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Shamli News: 90 के दशक से शुरू हुआ गठरी व्यवसाय आतंकी कनेक्शन तक पहुंचा
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शामली/कैराना। अहमदाबाद में राष्ट्र विरोधी गतियों में शामिल होने के आरोप में झिंझाना निवासी आजाद शेख के पकड़े जाने के बाद एक बार फिर जिले से आतंकी कनेक्शन सामने आया है। इससे पहले भी आईएसआई एजेंट के आरोप में कई लोग पकड़े जा चुके हैं।
जिले का कस्बा कैराना पहले से ही आतंकी कनेक्शन को लेकर चर्चाओं में रहा है। कैराना के लोगों की रिश्तेदारी पाकिस्तान में होने के कारण यहां के लोग पाकिस्तान आते जाते थे। पाकिस्तान में पान और सुपारी महंगी थी, जबकि पाकिस्तान की बनी मिर्जा नामक चप्पल और डिस्को कपड़ा कैराना में पसंद किया जाता था। 90 के दशक में रिश्तेदारी में आने-जाने के दौरान लोग भारत से पान और सुपारी पाकिस्तान ले जाते थे और वहां से डिस्को कपड़ा और मिर्जा चप्पल लेकर आते थे।
सोने का भाव 90 के दशक में पाकिस्तान में कम होने के कारण वहां से वापस आने वाले लोग चोरी छुपे सोना लाने लगे। धीरे-धीरे यह गठरी व्यवसाय बन गया। इकबाल काना का पिता ठेली पर केले बेचने का काम करता था। इकबाल काना ने ग्रेजुएशन कर रखी थी, जिसके चलते वह पाकिस्तान जाने वालों के पासपोर्ट और वीजा बनवाने लगा। सोने की तस्करी में मुनाफे को देखते हुए इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा ने गठरी व्यवसाय की शुरुआत की।
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इसके लिए वह प्रत्येक महिला या पुरुष को पाकिस्तान आने-जाने का खर्चा और 3000 रुपये देते थे। पाकिस्तान के अटारी बॉर्डर पर गठरी व्यवसाय के कई लोगों के पकड़े जाने के बाद इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा पाकिस्तानी पिस्टलों की तस्करी में लग गए। 1995 में दिल्ली में काफी संख्या में पाकिस्तान निर्मित पिस्टल पकड़ी गई थीं, जिसमें इकबाल काना का नाम आया था। देश की एजेंसी ने इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा पर शिकंजा कसना शुरू किया तो दोनों पाकिस्तान भाग गए।
अब दोनों पाकिस्तान में रहकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। शामली निवासी कलीम व उसका भाई तहसीम भी डेढ़ साल पहले आईएसआई एजेंट के आरोप में पकड़े गए थे। जाली करंसी के मामले में भी कैराना का नाम चर्चाओं में रहा है।
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दरभंगा विस्फोट प्रकरण में कैराना के पकड़े गए थे चार लोग
कैराना। जनपद में आतंकी कनेक्शन के मामले पूर्व में भी सामने आ चुके हैं। करीब साढ़े चार साल पहले बिहार के दरभंगा पार्सल विस्फोट में एनआईए ने कैराना के चार लोग पकड़े गए थे। जांच एजेंसियों ने उनके संबंध पाकिस्तान में बैठे इकबाल काना और लश्कर ए तैयबा से होना बताया था।
17 जून 2021 को बिहार के दरभंगा में पार्सल विस्फोट का कनेक्शन जिले के कस्बा कैराना से मिला था। बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन से पहले ही पार्सल बम विस्फोट हुआ था, जिसमें एनआईए ने 30 जून 2021 को हैदराबाद से कैराना निवासी दो भाइयों नासिर और इमरान को गिरफ्तार किया था। उनके कनेक्शन पाकिस्तान में बैठे कैराना निवासी आईएसआई हैंडलर इकबाल काना से बताए गए थे। इसके तीन दिन बाद दो जुलाई को कैराना निवासी सलीम उर्फ टुइयां और कफील को भी एनआईए की टीम ने गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों ने पकड़े गए लोगों का कनेक्शन पाकिस्तान में बैठे इकबाल काना और लश्कर ए तैैयबा से होना बताया था।
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2025 में जासूसी के आरोप में कैराना निवासी नोमान इलाही को किया था गिरफ्तार
कैराना। कश्मीर के पहलगांव में आतंकवादियों के हमले में सैलानियों की मौत के बाद भारत में पाकिस्तान के विरुद्ध ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में पानीपत की सीआईए फर्स्ट ने कैराना के बाजार बेगमपुर निवासी नोमान इलाही को गिरफ्तार किया था। नोमान इलाई पर आरोप था कि वह पाकिस्तान में बैठे आईएसआई एजेंट इकबाल काना के संपर्क में रहकर पाकिस्तान के लिए जासूसी करता था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पठानकोट और कश्मीर में भारतीय सेना की मूवमेंट पाकिस्तान को भेजता था। सीआईए तीन बार नोमान इलाही को लेकर कैराना स्थित उसके घर पर आई थी। तलाशी के दौरान काफी संख्या में पाकिस्तानी जाने के लिए पासपोर्ट बरामद हुए थे।
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जिले का कस्बा कैराना पहले से ही आतंकी कनेक्शन को लेकर चर्चाओं में रहा है। कैराना के लोगों की रिश्तेदारी पाकिस्तान में होने के कारण यहां के लोग पाकिस्तान आते जाते थे। पाकिस्तान में पान और सुपारी महंगी थी, जबकि पाकिस्तान की बनी मिर्जा नामक चप्पल और डिस्को कपड़ा कैराना में पसंद किया जाता था। 90 के दशक में रिश्तेदारी में आने-जाने के दौरान लोग भारत से पान और सुपारी पाकिस्तान ले जाते थे और वहां से डिस्को कपड़ा और मिर्जा चप्पल लेकर आते थे।
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सोने का भाव 90 के दशक में पाकिस्तान में कम होने के कारण वहां से वापस आने वाले लोग चोरी छुपे सोना लाने लगे। धीरे-धीरे यह गठरी व्यवसाय बन गया। इकबाल काना का पिता ठेली पर केले बेचने का काम करता था। इकबाल काना ने ग्रेजुएशन कर रखी थी, जिसके चलते वह पाकिस्तान जाने वालों के पासपोर्ट और वीजा बनवाने लगा। सोने की तस्करी में मुनाफे को देखते हुए इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा ने गठरी व्यवसाय की शुरुआत की।
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इसके लिए वह प्रत्येक महिला या पुरुष को पाकिस्तान आने-जाने का खर्चा और 3000 रुपये देते थे। पाकिस्तान के अटारी बॉर्डर पर गठरी व्यवसाय के कई लोगों के पकड़े जाने के बाद इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा पाकिस्तानी पिस्टलों की तस्करी में लग गए। 1995 में दिल्ली में काफी संख्या में पाकिस्तान निर्मित पिस्टल पकड़ी गई थीं, जिसमें इकबाल काना का नाम आया था। देश की एजेंसी ने इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा पर शिकंजा कसना शुरू किया तो दोनों पाकिस्तान भाग गए।
अब दोनों पाकिस्तान में रहकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। शामली निवासी कलीम व उसका भाई तहसीम भी डेढ़ साल पहले आईएसआई एजेंट के आरोप में पकड़े गए थे। जाली करंसी के मामले में भी कैराना का नाम चर्चाओं में रहा है।
दरभंगा विस्फोट प्रकरण में कैराना के पकड़े गए थे चार लोग
कैराना। जनपद में आतंकी कनेक्शन के मामले पूर्व में भी सामने आ चुके हैं। करीब साढ़े चार साल पहले बिहार के दरभंगा पार्सल विस्फोट में एनआईए ने कैराना के चार लोग पकड़े गए थे। जांच एजेंसियों ने उनके संबंध पाकिस्तान में बैठे इकबाल काना और लश्कर ए तैयबा से होना बताया था।
17 जून 2021 को बिहार के दरभंगा में पार्सल विस्फोट का कनेक्शन जिले के कस्बा कैराना से मिला था। बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन से पहले ही पार्सल बम विस्फोट हुआ था, जिसमें एनआईए ने 30 जून 2021 को हैदराबाद से कैराना निवासी दो भाइयों नासिर और इमरान को गिरफ्तार किया था। उनके कनेक्शन पाकिस्तान में बैठे कैराना निवासी आईएसआई हैंडलर इकबाल काना से बताए गए थे। इसके तीन दिन बाद दो जुलाई को कैराना निवासी सलीम उर्फ टुइयां और कफील को भी एनआईए की टीम ने गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों ने पकड़े गए लोगों का कनेक्शन पाकिस्तान में बैठे इकबाल काना और लश्कर ए तैैयबा से होना बताया था।
2025 में जासूसी के आरोप में कैराना निवासी नोमान इलाही को किया था गिरफ्तार
कैराना। कश्मीर के पहलगांव में आतंकवादियों के हमले में सैलानियों की मौत के बाद भारत में पाकिस्तान के विरुद्ध ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में पानीपत की सीआईए फर्स्ट ने कैराना के बाजार बेगमपुर निवासी नोमान इलाही को गिरफ्तार किया था। नोमान इलाई पर आरोप था कि वह पाकिस्तान में बैठे आईएसआई एजेंट इकबाल काना के संपर्क में रहकर पाकिस्तान के लिए जासूसी करता था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पठानकोट और कश्मीर में भारतीय सेना की मूवमेंट पाकिस्तान को भेजता था। सीआईए तीन बार नोमान इलाही को लेकर कैराना स्थित उसके घर पर आई थी। तलाशी के दौरान काफी संख्या में पाकिस्तानी जाने के लिए पासपोर्ट बरामद हुए थे।