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बुराइयों का त्याग ही सच्चा रक्षा बंधन: ब्रह्मकुमारी बबीता
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों ने पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों तथा मीडियाकर्मियों को राखी बांधी।
प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय कंडेला सेंटर की ओर से ब्रह्मकुमारी बबीता व ब्रह्मकुमारी माफी ने बुधवार को कोतवाली, तहसील व कचहरी में पहुंचकर पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों व मीडियाकर्मियों को राखी बांधी। ब्रह्मकुमारी बबीता ने बताया कि प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से 15 दिन पहले रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। वैसे तो रक्षाबंधन पर बहन-भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है। वास्तव में भाई-बहन का पवित्र रिश्ता होता है। रक्षा का मतलब हमें हर एक की रक्षा करनी चाहिए। बुराई का त्याग ही सच्चा रक्षाबंधन हैं।
उन्होंने कहा कि विश्व विकारों को खत्म कर हमें पुण्य के कर्म करने चाहिए ताकि परिवार में एकता बनी रहे। हमें परिवार में रहते हुए चिंता व भय नहीं होता। हमें अपने जीवन की बुराइयों से रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि तिलक लगाने का मतलब आध्यात्मिक स्मृति में टिक जाना होता है। आध्यात्मिक स्मृति में रहकर हर कर्म करने से विजय होती है। उन्होंने कहा कि अगर हम परिवार में रहते हुए अपने भाइयों से डरेंगे तो सच्ची आजादी अमृत महोत्सव नहीं होगा। सच्ची आजादी तभी होंगी जब राखी बांधकर मानसिक विकृतियों बुराइयों एवं कुरीतियों से स्वयं की रक्षा का संकल्प लेना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी होनी चाहिए। व्यक्ति को मनोविकार और बुराइयों व व्यसनों से स्वयं की रक्षाकर अपने को आध्यात्मिक व नैतिक मूल्यों के बंधन में बांधे तभी रक्षाबंधन के पवित्र पर्व की सार्थकता साकार होगी।
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कैराना। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों ने पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों तथा मीडियाकर्मियों को राखी बांधी।
प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय कंडेला सेंटर की ओर से ब्रह्मकुमारी बबीता व ब्रह्मकुमारी माफी ने बुधवार को कोतवाली, तहसील व कचहरी में पहुंचकर पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों व मीडियाकर्मियों को राखी बांधी। ब्रह्मकुमारी बबीता ने बताया कि प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से 15 दिन पहले रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। वैसे तो रक्षाबंधन पर बहन-भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है। वास्तव में भाई-बहन का पवित्र रिश्ता होता है। रक्षा का मतलब हमें हर एक की रक्षा करनी चाहिए। बुराई का त्याग ही सच्चा रक्षाबंधन हैं।
उन्होंने कहा कि विश्व विकारों को खत्म कर हमें पुण्य के कर्म करने चाहिए ताकि परिवार में एकता बनी रहे। हमें परिवार में रहते हुए चिंता व भय नहीं होता। हमें अपने जीवन की बुराइयों से रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि तिलक लगाने का मतलब आध्यात्मिक स्मृति में टिक जाना होता है। आध्यात्मिक स्मृति में रहकर हर कर्म करने से विजय होती है। उन्होंने कहा कि अगर हम परिवार में रहते हुए अपने भाइयों से डरेंगे तो सच्ची आजादी अमृत महोत्सव नहीं होगा। सच्ची आजादी तभी होंगी जब राखी बांधकर मानसिक विकृतियों बुराइयों एवं कुरीतियों से स्वयं की रक्षा का संकल्प लेना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी होनी चाहिए। व्यक्ति को मनोविकार और बुराइयों व व्यसनों से स्वयं की रक्षाकर अपने को आध्यात्मिक व नैतिक मूल्यों के बंधन में बांधे तभी रक्षाबंधन के पवित्र पर्व की सार्थकता साकार होगी।
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