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Shamli: पति की मौत के बाद एलआईसी ने पत्नी को नहीं दिया बीमा का पैसा, उपभोक्ता कोर्ट ने सुनाया ये फैसला

Thu, 01 Jan 2026 09:22 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, शामली
अमर उजाला नेटवर्क, शामली Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Thu, 01 Jan 2026 09:22 PM IST
सार

मुजफ्फरनगर निवासी सरिता अग्रवाल ने उपभोक्ता न्यायालय में केस दर्ज कराते हुए बताया कि एलआईसी ने कई बार क्लेम करने के बावजूद बीमा की राशि नहीं दी है। आयोग ने एलआईसी को 2.60 लाख रुपये अदा करने का आदेश सुनाया। 

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Shamli: LIC did not give the insurance money to the wife after the death of her husband, the Commission gave t
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने बीमा पॉलिसी का क्लेम न देने के मामले में सुनवाई की। आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम के मेरठ व मुजफ्फरनगर के शाखा प्रबंधकों को 2.60 लाख रुपये अदा करने का आदेश सुनाया।
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मुजफ्फरनगर की मानसरोवर कालोनी साउथ सिविल लाइंस निवासी सरिता अग्रवाल ने 23 मई 2025 को आयोग में भारतीय जीवन बीमा निगम मेरठ मंडल मेरठ के शाखा प्रबंधक और भारतीय जीवन बीमा निगम मुजफ्फरनगर के शाखा प्रबंधक के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। 
 
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परिवाद में बताया कि उसके पति ने उसकी व अपनी दो जीवन बीमा पॉलिसी 31 मार्च 1994 को क्रमश: 6564 रुपये और 7340 रुपये प्रीमियम देकर कराई थी, जिनकी परिपक्वता अवधि 20 वर्ष थी और पॉलिसी पूरी होने पर पॉलिसी धारकों को दो लाख रुपये मिलने थे। परिवादी के पति की मृत्यु 26 जनवरी 2025 को हो गई। इसके बाद परिवादी को उनकी अलमारी से दोनों पॉलिसी बांड मिले। 
 
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इसके बाद वह मुजफ्फरनगर एलआईसी दफ्तर गई तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया और मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय में जाकर बात करने को कहा। वह मेरठ कार्यालय पहुंची तो वहां भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। परिवादी का कहना है कि उसने बीमा क्लेम के लिए अनेक बार प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया।
 

आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने परिवाद को स्वीकार करते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम के मेरठ व मुजफ्फरनगर के शाखा प्रबंधकों को आदेशित किया कि दोनों पॉलिसी में वर्णित परिपक्वता धनराशि दो लाख रुपये, पॉलिसी की परिपक्वता की तिथि से मय छह प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज, अंतिम भुगतान की तिथि तक,परिवादी को मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हजार रुपये और परिवाद व्यय के रूप में दस हजार रुपये परिवादी को अदा करने के लिए आयोग में आदेश की तिथि के 45 दिन क अंदर जमा करें।
 
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