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भाजपा सरकार में पुलिस मुठभेड़ के दौरान ढेर हुए कई शातिर बदमाश

Mon, 08 Nov 2021 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 11:36 PM IST
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Police became trouble for criminals in four and a half years
साढ़े चार साल में बदमाशों पर कहर बनकर टूटी पुलिस
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शामली। रंगदारी व हत्या की वारदातों के बाद कैराना के व्यापारियों में दहशत का माहौल बन गया था। बदमाशों के खौफ के चलते व्यापारियों ने पलायन करना शुरू कर दिया था। 2017 में प्रदेश में सत्ता बदली और सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कमान संभाली तो पुलिस को बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई की खुली छूट दे दी गई। पुलिस भी मानों इसी का इंतजार कर रही थी। साढ़े चार साल में पुलिस ने चुन चुन कर शातिर कुख्यात बदमाशों को निशाना बनाया। कई बदमाश मुठभेड़ में मारे गए, तो अधिकांश जेल के भीतर पहुंच गए। बदमाशों, गुंडों में पुलिस का खौफ पैदा हुआ और कैराना में सुरक्षा का माहौल बना।
भाजपा सरकार बनने पर कैराना को अपराध मुक्त और भयमुक्त बनाने की दिशा में पुलिस की कार्रवाई शुरू हुई। इसकी वजह यह थी कि कैराना के पूर्व सांसद हुकुम सिंह ने कैराना से व्यापारियों के पलायन का मुद्दा उठाया था। पलायन का मुद्दा प्रदेश ही नहीं पूरे देश में गूंजा था और भाजपा ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया था। कैराना में शातिर मुकीम काला को कैराना पलायन का गुनहगार माना गया। उसके आतंक व दहशत से व्यापारियों का पलायन शुरू हुआ था। सरकार बनने के बाद सबसे पहले मुकीम काला गैंग ही पुलिस के निशाने पर रहा। पुलिस ने मुठभेड़ में शातिर बदमाश नौशाद उर्फ डैनी, सरवर, इकराम उर्फ टोला, साबिर जंधेड़ी, राजू खुन्नी और अकबर को मार गिराया। साल 2020 में जिले में मुठभेड़ की करीब 50 घटनाओं में 107 अपराधी गिरफ्तार हुए, जिनमें 26 बदमाश घायल हुए। मुठभेड़ के दौरान 12 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। इसके अलावा इसी साल में 19 ईनामी बदमाश गिरफ्तार हुए।
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मुकीम काला की मौत से हटा खौफ का कुहासा
कैराना में व्यापारियों के पलायन का गुनहगार माना जाने वाला दो लाख का इनामी गांव जहानपुरा निवासी मुकीम काला पुलिस के खौफ से जेल चला गया था। उसे चित्रकूट जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। जहां छह माह पहले मई में जेल में ही गैंगवार के चलते मुकीम काला की हत्या कर दी गई । मुकीम काला पर रंगदारी, मकान, दुकान पर कब्जे, व्यापारियों की हत्या करने समेत अनेक आपराधकि मुकदमे दर्ज थे। मुकीम के साथ ही एक अन्य बदमाश मेराजुद्दीन की जेल में हत्या हुई थी। इसके बाद इन दोनों बदमाशों की हत्या करने वाले बंदी अंशुल दीक्षित भी जेल के अंदर पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। मुकीम काला जब तक जेल में था, तब भी कहीं न कहीं व्यापारियों में उसके नाम का खौफ तारी था। लेकिन उसकी हत्या के बाद व्यापारियों के ऊपर तारी खौफ का कुहासा पूरी तरह छंट गया।
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