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नहीं मिले फसल के वाजिब दाम, कैसे लगाएं धान

Mon, 08 Jun 2020 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2020 11:54 PM IST
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Rough prices were not received, how to plant paddy
सत्तार - फोटो : shamli
थानाभवन। एक तरफ लॉकडाउन तो दूसरी तरफ मौसम की मार से किसान बेहाल हैं। लॉकडाउन में फसलों के दाम नहीं मिलने से किसानों को फसल को नष्ट करना पड़ा। अब धान की फसल की तैयारी की है, लेकिन फसल की लागत में आने वाले खर्च के लिए किसानों के पास पैसे नहीं है। पहली फसल उधार लेकर बोई थी, वह उधार दिया नहीं जा सका। अब अगली फसल बोने की चिंता किसानों को सता रही है। अमर उजाला टीम ने किसानों से बातचीत कर पड़ताल की। पेश है रिपोर्ट...
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डिमांड न होने से जोतनी पड़ी फसल
गांव मसावी निवासी सत्तार ने बताया कि खेत में 30 बीघा बंद गोभी की फसल को तैयार करने में करीब दो लाख रुपये की लागत आई थी। जब फसल तैयार हुई तो व्यापारी भी आने शुरू हो गए थे, लेकिन उसी दौरान लॉकडाउन लग गया और होटल-रेस्टोरेंट आदि प्रतिष्ठान बंद हो गए। पत्ता गोभी का सब्जी में ना के बराबर इस्तेमाल होता है, इसलिए डिमांड खत्म हो गई। फसल से लागत भी पूरी नही हुई। अब इस खेत में धान की फसल लगानी है। धान लगाने में भी 80 हजार रुपये का खर्च आना है। समझ नहीं आ रहा कहां से लाएं।
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डेढ़ लाख का खर्चा आया, पर नहीं मिला दाम
मसावी गांव के ही किसान शान मोहम्मद ने बताया कि 21 बीघा खेत में पत्ता गोभी की फसल लगाई थी। लॉकडाउन लगने से पहले व्यापारी ने पत्ता गोभी के सात रुपये किलो के हिसाब से पैसा लगा दिया था। एक बीघा खेत में करीब 60 से 70 क्विंटल गोभी की पैदावार हुई थी और इस साल गोभी की बुआई में करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया था। लेकिन लॉकडाउन लगने से पूरे बजट पर पानी फेर दिया। क्योंकि, पूरी गोभी की फसल का एक रुपये का भी दाम नहीं मिला। इस नुकसान का असर लॉकडाउन में घर की रसोई का भी बजट बिगाड़ दिया है।
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बचत तो दूर, एक लाख का कर्जा हो गया
गांव हसनपुर लुहारी निवासी तहसीन ने बताया कि उसने इस साल छह बीघा जमीन ठेके पर लेकर पत्ता गोभी की फसल लगाई था। इस फसल को लगाने में उसका करीब 65 हजार रुपये का खर्च आया। सोचा था कि इस फसल से अच्छे खासे पैसों की बचत हो जाएगी। लेकिन, जब फसल तैयार हुई तो उसी समय लॉकडाउन लग गया। अब हालत ये है कि ठेके के पैसे लगाकर एक लाख रुपये का कर्ज हो गया है। साथ ही अब इस खेत में धान की फसल लगाने के भी पैसे नहीं बचे। अब फिर किसी से और कर्ज लेकर धान की फसल लगानी पड़ेगी।

मौसम की मार से मूली की फसल बर्बाद
गांव हसनपुर लुहारी निवासी सचिन धीमान ने बताय ाकि इस साल दस बीघा खेत में मूली की फसल लगाई थी। शुरूआत में खेत में अच्छी फसल उगी थी। लेकिन, लगातार बारिश व ओले पड़ने के कारण मूली की पूरी फसल बर्बाद हो गई। इस फसल को लगाने में करीब 12 हजार रुपये प्रति बीघा की अब तक लागत आई थी। इससे एक लाख रुपये का सीधा नुकसान हुआ है। वजह ये है कि इस साल खेत से एक क्विंटल भी मूली मंडी में नहीं पहुंची है। अब इस खेत में धान की फसल लगाने के लिए अपने पिता से 50 हजार रुपये उधार लिए हैं। जबकि, उम्मीद थी कि मूली की फसल इस साल करीब एक लाख रुपये की बचत देकर जाएगी।

सचिन धीमान

सचिन धीमान- फोटो : SHAMLI

किसान तहसीन

किसान तहसीन- फोटो : SHAMLI

शान मोहम्मद मसावी किसान

शान मोहम्मद मसावी किसान- फोटो : SHAMLI

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