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परिवार के साथ संभाल रहा हॉट स्पॉट का जिम्मा
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सिपाही परमिंदर
- फोटो : SHAMLI
परिवार के साथ हॉट स्पॉट का जिम्मा संभाल रहा परमिंदर
थानाभवन (शामली)। कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही जंग में एक ऐसा सिपाही भी है, जो पिछले दो माह से अपने परिवार को छोड़ क्षेत्र के हॉट स्पॉट में दिन-रात ड्यूटी दे रहा है। परिजन चिंतित भी हैं, लेकिन उसका साफ कहना है कि अब तो कोराना की जंग खत्म होने के बाद ही घर जाएगा।
सिपाही परमिंदर कुमार ने बताया कि कादरगढ़ चौकी क्षेत्र के गांव भैसानी इस्लामपुर में तैनात है। भैसानी को कोरोना पॉजीटिव मामले मिलने के बाद सील कर दिया था। यहां उनकी सुबह आठ से शाम आठ बजे यानी कुल 12 घंटे की ड्यूटी भैसानी के अंदर ही है। बताया कि पिछले दो माह से वह घर नहीं गए हैं। परिवार में माता-पिता के अलावा आठ, छह व चार साल के तीन बच्चे व पत्नी है। जब से परिजनों को पता चला है कि उनकी ड्यूटी हॉट स्पॉट में चल रही है, तब से परिजन चिंतित हैं। उनकी आठ साल की बेटी भी हर दिन फोन कर उनका हाल जानती है कि वह ठीक भी हैं या नहीं। परमिंदर कुमार ने बताया कि माता-पिता भी लगातार उसे फोन कर लोगों से सतर्क रहने की सलाह तो दे ही रहे हैं, जबकि, लगातार उत्साहवर्धन कर उसे देश की सेवा में डटे रहने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। बताया कि पिछले दो माह से माता-पिता के हौसले ने ही उसे अंदर से मजबूत बना रखा है। बताया कि वह थोड़ा-बहुत इस बात के तो चिंतित है कि इस दौर में परिवार की सेवा नहीं कर पा रहा हूं, लेकिन उन्होंने तय किया है कि जब तक कोरोना का प्रकोप खत्म नहीं होगा तब तक वह घर नहीं जाएंगे।
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थानाभवन (शामली)। कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही जंग में एक ऐसा सिपाही भी है, जो पिछले दो माह से अपने परिवार को छोड़ क्षेत्र के हॉट स्पॉट में दिन-रात ड्यूटी दे रहा है। परिजन चिंतित भी हैं, लेकिन उसका साफ कहना है कि अब तो कोराना की जंग खत्म होने के बाद ही घर जाएगा।
सिपाही परमिंदर कुमार ने बताया कि कादरगढ़ चौकी क्षेत्र के गांव भैसानी इस्लामपुर में तैनात है। भैसानी को कोरोना पॉजीटिव मामले मिलने के बाद सील कर दिया था। यहां उनकी सुबह आठ से शाम आठ बजे यानी कुल 12 घंटे की ड्यूटी भैसानी के अंदर ही है। बताया कि पिछले दो माह से वह घर नहीं गए हैं। परिवार में माता-पिता के अलावा आठ, छह व चार साल के तीन बच्चे व पत्नी है। जब से परिजनों को पता चला है कि उनकी ड्यूटी हॉट स्पॉट में चल रही है, तब से परिजन चिंतित हैं। उनकी आठ साल की बेटी भी हर दिन फोन कर उनका हाल जानती है कि वह ठीक भी हैं या नहीं। परमिंदर कुमार ने बताया कि माता-पिता भी लगातार उसे फोन कर लोगों से सतर्क रहने की सलाह तो दे ही रहे हैं, जबकि, लगातार उत्साहवर्धन कर उसे देश की सेवा में डटे रहने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। बताया कि पिछले दो माह से माता-पिता के हौसले ने ही उसे अंदर से मजबूत बना रखा है। बताया कि वह थोड़ा-बहुत इस बात के तो चिंतित है कि इस दौर में परिवार की सेवा नहीं कर पा रहा हूं, लेकिन उन्होंने तय किया है कि जब तक कोरोना का प्रकोप खत्म नहीं होगा तब तक वह घर नहीं जाएंगे।
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