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कोरोना कर्फ्यू में रिम धुरा उद्योग हुआ धड़ाम
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कोरोना कर्फ्यू में रिम-धुरा उद्योग हुआ धड़ाम
शामली। देशभर में शामली को पहचान दिलाने वाला रिम-धुरा उद्योग कोरोना कर्फ्यू में ठप पड़ा हुआ है। जिले में कृषि यंत्र रिम-धुरा बनाने की लगभग 35 इकाई है। यहां पर निर्मित रिम -धुरे की पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, महाराष्ट्र समेत देशभर के अधिकतर राज्यों में सप्लाई होती है। कोरोना कर्फ्यू में बाजार बंद होने से आर्डर नहीं मिलने और सरकार द्वारा ऑक्सीजन की सप्लाई बंद किए जाने से यह उद्योग ठप पड़ा हुआ है। इन सभी इकाईयों से सालाना 70 से 75 करोड़ का टर्न ओवर होता है।
रिम धुरा एसोसिएशन शामली के अध्यक्ष प्रविंद जैन का कहना है कोरोना कर्फ्यू में उद्योग चलाए जाएं। रिम धुरा की सभी फैक्टरी में ऑक्सीजन की जरूरत होती है। सरकार ने उद्योगों को ऑक्सीजन देना बंद कर दिया। इससे उत्पादन बंद पड़ा है। बाजार बंद होने से डिमांड नहीं है। लोहे के कच्चे माल के दाम दो माह में 40 रुपये से बढ़कर 68 रुपये और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से देनी पड़ती है। उद्योग के बिजली के बिल व अन्य सभी खर्च ज्यों के त्यों है। सरकार को इन उद्योगों को चलाने के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था कराने और बाजार खोले जाने की छूट मिलनी चाहिए।
रिम धुरा एसोसिएशन के सचिव वेद प्रकाश आर्य का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या ऑक्सीजन न होना है। लोहे को काटने में ऑक्सीजन की जरूरत होती है। 20 दिन से अधिक हो गए हैं और उत्पादन बिल्कुल बंद है। तैयार माल स्टॉक पड़ा है। कोरोना कर्फ्यू में बाजार बंद होने से ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। लोहे के कच्चे माल के दाम पिछले साल अगस्त 2020 में 35 रुपये किलो के करीब थे जो अब दोगुने हो गए हैं। 18 प्रतिशत जीएसटी लगाकर 80 रुपये किलो के लगभग हो गए हैं। इन हालात में उद्योग बंदी के कगार पर हैं। सरकार को रिम धुरा उद्योग चलाने के लिए रियायतें देनी चाहिए।
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रिम धुरा एसोसिएशन के सचिव अनिल कच्छल का कहना है कि लोहे के दाम बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना कर्फ्यू में बाजार बंद होने के कारण माल के आर्डर मिल नहीं रहे। उत्पादन बंद चल रहा है, जो माल तैयार रखा है, वह बिक नहीं रहा है। ऐसे हालात में उद्योग बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। सरकार को उद्योगों को चलाने के लिए सहूलियतें देनी चाहिए।
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शामली। देशभर में शामली को पहचान दिलाने वाला रिम-धुरा उद्योग कोरोना कर्फ्यू में ठप पड़ा हुआ है। जिले में कृषि यंत्र रिम-धुरा बनाने की लगभग 35 इकाई है। यहां पर निर्मित रिम -धुरे की पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, महाराष्ट्र समेत देशभर के अधिकतर राज्यों में सप्लाई होती है। कोरोना कर्फ्यू में बाजार बंद होने से आर्डर नहीं मिलने और सरकार द्वारा ऑक्सीजन की सप्लाई बंद किए जाने से यह उद्योग ठप पड़ा हुआ है। इन सभी इकाईयों से सालाना 70 से 75 करोड़ का टर्न ओवर होता है।
रिम धुरा एसोसिएशन शामली के अध्यक्ष प्रविंद जैन का कहना है कोरोना कर्फ्यू में उद्योग चलाए जाएं। रिम धुरा की सभी फैक्टरी में ऑक्सीजन की जरूरत होती है। सरकार ने उद्योगों को ऑक्सीजन देना बंद कर दिया। इससे उत्पादन बंद पड़ा है। बाजार बंद होने से डिमांड नहीं है। लोहे के कच्चे माल के दाम दो माह में 40 रुपये से बढ़कर 68 रुपये और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से देनी पड़ती है। उद्योग के बिजली के बिल व अन्य सभी खर्च ज्यों के त्यों है। सरकार को इन उद्योगों को चलाने के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था कराने और बाजार खोले जाने की छूट मिलनी चाहिए।
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रिम धुरा एसोसिएशन के सचिव वेद प्रकाश आर्य का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या ऑक्सीजन न होना है। लोहे को काटने में ऑक्सीजन की जरूरत होती है। 20 दिन से अधिक हो गए हैं और उत्पादन बिल्कुल बंद है। तैयार माल स्टॉक पड़ा है। कोरोना कर्फ्यू में बाजार बंद होने से ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। लोहे के कच्चे माल के दाम पिछले साल अगस्त 2020 में 35 रुपये किलो के करीब थे जो अब दोगुने हो गए हैं। 18 प्रतिशत जीएसटी लगाकर 80 रुपये किलो के लगभग हो गए हैं। इन हालात में उद्योग बंदी के कगार पर हैं। सरकार को रिम धुरा उद्योग चलाने के लिए रियायतें देनी चाहिए।
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रिम धुरा एसोसिएशन के सचिव अनिल कच्छल का कहना है कि लोहे के दाम बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना कर्फ्यू में बाजार बंद होने के कारण माल के आर्डर मिल नहीं रहे। उत्पादन बंद चल रहा है, जो माल तैयार रखा है, वह बिक नहीं रहा है। ऐसे हालात में उद्योग बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। सरकार को उद्योगों को चलाने के लिए सहूलियतें देनी चाहिए।