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Shamli News: पर्चा ऑनलाइन, इलाज ऑफलाइन
Sun, 19 Jul 2026 11:33 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 19 Jul 2026 11:33 PM IST
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शामली। जिला अस्पताल में मरीजों के पर्चे ऑनलाइन कंप्यूटराइज्ड बनाने के साथ ही आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) आईडी बनाई जाती है, लेकिन इलाज ऑफलाइन यानी पर्चे पर ही किया जा रहा है। मरीजों की आभा आईडी पर इलेक्ट्रिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) दर्ज न होने से मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
जिला अस्पताल में मरीजों का पंजीकरण खिड़की पर कंप्यूटराइज्ड पर्चा बनाया जाता है। जिन मरीजों के पास आधार कार्ड होता है, उनकी आभा आईडी भी बनाई जा रही है। इसके अलावा क्यूआर कोड लगाया गया है। इससे मरीज अपनी आभा आईडी खुद भी बना सकते हैं। अस्पताल में रोजाना 150 से ज्यादा मरीजों की आभा आईडी बन रही है, लेकिन इलाज कराने में उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इसकी वजह ये है कि आभा आईडी पर मरीज का ईएचआर दर्ज नहीं किया जा रहा है।
जबकि शासन की तरफ से आभा आईडी पर मरीज का ईएचआर दर्ज करने के निर्देश हैं। लेकिन जिला अस्पताल में अब ऐसा नहीं हो रहा है। यहां ओपीडी में चिकित्सक मरीज के पर्चे पर ही दवा व जांच लिखकर उपचार कर रहे हैं, जिससे मरीजों को आभा आईडी बनने का लाभ नहीं मिल पा रहा है। nये है आभा आईडी : आभा आईडी भारत सरकार के आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन द्वारा शुरू किया गया 14 अंकों का डिजिटल स्वास्थ्य पहचान पत्र है। यह मरीज के सभी मेडिकल रिकॉर्ड्स डॉक्टर के पर्चे, लैब रिपोर्ट्स और डिस्चार्ज समरी को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखता है। nआभा आईडी के लाभ : आभा आईडी पर ईएचआर दर्ज होने से बाद में कहीं पर भी अगर मरीज को फिर से कोई बीमारी होने पर इलाज की जरूरत होती है तो चिकित्सक को आभा आईडी पर उपलब्ध पुराना मेडिकल रिकॉर्ड देखकर मरीज की बीमारी समझने और इलाज देने में मदद मिलेगी। आभा आईडी पर ईएचआर दर्ज होने से मरीज को पुराने पर्चे या फाइल रखने की जरूरत नहीं होगी।
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जिला अस्पताल में मरीजों का पंजीकरण खिड़की पर कंप्यूटराइज्ड पर्चा बनाया जाता है। जिन मरीजों के पास आधार कार्ड होता है, उनकी आभा आईडी भी बनाई जा रही है। इसके अलावा क्यूआर कोड लगाया गया है। इससे मरीज अपनी आभा आईडी खुद भी बना सकते हैं। अस्पताल में रोजाना 150 से ज्यादा मरीजों की आभा आईडी बन रही है, लेकिन इलाज कराने में उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इसकी वजह ये है कि आभा आईडी पर मरीज का ईएचआर दर्ज नहीं किया जा रहा है।
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जबकि शासन की तरफ से आभा आईडी पर मरीज का ईएचआर दर्ज करने के निर्देश हैं। लेकिन जिला अस्पताल में अब ऐसा नहीं हो रहा है। यहां ओपीडी में चिकित्सक मरीज के पर्चे पर ही दवा व जांच लिखकर उपचार कर रहे हैं, जिससे मरीजों को आभा आईडी बनने का लाभ नहीं मिल पा रहा है। nये है आभा आईडी : आभा आईडी भारत सरकार के आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन द्वारा शुरू किया गया 14 अंकों का डिजिटल स्वास्थ्य पहचान पत्र है। यह मरीज के सभी मेडिकल रिकॉर्ड्स डॉक्टर के पर्चे, लैब रिपोर्ट्स और डिस्चार्ज समरी को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखता है। nआभा आईडी के लाभ : आभा आईडी पर ईएचआर दर्ज होने से बाद में कहीं पर भी अगर मरीज को फिर से कोई बीमारी होने पर इलाज की जरूरत होती है तो चिकित्सक को आभा आईडी पर उपलब्ध पुराना मेडिकल रिकॉर्ड देखकर मरीज की बीमारी समझने और इलाज देने में मदद मिलेगी। आभा आईडी पर ईएचआर दर्ज होने से मरीज को पुराने पर्चे या फाइल रखने की जरूरत नहीं होगी।
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