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Shamli News: टीईटी के विरोध में शिक्षकों ने निकाला पैदल मार्च
Fri, 27 Feb 2026 12:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Fri, 27 Feb 2026 12:41 AM IST
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कलक्ट्रेट में बीएसए को ज्ञापन देते शिक्षक । संवाद
शामली। शिक्षक संगठनों ने टीईटी अनिवार्यता के विरोध में बीएसए कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद वहां से डीएम कार्यालय तक नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च निकाला। बीएसए और डीएम को प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन देते हुए उच्चतम न्यायालय के निर्णय में संशोधन की मांग की।
27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीचर एंट्रेंस टेस्ट की अनिवार्यता लागू करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश पर शिक्षक समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय उनके साथ न्याय नहीं कर रहा है, क्योंकि यह उन पर लागू होने वाले पुराने नियमों को बदलने का प्रयास कर रहा है।
शिक्षकों का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत पारित किया गया है, जो सर्वोच्च न्यायालय को किसी भी लंबित मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने की शक्ति देता है।
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महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष पूनम तोमर व जिलाध्यक्ष नितिन कुमार ने बताया कि यूपी में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं थी, लेकिन उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद अब इन शिक्षकों को भी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्णय 30 से 35 वर्ष पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए एक बड़ी समस्या बनकर सामने आया है। शिक्षकों ने इस निर्णय को संसद के माध्यम से संशोधित करते हुए शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त कराए जाने की मांग की।
इस दौरान अनीता मलिक, सलूजा, नीरू, प्रिया, छवि, इंदू, रेनू चौहान, अदिती राणा, रश्मि, प्रिंसी, ज्ञानेंद्र कुमार, अनिल कुमार, मनीष कुमार, नितिन कुमार, राहुल, अमित, रजत, दीपक, पवन, अमित खैवाल, अमित मित्तल, दिलशाद आदि रहे।
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27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीचर एंट्रेंस टेस्ट की अनिवार्यता लागू करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश पर शिक्षक समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय उनके साथ न्याय नहीं कर रहा है, क्योंकि यह उन पर लागू होने वाले पुराने नियमों को बदलने का प्रयास कर रहा है।
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शिक्षकों का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत पारित किया गया है, जो सर्वोच्च न्यायालय को किसी भी लंबित मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने की शक्ति देता है।
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महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष पूनम तोमर व जिलाध्यक्ष नितिन कुमार ने बताया कि यूपी में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं थी, लेकिन उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद अब इन शिक्षकों को भी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्णय 30 से 35 वर्ष पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए एक बड़ी समस्या बनकर सामने आया है। शिक्षकों ने इस निर्णय को संसद के माध्यम से संशोधित करते हुए शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त कराए जाने की मांग की।
इस दौरान अनीता मलिक, सलूजा, नीरू, प्रिया, छवि, इंदू, रेनू चौहान, अदिती राणा, रश्मि, प्रिंसी, ज्ञानेंद्र कुमार, अनिल कुमार, मनीष कुमार, नितिन कुमार, राहुल, अमित, रजत, दीपक, पवन, अमित खैवाल, अमित मित्तल, दिलशाद आदि रहे।