरों को बुलाया कि.. मोहब्बत से हर तूफान का रुख मोड़ देते हैं हम, तोड़ते हो तुम और जोड़ते हैं हम । इसके बाद जनाबे अली बाराबंकीवी ने दुनियावी इश्क से हटकर अल्लाह ताल्हा से इश्क करने का संदेश देते हुए कहा कि जहां इश्क में मिट जाए... सौदा हो तो ऐसा हो। सरकार दो आलम से.. रिश्ता हो तो ऐसा हो। सहारनपुर से तशरीफ लाए शायर काशिफ रजा ने अपने चार मिस्रों के माध्यम से समाज में फैले भ्रष्टाचार पर अपने शब्दों को कुछ इस तरह बयां किया... अंधे-बहरों की नगरी का जिम्मेदार बिकाऊ है। अफसर, लीडर हर कोई यहां बिकाऊ है, यह सरकार बिकाऊ है सुनाकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। शायरा मोहतरमा शाहिस्ता सना ने हिंदुस्तानी गाने के लहजे में कुछ अपनी लाइनें इस तरह से सुनाई... एक आइना, एक ही सूरत, सबकी एक कहानी, जिस्म है हिंदू मुस्लिम लेकिन, जान तो हिंदुस्तानी है। अफजल झिंझानवीं ने अपने सब्र की इम्ताह कुछ इस तरह दी, जमाना कितनी भी पाबंदियां करें आयद अजान देने यकीनन, बिलाल आएगा । सितम सहेंगे कब तक आखिर, कभी तो खून में उबाल आएगा। शायर इमरान झिंझानवीं ने भी कुछ यूं फरमाया बादशाहत को जो ठुकरा के चला जाता है, उसको देखा परिंदों पे हुकूमत करता, अभी तो आपने देखे हैं कत्ल ही अपने ।अभी तो आपको कातिल शुमार होना है। चार मिसरे सुनाते हुए दिल्ली से आए अबू नवेद ने फरमाया... हवाओं के मुकम्मल चिराग हम अपना जला देंगे जो दहशतगर्द है उनको, जमाने से मिटा देंगे ।।उत्तराखंड के रुड़की से आए जनाब अलीम वाजिद ने अपनी ग़जल में बेटियों के बारे में फरमाया ... जन्नत के जैसा हो गया मेरा मकान, तो बेटी ने की है तिलावत अभी-अभी जालिम का सामना हमें कर जाना चाहिए या फिर कहीं डूब के मर जाना चाहिए । फिरोजाबादी शायर जनाब हाशिम ने कुछ आशिकी भरे अंदाज में इस तरह से दर्शकों को गुदगुदाया.. सामने सबके तुम यूं आया न करो, छत पर बाल यू ना सुखाया करो। मनचलों की नजर तुमको लग जाएगी, अपनी आंखों में काजल लगाया करो। इनके अलावा शायर जनाब अल्ताफ जिया, जनाब वसीम राजू पुरी, जनाब बिलाल सहारनपुरी, जहाज देवबंदी, आकिफ शजा देवबंदी, मुरादाबादी मोहतरमा निकहत, वसीम झिंझानवीं आदि ने भी अपने अपने शायरों से दर्शकों को गुदगुदाया और तालियां बटोरी। झिंझाना नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष विनोद सिंघल ने मेहमानों को शॉल भेंट कर सम्मान किया। दरगाह के सज्जादा नशीं अलहाज अमजद अली अल्वी, बाबर हुसैनी कुद्दूसी, शफकत हुसैन अल्वी आदि ने बाहर से आए मेहमानों का इस्तकबाल किया।
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झिंझाना। कस्बे में उर्स के मेले में आल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। शायरों ने अपनी शायरी से महफिल को नवाजा और दर्शकों की वाहवाही लूटी।
शनिवार रात कस्बे में औलिया हजरत सैयद इमाम महमूद नसीरुद्दीन सब्जवारी शहीद रहमतुल्लाह अलैह के 853वें उर्स मुबारक के मौके पर आयोजित मुशायरे की निजामत रियाजउद्दीन सागर ने उम्दा लहजे में की। सदर जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम दिल्ली के सदर जनाब सैयद याहया बुखारी ने मुशायरे की सदारत की है। मुशायरे का आगाज नगर पंचायत के चेयरमैन नौशाद कुरैशी और भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने शमा रोशन कर किया। उत्तराखंड हज कमेटी के चेयरमैन दर्जा राज्यमंत्री जनाब शमीम आलम ने कहा कि मुशायरा लोगों को आपस में जोड़ने का काम करता है। भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि मुशायरा हिंदू-मुस्लिमों की आपसी मोहब्बत का पैगाम देता है। मुशायरे की निजामत कर रहे रियाजुद्दीन सागर ने कुछ इस अंदाज में शायरों को बुलाया कि.. मोहब्बत से हर तूफान का रुख मोड़ देते हैं हम, तोड़ते हो तुम और जोड़ते हैं हम । इसके बाद जनाबे अली बाराबंकीवी ने दुनियावी इश्क से हटकर अल्लाह ताल्हा से इश्क करने का संदेश देते हुए कहा कि जहां इश्क में मिट जाए... सौदा हो तो ऐसा हो। सरकार दो आलम से.. रिश्ता हो तो ऐसा हो। सहारनपुर से तशरीफ लाए शायर काशिफ रजा ने अपने चार मिस्रों के माध्यम से समाज में फैले भ्रष्टाचार पर अपने शब्दों को कुछ इस तरह बयां किया... अंधे-बहरों की नगरी का जिम्मेदार बिकाऊ है। अफसर, लीडर हर कोई यहां बिकाऊ है, यह सरकार बिकाऊ है सुनाकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। शायरा मोहतरमा शाहिस्ता सना ने हिंदुस्तानी गाने के लहजे में कुछ अपनी लाइनें इस तरह से सुनाई... एक आइना, एक ही सूरत, सबकी एक कहानी, जिस्म है हिंदू मुस्लिम लेकिन, जान तो हिंदुस्तानी है। अफजल झिंझानवीं ने अपने सब्र की इम्ताह कुछ इस तरह दी, जमाना कितनी भी पाबंदियां करें आयद अजान देने यकीनन, बिलाल आएगा । सितम सहेंगे कब तक आखिर, कभी तो खून में उबाल आएगा। शायर इमरान झिंझानवीं ने भी कुछ यूं फरमाया बादशाहत को जो ठुकरा के चला जाता है, उसको देखा परिंदों पे हुकूमत करता, अभी तो आपने देखे हैं कत्ल ही अपने ।अभी तो आपको कातिल शुमार होना है। चार मिसरे सुनाते हुए दिल्ली से आए अबू नवेद ने फरमाया... हवाओं के मुकम्मल चिराग हम अपना जला देंगे जो दहशतगर्द है उनको, जमाने से मिटा देंगे ।।उत्तराखंड के रुड़की से आए जनाब अलीम वाजिद ने अपनी ग़जल में बेटियों के बारे में फरमाया ... जन्नत के जैसा हो गया मेरा मकान, तो बेटी ने की है तिलावत अभी-अभी जालिम का सामना हमें कर जाना चाहिए या फिर कहीं डूब के मर जाना चाहिए । फिरोजाबादी शायर जनाब हाशिम ने कुछ आशिकी भरे अंदाज में इस तरह से दर्शकों को गुदगुदाया.. सामने सबके तुम यूं आया न करो, छत पर बाल यू ना सुखाया करो। मनचलों की नजर तुमको लग जाएगी, अपनी आंखों में काजल लगाया करो। इनके अलावा शायर जनाब अल्ताफ जिया, जनाब वसीम राजू पुरी, जनाब बिलाल सहारनपुरी, जहाज देवबंदी, आकिफ शजा देवबंदी, मुरादाबादी मोहतरमा निकहत, वसीम झिंझानवीं आदि ने भी अपने अपने शायरों से दर्शकों को गुदगुदाया और तालियां बटोरी। झिंझाना नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष विनोद सिंघल ने मेहमानों को शॉल भेंट कर सम्मान किया। दरगाह के सज्जादा नशीं अलहाज अमजद अली अल्वी, बाबर हुसैनी कुद्दूसी, शफकत हुसैन अल्वी आदि ने बाहर से आए मेहमानों का इस्तकबाल किया।