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स्वयं सहायता समूह बनाएंगे स्कूली बच्चों की ड्रेस
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली।
Updated Fri, 22 Jun 2018 12:51 AM IST
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meeting
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शामली। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत समूह की महिलाएं जिले के प्राथमिक, जूनियर और इंटर कालेज के बच्चों की ड्रेेस तैयार करेंगी। शिक्षा विभाग से कपड़ा मिलने के बाद 15-20 दिन में ड्रेस तैैयार करके स्कूलों में भेजी जाएगी। बृहस्पतिवार को विकास भवन सभाकक्ष में सीडीओ रेनू तिवारी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की चयनित महिलाओं, अधिकारियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।
जिसमें समूह की महिलाओं ने जिले के प्राथमिक, जूनियर और इंटर कालेज के 85091 बालक-बालिकाओं की ड्रेेस तैयार करने का निर्णय लिया गया। सीडीओ ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से तत्काल कमेटी गठित कर ली जाए। जिससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उचित पारिश्रमिक धनराशि क्या दी जाएगी, सभी समूहों की महिलाओं को स्कूल ड्रेस सिलाई का कार्य तत्काल प्रभाव से दिया जाए। जिससे विद्यालय खुलने से पहले बच्चों की ड्रेस तैयार की जा सकें। जिला विद्यालय निरीक्षक और कार्यवाहक बीएसए अनुराधा शर्मा को निर्देश दिए कि वह सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से ड्रेेस सिलाई का कार्य तेजी से कराने काम करें।
सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं कमेटी ग्राम के स्वयं सहायता समूहों से संपर्क करें। चेतावनी दी कि किसी भी विद्यालय में समूहों के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति अथवा ठेकेदारी से स्कूल की ड्रेस सिलाई जाती है तो उस विद्यालय एवं कमेटी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त शैलेंद्र व्यास ने कहा कि गठित स्वयं सहायता समूहों की गरीब महिलाओं को बच्चों की ड्रेस सिलाई करने पर आजीविका का एक साधन मिलेगा, जिससे वह अपनी आजीविका को और बेहतर तरीके से चला सकेगी।
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स्कूलों में जाकर ली जाएगी नापतौल
जिला विद्यालय निरीक्षक और कार्यवाहक बीएसए अनुराधा शर्मा ने कहा कि जिले में चार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 538 प्राइमरी विद्यालय, 262 जूनियर हाई स्कूल, 17 सहायता प्राप्त स्कूल एवं 32 इंटर कॉलेजों के कुल 85,091 बच्चों की स्कूल ड्रेस की सिलाई गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से कराया जाएगा। इस मौके पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक दलगजन सिंह ने बताया कि सहायता समूह की महिलाओं की 10-15 टोली विद्यालयों में जाकर बालक बालिकाओं की ड्रेस के लिए नापतौल करेगी। शिक्षा विभाग से कपड़ा मिल जाने के बाद सहायता समूह की महिलाएं अपने घरों में ड्रेस सिलाई करके के 20-25 दिन में लौटा देगी। दो तीन दिन में शिक्षा विभाग से ड्रेेस का कपड़ा मिल जाएगा। ड्रेस की सिलाई के लिए महिलाओं को 60 से 65 रुपये पारिश्रमिक दिया जाएगा। बैठक में जिले की स्वयं सहायता समूहों की लगभग 150 चिह्नित महिलाएं मौजूद रहीं।
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जिसमें समूह की महिलाओं ने जिले के प्राथमिक, जूनियर और इंटर कालेज के 85091 बालक-बालिकाओं की ड्रेेस तैयार करने का निर्णय लिया गया। सीडीओ ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से तत्काल कमेटी गठित कर ली जाए। जिससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उचित पारिश्रमिक धनराशि क्या दी जाएगी, सभी समूहों की महिलाओं को स्कूल ड्रेस सिलाई का कार्य तत्काल प्रभाव से दिया जाए। जिससे विद्यालय खुलने से पहले बच्चों की ड्रेस तैयार की जा सकें। जिला विद्यालय निरीक्षक और कार्यवाहक बीएसए अनुराधा शर्मा को निर्देश दिए कि वह सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से ड्रेेस सिलाई का कार्य तेजी से कराने काम करें।
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सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं कमेटी ग्राम के स्वयं सहायता समूहों से संपर्क करें। चेतावनी दी कि किसी भी विद्यालय में समूहों के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति अथवा ठेकेदारी से स्कूल की ड्रेस सिलाई जाती है तो उस विद्यालय एवं कमेटी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त शैलेंद्र व्यास ने कहा कि गठित स्वयं सहायता समूहों की गरीब महिलाओं को बच्चों की ड्रेस सिलाई करने पर आजीविका का एक साधन मिलेगा, जिससे वह अपनी आजीविका को और बेहतर तरीके से चला सकेगी।
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स्कूलों में जाकर ली जाएगी नापतौल
जिला विद्यालय निरीक्षक और कार्यवाहक बीएसए अनुराधा शर्मा ने कहा कि जिले में चार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 538 प्राइमरी विद्यालय, 262 जूनियर हाई स्कूल, 17 सहायता प्राप्त स्कूल एवं 32 इंटर कॉलेजों के कुल 85,091 बच्चों की स्कूल ड्रेस की सिलाई गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से कराया जाएगा। इस मौके पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक दलगजन सिंह ने बताया कि सहायता समूह की महिलाओं की 10-15 टोली विद्यालयों में जाकर बालक बालिकाओं की ड्रेस के लिए नापतौल करेगी। शिक्षा विभाग से कपड़ा मिल जाने के बाद सहायता समूह की महिलाएं अपने घरों में ड्रेस सिलाई करके के 20-25 दिन में लौटा देगी। दो तीन दिन में शिक्षा विभाग से ड्रेेस का कपड़ा मिल जाएगा। ड्रेस की सिलाई के लिए महिलाओं को 60 से 65 रुपये पारिश्रमिक दिया जाएगा। बैठक में जिले की स्वयं सहायता समूहों की लगभग 150 चिह्नित महिलाएं मौजूद रहीं।