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दलित वोटरों का बिखराव, बसपा के अलावा दूसरे राजनीतिक दलों की ओर बढ़ा रुझान

Thu, 10 Feb 2022 11:33 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Feb 2022 11:33 PM IST
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Scattering of Dalit voters, increased inclination towards political parties other than BSP
शामली। इस बार जिले की विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान में दलित मतदाताओं विभाजन से बसपा की ताकत कमजोर हुई है। दूसरे राजनीतिक दलों की ओर रुझान बढ़ने से दलित हार जीत की भूमिका में है। जिले में करीब एक लाख दलित वोटर है, जो हर बार दूसरे राजनीति दलों के प्रत्याशियों की हार जीत का फैसला करते है।
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दशकों पूर्व दलित मतदाता कांग्रेस के साथ रहा है। पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी की वर्ष 1991 में हत्या के बाद दलितों का रुझान बसपा की ओर बढ़ गया था। दलितों के मतों से बसपा को ताकत मिली थी। 1996 और 2007 समेत तीन बार मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद बसपा एक ताकत के रुप में उभरकर आई। पिछले चुनावों का आंकलन किया जाए तो दलित वोट बसपा की ताकत बना था। पिछले दस सालों में दलितों के वोटों का बंटवारा होने से बसपा कमजोर होती गई है। वर्ष 2017 विधानसभा और 2019 के लोक सभा चुनाव में बसपा के वोटों का ग्राफ गिरा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछले सालो आजाद समाज पार्टी के नेता के रुप में चंद्रशेखर आजाद दलितों की ताकत के रुप में उभरे हैं।
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विधानसभा चुनाव 2022 में वह सपा गठबंधन के साथ खडे है। दस फरवरी को विधानसभा के प्रथम चरण के मतदान में दलितो के मतो का पचास फीसदी विभाजन होने से बसपा की ताकत कमजोर हुई है। विधानसभा चुनाव 2022 के प्रथमचरण में शामली, कैराना और थानाभवन विधानसभा में दलित मतों का बिखराव नजर आया है। बसपा के पास कैडर बेस दलित रह गया है। पचास फीसदी दलित मतदाताओ का आजाद समाज पार्टी , भाजपा, गठबंधन और आजाद पार्टी की ओर रुझान बढ़ा है। शामली विधानसभा के बनत, शामली शहर, खेडी, करमू, लिलौन गांव थानाभवन विधानसभा क्षेत्र के कैडी, सिक्का सिलावर, बधेव, मुंडेट, कसेरवा कला, टिटौली, सेवापुर समेत दर्जनों गांव बसपा के दलित वोटरो मे परंपरागत बदलाव आया है। दलित वोटर का रुझान भाजपा, गठबंधन की ओर बढ़ा है। दलित वोटरो का बिखराव जिले के राजनीतिक दलों की हारजीत की भूमिका निभाएगा। खास कर दस प्रतिशत से ज्यादा दलित वोटर ईट भट्टों के कारोबार से जुड़ा होने से इस बार विधानसभा चुनाव मे हरियाणा-पंजाब व दूसरे प्रदेशों में बाहर होने के कारण वोट नहीं कर पाया है।
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