फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Ramlila staging teaches how to live, knowledge increases

रामलीला मंचन जीने का तरीका सिखाती है, बढ़ता है ज्ञान

Fri, 08 Oct 2021 01:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Oct 2021 01:03 AM IST
विज्ञापन
Ramlila staging teaches how to live, knowledge increases
जलालाबाद। करीब पिछले 150 वर्षों से कस्बे में रामलीला का मंचन होता आ रहा है। पहले कस्बे के साथ देहात क्षेत्र के कई गांवों के ग्रामीण रामलीला मंचन देखने के लिए बैलगाड़ी और पैदल आते थे।
विज्ञापन

रामलीला कस्बे के मोती बाजार स्थित रामलीला भवन पर होती थी। बाजार में सड़क व दुकानों के बड़े-बड़े चबूतरे, छतों पर महिलाएं बैठकर रामलीला का आनंद लेती थीं। रात्रि 8:00 बजे से रात्रि दो से तीन बजे तक रामलीला चलती थी, उस समय बिना माइक के रामलीला होती थी। दर्शक अपने घरों से चादर, टाट के बोरे लाकर बिछा लेते थे। अब समिति बैठने के लिए दरें बिछवाती। रामलीला में आए बुजुर्ग और महिलाओं का कहना है कि रामलीला मंचन देखने से भगवान के प्रति श्रद्धा भक्ति के साथ ज्ञान बढ़ता है और मनुष्य के जीवन को जीने की शिक्षा मिलती है।
विज्ञापन

कस्बे के मोहल्ला दरबार निवासी 70 वर्षीय बाबूराम नायक ने बताया कि वह पिछले 55 वर्षों से नियमित रूप से रामलीला देखते हुए चले आ रहे हैं, परिवार साथ में रहता है। इसके अलावा मोहल्ला गंगा आर्य नगर निवासी 90 वर्षीय रामदत्त आहूजा ने बताया कि वह रामलीला देखने के साथ कई साल तक रामलीला में राम, सीता, मंदोदरी, कौशल्या, तारा, शबरी, विश्वामित्र, गुरु वशिष्ठ आदि की भूमिका निभाते आ रहे हैं। आज भी रामलीला में देखने जाते हैं और मौका मिलता है तो भूमिका भी निभाते हैं। प्रताप नगर निवासी 85 वर्षीय राधेश्याम बजाज का कहना है कि वह पिछले 50 वर्षों से रामलीला देखते आ रहे हैं। मुझे आज भी ज्ञान भक्ति श्रद्धा की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

50 वर्षीय श्यामलाल कश्यप ने बताया कि पिता पलटू राम के साथ रामलीला देखने जाता था, तो मुझे रिहर्सल में सुग्रीव की भूमिका हेतु अभिनय के लिए चुना गया था। तब से लगातार में रावण, सुग्रीव, मंत्रा, नारद आदि की भूमिका निभाता आ रहा हूं और प्रतिदिन परिवार के साथ रामलीला को देखता हूं। आर्य नगर निवासी 80 वर्षीय चरण लाल बजाज का कहना है कि बचपन से रामलीला से जुड़ा हूं। मैंने हनुमान, केवट, सुतीक्षण आदि की भूमिका निभाई है। 75 वर्षीय लाला महेंद्र कुमार क्षेत्र के प्रसिद्ध हलवाई है। उनका कहना है कि उनके पिताजी स्वर्गीय लच्छीराम नकलची नताखटिया की भूमिका निभाते थे तो हम भी तभी से रामलीला देख कर चले आ रहे हैं। मनोरंजन के साथ भक्ति भाव श्रद्धा की भावना रहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed