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Shamli News: कभी सर्वर डाउन, कभी ओटीपी का इंतजार, फार्मर रजिस्ट्री के झंझट में पिस रहा किसान
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शामली। फार्मर रजिस्टरी कराने में किसान लगातार परेशान हो रहे हैं। कभी सर्वर डाउन तो कभी आधार और बैंक खाते में नाम मिसमैच की समस्या, ऊपर से ओटीपी 2-3 दिन बाद मिलना। ऐसी तकनीकी दिक्कतों ने किसानों के लिए यह प्रक्रिया कठिन बना दी है। नतीजा यह है कि जिले में नौ महीने बाद भी सिर्फ 54.64 प्रतिशत किसानों की ही फार्मर रजिस्टरी हो पाई है। जबकि 1,01,707 किसानों को इसमें शामिल होना है।
उत्तर प्रदेश में एग्री-स्टैक योजना के तहत 18 नवंबर 2024 को फार्मर रजिस्टरी अभियान की शुरुआत हुई थी। इसका उद्देश्य किसानों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है ताकि उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, सब्सिडी का लाभ सीधे, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से मिल सके।
अभियान की अंतिम तिथि पहले 31 दिसंबर तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 31 मार्च 2025 कर दिया गया। इसके बाद भी यह प्रक्रिया जारी है ताकि छूटे हुए किसान भी शामिल हो सकें। किसानों को रजिस्टरी के लिए धक्के खाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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-किसानों की जुबानी
अमलापुर के किसान राजवीर ने बताया कि उन्होंने पहले जिजौला कैंप में फार्मर रजिस्टरी कराने की कोशिश की, लेकिन साइट की समस्या के चलते रजिस्टरी नहीं हो पाई।
चौसाना के किसान सुधीर शर्मा ने कहा कि उन्होंने फार्मर रजिस्टरी के लिए कई बार कैंपों के चक्कर लगाए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आखिरकार उन्होंने कई महीने बाद जन सेवा केंद्र से रजिस्टरी कराई, फिर भी उनकी सम्मान निधि की राशि अब तक नहीं आई।
चौसाना की किसान मूर्ति ने आरोप लगाया कि कैंपों में बैठे कर्मचारी सिर्फ लीपा-पोती करते रहे। महीनों तक चक्कर काटने के बावजूद कोई समाधान नहीं मिला, जिससे मेरी सम्मान निधि की किस्त अटक गई।
टपराना के जनसुविधा केंद्र संचालन शोएब का कहना है कि अधूरी रजिस्ट्रियों में कई किसान मृतक पाए गए या आधार और खतौनी में नाम मेल नहीं खा रहे। कुछ किसान तो यह मानकर बैठे हैं कि उनकी रजिस्टरी पहले ही हो चुकी है, इसलिए बार-बार बुलाए जाने से नाराज हैं।
शामली की स्थिति
-जिले में कुल 1,01,707 किसानों की रजिस्टरी होनी है। इनमें से अब तक सिर्फ 54.64% किसान ही रजिस्टरी करा पाए हैं, जबकि लगभग 46% किसान अभी बाकी हैं।
-प्रदेश की रैंकिंग में शामली 25वें स्थान पर है। वहीं बिजनौर 58.38% किसानों की रजिस्ट्री के साथ पहले नंबर पर है।
इन्होेंने कहा
जिला कृषि अधिकारी प्रदीप यादव का कहना है कि किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान लगातार चलाया जा रहा है। कुछ किसान खुद भी इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं, जिसकी वजह से दिक्कत आ रही है। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द जिले में 100% रजिस्टरी पूरी हो।
फार्मर रजिस्टरी से यह होगा फायदा
-एक बार रजिस्टरी कराने वाले किसानों को बार-बार दस्तावेजों का सत्यापन नहीं कराना पड़ेगा।
-सरकार समय-समय पर योजनाओं की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराएगी।
-किसान नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की वेबसाइट पर जाकर खतौनी, आधार और मोबाइल नंबर से पंजीकरण कर सकते हैं।
विशेषज्ञ की राय
उप कृषि निदेशक प्रमोद कुमार का कहना है कि भविष्य में किसी भी कृषि योजना का लाभ लेने के लिए ई-फार्मर रजिस्टरी जरूरी होगी। किसानों को इसमें शामिल होने के लिए आधार और मोबाइल लिंक कराना अनिवार्य है।
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उत्तर प्रदेश में एग्री-स्टैक योजना के तहत 18 नवंबर 2024 को फार्मर रजिस्टरी अभियान की शुरुआत हुई थी। इसका उद्देश्य किसानों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है ताकि उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, सब्सिडी का लाभ सीधे, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से मिल सके।
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अभियान की अंतिम तिथि पहले 31 दिसंबर तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 31 मार्च 2025 कर दिया गया। इसके बाद भी यह प्रक्रिया जारी है ताकि छूटे हुए किसान भी शामिल हो सकें। किसानों को रजिस्टरी के लिए धक्के खाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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-किसानों की जुबानी
अमलापुर के किसान राजवीर ने बताया कि उन्होंने पहले जिजौला कैंप में फार्मर रजिस्टरी कराने की कोशिश की, लेकिन साइट की समस्या के चलते रजिस्टरी नहीं हो पाई।
चौसाना के किसान सुधीर शर्मा ने कहा कि उन्होंने फार्मर रजिस्टरी के लिए कई बार कैंपों के चक्कर लगाए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आखिरकार उन्होंने कई महीने बाद जन सेवा केंद्र से रजिस्टरी कराई, फिर भी उनकी सम्मान निधि की राशि अब तक नहीं आई।
चौसाना की किसान मूर्ति ने आरोप लगाया कि कैंपों में बैठे कर्मचारी सिर्फ लीपा-पोती करते रहे। महीनों तक चक्कर काटने के बावजूद कोई समाधान नहीं मिला, जिससे मेरी सम्मान निधि की किस्त अटक गई।
टपराना के जनसुविधा केंद्र संचालन शोएब का कहना है कि अधूरी रजिस्ट्रियों में कई किसान मृतक पाए गए या आधार और खतौनी में नाम मेल नहीं खा रहे। कुछ किसान तो यह मानकर बैठे हैं कि उनकी रजिस्टरी पहले ही हो चुकी है, इसलिए बार-बार बुलाए जाने से नाराज हैं।
शामली की स्थिति
-जिले में कुल 1,01,707 किसानों की रजिस्टरी होनी है। इनमें से अब तक सिर्फ 54.64% किसान ही रजिस्टरी करा पाए हैं, जबकि लगभग 46% किसान अभी बाकी हैं।
-प्रदेश की रैंकिंग में शामली 25वें स्थान पर है। वहीं बिजनौर 58.38% किसानों की रजिस्ट्री के साथ पहले नंबर पर है।
इन्होेंने कहा
जिला कृषि अधिकारी प्रदीप यादव का कहना है कि किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान लगातार चलाया जा रहा है। कुछ किसान खुद भी इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं, जिसकी वजह से दिक्कत आ रही है। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द जिले में 100% रजिस्टरी पूरी हो।
फार्मर रजिस्टरी से यह होगा फायदा
-एक बार रजिस्टरी कराने वाले किसानों को बार-बार दस्तावेजों का सत्यापन नहीं कराना पड़ेगा।
-सरकार समय-समय पर योजनाओं की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराएगी।
-किसान नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की वेबसाइट पर जाकर खतौनी, आधार और मोबाइल नंबर से पंजीकरण कर सकते हैं।
विशेषज्ञ की राय
उप कृषि निदेशक प्रमोद कुमार का कहना है कि भविष्य में किसी भी कृषि योजना का लाभ लेने के लिए ई-फार्मर रजिस्टरी जरूरी होगी। किसानों को इसमें शामिल होने के लिए आधार और मोबाइल लिंक कराना अनिवार्य है।