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काउंसिलिंग से किया छात्रों को परीक्षा के लिए तैयार
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संजीव कुमार।
- फोटो : SHAMLI
काउंसिलिंग कर छात्रों का दूर किया डर
शामली। कोराना महामारी के चलते कई महीने स्कूल से दूर रहे बच्चे अब स्कूलों में पहुंचकर पढ़ाई तो कर रहे हैं लेकिन लंबे समय के बाद स्कूल पहुंचे बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। पिछली बार परीक्षा नहीं देने के चलते बड़ी संख्या में बच्चों के मन में इस बार परीक्षा के प्रति डर रहा।
अभिभावकों की मानें तो लॉकडाउन के बाद कई बच्चे मोबाइल के आदी हो चुके हैं और छोटी कक्षाओं के बच्चों में चिड़चिड़ापन भी बढ़ा है। बड़ी कक्षाओं के बच्चे तो स्कूल खुलने के एक दो दिन बाद पढ़ाई के पुराने तरीके में ढल गए, लेकिन छोटी कक्षाओं के बच्चों को अभी भी दिक्कतें हो रही हैं।
ऑफलाइन परीक्षा की घोषणा से मनोदशा पर प्रभाव
लगातार दो वर्ष तक वैश्विक महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षा और परीक्षा से शिक्षा का स्तर काफी हद तक गिर गया। अब जब इस वर्ष ऑफलाइन परीक्षा कराने की शिक्षा विभाग ने घोषणा की है, तब से छात्रों की मनोदशा पर खासा प्रभाव पड़ा है। बच्चे परीक्षा को लेकर डरे हुए थे। ऐसे में शिक्षक काउंसिलिंग के माध्यम से उनके मन से परीक्षा का डर निकाला।
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स्कूल खुले तो शुरू में हुई दिक्कत
परीक्षा के बाद जब स्कूल खुले तो शुरू में थोड़ी दिक्कत हुई। लेकिन शिक्षकों से बात करके समस्या बताने पर उन्होंने समझाया। जिसके बाद पढ़ाई सामान्य हो गई। - करण, छात्र कक्षा-12
शिक्षकों के समझाने पर दूर हुआ डर
लॉकडाउन में घर पर रहकर ही ऑनलाइन पढ़ाई की। परीक्षा दिए बिना ही अगली कक्षा में प्रमोट हो गए। जिसके चलते इस बार परीक्षा को लेकर मन में थोड़ा डर था। शिक्षकों के समझाने पर डर दूर हो गया। - गोविंद कुमार, छात्र कक्षा-12
काउंसलिंग कर परीक्षा के लिए किया तैयार
- कोरोना महामारी ने शिक्षा जगत को काफी बदल दिया है। बच्चों की मनोदशा पर भी इसका काफी फर्क पड़ा है। ऐसे में बच्चों की काउंसलिंग कर उन्हें परीक्षा के लिए तैयार किया गया। -संजीव कुमार, सहायक अध्यापक, राष्ट्रीय किसान इंटर कॉलेज
- शिक्षण कार्य के तौर तरीके कोरोना की वजह से अचानक पूरी तरह बदल गए थे। जिससे बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिला। हालांकि अब काउंसलिंग से सब पटरी पर आ गया है। - कपिल शर्मा, प्रवक्ता हिंदू इंटर कॉलेज कांधला।
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शामली। कोराना महामारी के चलते कई महीने स्कूल से दूर रहे बच्चे अब स्कूलों में पहुंचकर पढ़ाई तो कर रहे हैं लेकिन लंबे समय के बाद स्कूल पहुंचे बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। पिछली बार परीक्षा नहीं देने के चलते बड़ी संख्या में बच्चों के मन में इस बार परीक्षा के प्रति डर रहा।
अभिभावकों की मानें तो लॉकडाउन के बाद कई बच्चे मोबाइल के आदी हो चुके हैं और छोटी कक्षाओं के बच्चों में चिड़चिड़ापन भी बढ़ा है। बड़ी कक्षाओं के बच्चे तो स्कूल खुलने के एक दो दिन बाद पढ़ाई के पुराने तरीके में ढल गए, लेकिन छोटी कक्षाओं के बच्चों को अभी भी दिक्कतें हो रही हैं।
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ऑफलाइन परीक्षा की घोषणा से मनोदशा पर प्रभाव
लगातार दो वर्ष तक वैश्विक महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षा और परीक्षा से शिक्षा का स्तर काफी हद तक गिर गया। अब जब इस वर्ष ऑफलाइन परीक्षा कराने की शिक्षा विभाग ने घोषणा की है, तब से छात्रों की मनोदशा पर खासा प्रभाव पड़ा है। बच्चे परीक्षा को लेकर डरे हुए थे। ऐसे में शिक्षक काउंसिलिंग के माध्यम से उनके मन से परीक्षा का डर निकाला।
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स्कूल खुले तो शुरू में हुई दिक्कत
परीक्षा के बाद जब स्कूल खुले तो शुरू में थोड़ी दिक्कत हुई। लेकिन शिक्षकों से बात करके समस्या बताने पर उन्होंने समझाया। जिसके बाद पढ़ाई सामान्य हो गई। - करण, छात्र कक्षा-12
शिक्षकों के समझाने पर दूर हुआ डर
लॉकडाउन में घर पर रहकर ही ऑनलाइन पढ़ाई की। परीक्षा दिए बिना ही अगली कक्षा में प्रमोट हो गए। जिसके चलते इस बार परीक्षा को लेकर मन में थोड़ा डर था। शिक्षकों के समझाने पर डर दूर हो गया। - गोविंद कुमार, छात्र कक्षा-12
काउंसलिंग कर परीक्षा के लिए किया तैयार
- कोरोना महामारी ने शिक्षा जगत को काफी बदल दिया है। बच्चों की मनोदशा पर भी इसका काफी फर्क पड़ा है। ऐसे में बच्चों की काउंसलिंग कर उन्हें परीक्षा के लिए तैयार किया गया। -संजीव कुमार, सहायक अध्यापक, राष्ट्रीय किसान इंटर कॉलेज
- शिक्षण कार्य के तौर तरीके कोरोना की वजह से अचानक पूरी तरह बदल गए थे। जिससे बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिला। हालांकि अब काउंसलिंग से सब पटरी पर आ गया है। - कपिल शर्मा, प्रवक्ता हिंदू इंटर कॉलेज कांधला।

प्रवक्ता कपिल शर्मा।- फोटो : SHAMLI

छात्र गोविंद।- फोटो : SHAMLI

छात्र करण।- फोटो : SHAMLI