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रजबहे का क्षतिग्रस्त पुल बना हादसे का सबब
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रजबहे का क्षतिग्रस्त पुल बना हादसे का सबब
शामली, गढ़ीपुख्ता। गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के गांव भाटू में मुख्य रास्ते का टूटा पुल तकरीबन दस वर्षों से नहीं बना है। परेशान ग्रामीण स्वयं की मेहनत से वैकल्पिक पुल का निर्माण करके आवागमन करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैक्टर ट्राली के रजबहा पुल से जाते समय पलटने का खतरा रहता है। बुधवार को खाली ट्रैक्टर ट्राली लेकर एक ग्रामीण पुल से गुजर रहा था। तभी अचानक उसकी ट्राली रजबहे के किनारे से फिसल कर नीचे उतर गई। चालक ने कूदकर अपनी जान बचाई। ग्रामीणों ने बताया अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से लगातार पुल निर्माण की मांग की जा रही है। विभाग की ओर से सर्वे का कार्य भी कराया गया था। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रतिवर्ष ग्रामीण रजबहे के पुल पर मिट्टी डालकर आवागमन की व्यवस्था करते हैं। बरसात में पुल क्षतिग्रस्त होने पर दोनों किनारों का संपर्क टूट जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी आने जाने में दिक्कत होती है।
रजबहे के दूसरे किनारे पर एक इंटर कॉलेज है। जहां सैकड़ों छात्र-छात्राएं प्रतिदिन रजबहा पार करते हैं। दुल्लाखेड़ी, भाटू, बुंटा, गुराना सहित कई अन्य गांव के सैकड़ों लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। ग्रामीण आसिफ, सद्दाम, अफरान, इरशाद, वसीम, नौशाद, आरिफ, शीशपाल आदि ने पुल के जल्द निर्माण की मांग की है।
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शामली, गढ़ीपुख्ता। गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के गांव भाटू में मुख्य रास्ते का टूटा पुल तकरीबन दस वर्षों से नहीं बना है। परेशान ग्रामीण स्वयं की मेहनत से वैकल्पिक पुल का निर्माण करके आवागमन करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैक्टर ट्राली के रजबहा पुल से जाते समय पलटने का खतरा रहता है। बुधवार को खाली ट्रैक्टर ट्राली लेकर एक ग्रामीण पुल से गुजर रहा था। तभी अचानक उसकी ट्राली रजबहे के किनारे से फिसल कर नीचे उतर गई। चालक ने कूदकर अपनी जान बचाई। ग्रामीणों ने बताया अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से लगातार पुल निर्माण की मांग की जा रही है। विभाग की ओर से सर्वे का कार्य भी कराया गया था। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रतिवर्ष ग्रामीण रजबहे के पुल पर मिट्टी डालकर आवागमन की व्यवस्था करते हैं। बरसात में पुल क्षतिग्रस्त होने पर दोनों किनारों का संपर्क टूट जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी आने जाने में दिक्कत होती है।
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रजबहे के दूसरे किनारे पर एक इंटर कॉलेज है। जहां सैकड़ों छात्र-छात्राएं प्रतिदिन रजबहा पार करते हैं। दुल्लाखेड़ी, भाटू, बुंटा, गुराना सहित कई अन्य गांव के सैकड़ों लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। ग्रामीण आसिफ, सद्दाम, अफरान, इरशाद, वसीम, नौशाद, आरिफ, शीशपाल आदि ने पुल के जल्द निर्माण की मांग की है।
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