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Shamli News: भारी न पड़ जाएं ये हल्के झटके
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नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी की ओर से शुक्रवार रात आए भूकंप की जारी की गई रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट।
- 20 दिन में तीन बार जिले ने झेले भूकंप के झटके
- दो बार भूकंप का केंद्र बना जिला, पांच किमी नीचे हिली धरती
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में 15 जनवरी से अब तक तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इसमें दो बार भूकंप का केंद्र जिला रहा है। दोनों ही बार पांच किमी नीचे जमीन हिली। भूकंप के इन झटकों से कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। लेकिन लोगों में दहशत फैल गई।
15 जनवरी की देर रात को 1:16 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 2.9 थी। इसका केंद्र शामली था। इसके बाद 24 जनवरी दोपहर 2:28 मिनट पर को भूकंप आया। जिसका केंद्र नेपाल था। इसकी तीव्रता 5.8 मापी गई थी। तीन फरवरी की रात 9:31 पर भूकंप के झटकों से लोग हिल गए। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.2 दर्ज की गई।
कैसे आता है भूकंप
भू-विज्ञान के मुताबिक पूरी धरती 12 टैक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है। इन प्लेटों के टकराने पर जो ऊर्जा निकलती है, उसे भूकंप कहा जाता है। धरती के नीचे मौजूद ये प्लेटें बेहद धीमी रफ्तार से घूमती रहती हैं। हर साल 4-5 मिमी अपनी जगह से खिसक जाती हैं। इस दौरान कोई प्लेट किसी के नीचे से खिसक जाती है, तो कोई दूर हो जाती है। इस दौरान जब प्लेटें आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है।
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बड़े खतरे की तो नहीं आशंका
जिले का 20 दिन में दो बार भूकंप का केंद्र बनने पर यह सवाल भी उठने लगा कि ये किसी बड़े खतरे का संकेत तो नहीं है। वैसे भी जिला भूकंप के लिहाज से जोन-4 में है। जो गंभीर तीव्रता वाला क्षेत्र है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के वैज्ञानिक सहायक मनोज कुमार का कहना है कि इस बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती कि किसी बड़े खतरे की आशंका है। यह शोध का विषय है। शामली का 20 दिन में दो बार भूकंप का केंद्र बनने पर उन्होंने कहा कि जमीन के नीचे प्रक्रिया चलती रहती हैं।
प्रशासन कितना तैयार
भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है। एडीएम संतोष कुमार सिंह का दावा है कि आपदा प्रबंधन की टीम किसी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार है। समय-समय पर आपदा प्रबंधन की टीम लोगों के बीच जाकर उन्हें जागरूक करती है।
कितनी तीव्रता में कितना असर
रिक्टर स्केल- असर
0 से 1.9 : केवल सिज्मोग्राफ से पता चलता है। लोगों को महसूस ही नहीं हो पाता।
2 से 2.9 : इस स्थिति में हल्का कंपन महसूस होता है।
3 से 3.9 : इस स्थिति में थोड़ा तेज कंपन महसूस होता है।
4 से 4.9 : खिड़कियों के कांच भी टूट सकते हैं।
5 से 5.9 : फर्नीचर हिल सकते हैं, पंखा वगैरह तेज हिलते दिखते हैं।
6 से 6.9 : भवनों की नींव भी दरक सकती है और ऊपरी मंजिलों के भवन को नुकसान हो सकता है।
7 से 7.9 : इस स्थिति में इमारतें गिर सकती हैं। जमीन के अंदर बिछी पाइपलाइन भी फट जाते हैं।
8 से 8.9 : इमारतों के साथ ही बड़े पुल भी तबाह हो जाते हैं। सुनामी का खतरा रहता है।
9 और उससे अधिक: इस स्थिति में तबाही का मंजर दिखता है। जैसे गुजरात, नेपाल आदि देशों में दिख चुका है।
भूकंप आने पर क्या करें, क्या न करें
जानकारी न होने की वजह से भूकंप आने पर लोगों को कई बार भारी जान-माल की हानि होती है। सलाह दी जाती है कि भूकंप आने पर घर से बाहर खुले में निकल जाएं। घर में फंस गए हों तो बेड या मजबूत टेबल के नीचे छिप जाएं। घर के कोनों में खड़े होकर भी खुद को बचाया जा सकता है। भूकंप आने पर लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल न करें।
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- दो बार भूकंप का केंद्र बना जिला, पांच किमी नीचे हिली धरती
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में 15 जनवरी से अब तक तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इसमें दो बार भूकंप का केंद्र जिला रहा है। दोनों ही बार पांच किमी नीचे जमीन हिली। भूकंप के इन झटकों से कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। लेकिन लोगों में दहशत फैल गई।
15 जनवरी की देर रात को 1:16 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 2.9 थी। इसका केंद्र शामली था। इसके बाद 24 जनवरी दोपहर 2:28 मिनट पर को भूकंप आया। जिसका केंद्र नेपाल था। इसकी तीव्रता 5.8 मापी गई थी। तीन फरवरी की रात 9:31 पर भूकंप के झटकों से लोग हिल गए। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.2 दर्ज की गई।
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कैसे आता है भूकंप
भू-विज्ञान के मुताबिक पूरी धरती 12 टैक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है। इन प्लेटों के टकराने पर जो ऊर्जा निकलती है, उसे भूकंप कहा जाता है। धरती के नीचे मौजूद ये प्लेटें बेहद धीमी रफ्तार से घूमती रहती हैं। हर साल 4-5 मिमी अपनी जगह से खिसक जाती हैं। इस दौरान कोई प्लेट किसी के नीचे से खिसक जाती है, तो कोई दूर हो जाती है। इस दौरान जब प्लेटें आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है।
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बड़े खतरे की तो नहीं आशंका
जिले का 20 दिन में दो बार भूकंप का केंद्र बनने पर यह सवाल भी उठने लगा कि ये किसी बड़े खतरे का संकेत तो नहीं है। वैसे भी जिला भूकंप के लिहाज से जोन-4 में है। जो गंभीर तीव्रता वाला क्षेत्र है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के वैज्ञानिक सहायक मनोज कुमार का कहना है कि इस बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती कि किसी बड़े खतरे की आशंका है। यह शोध का विषय है। शामली का 20 दिन में दो बार भूकंप का केंद्र बनने पर उन्होंने कहा कि जमीन के नीचे प्रक्रिया चलती रहती हैं।
प्रशासन कितना तैयार
भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है। एडीएम संतोष कुमार सिंह का दावा है कि आपदा प्रबंधन की टीम किसी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार है। समय-समय पर आपदा प्रबंधन की टीम लोगों के बीच जाकर उन्हें जागरूक करती है।
कितनी तीव्रता में कितना असर
रिक्टर स्केल- असर
0 से 1.9 : केवल सिज्मोग्राफ से पता चलता है। लोगों को महसूस ही नहीं हो पाता।
2 से 2.9 : इस स्थिति में हल्का कंपन महसूस होता है।
3 से 3.9 : इस स्थिति में थोड़ा तेज कंपन महसूस होता है।
4 से 4.9 : खिड़कियों के कांच भी टूट सकते हैं।
5 से 5.9 : फर्नीचर हिल सकते हैं, पंखा वगैरह तेज हिलते दिखते हैं।
6 से 6.9 : भवनों की नींव भी दरक सकती है और ऊपरी मंजिलों के भवन को नुकसान हो सकता है।
7 से 7.9 : इस स्थिति में इमारतें गिर सकती हैं। जमीन के अंदर बिछी पाइपलाइन भी फट जाते हैं।
8 से 8.9 : इमारतों के साथ ही बड़े पुल भी तबाह हो जाते हैं। सुनामी का खतरा रहता है।
9 और उससे अधिक: इस स्थिति में तबाही का मंजर दिखता है। जैसे गुजरात, नेपाल आदि देशों में दिख चुका है।
भूकंप आने पर क्या करें, क्या न करें
जानकारी न होने की वजह से भूकंप आने पर लोगों को कई बार भारी जान-माल की हानि होती है। सलाह दी जाती है कि भूकंप आने पर घर से बाहर खुले में निकल जाएं। घर में फंस गए हों तो बेड या मजबूत टेबल के नीचे छिप जाएं। घर के कोनों में खड़े होकर भी खुद को बचाया जा सकता है। भूकंप आने पर लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल न करें।