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नमी बताकर खरीद केंद्रों से लौटाया जा रहा धान
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थानाभवन में खाली पडा राजकीय धान क्रय केन्द्र
- फोटो : SHAMLI
नमी बताकर खरीद केंद्रों से लौटाया जा रहा धान
शामली। जिले में धान खरीद केंद्र 29 सितंबर से शुरू कर दिए गए, लेकिन अभी तक इन पर एक क्विंटल धान भी नहीं खरीदा गया। धान में नमी अधिक बताकर किसानों को केंद्रों से लौटाया जा रहा है। कई किसान सैंपल लेकर जा रहे हैं, तो उन्हें धान सुखाकर लाने के लिए कहा जा रहा है। नतीजा यह है कि पांच दिन बीतने के बावजूद खरीद केंद्र सूने पड़े हैं। शनिवार को जिले के केंद्रों का जायजा लिया गया तो उन पर धान की खरीद होना नहीं पाया गया।
जिले में धान की खरीद के लिए सात खरीद केंद्र बनाए गए हैं। कागजों में इन केंद्रों पर धान की खरीद शुरू होने की बात कही जा रही है, लेकिन खरीदा एक भी दाना नहीं गया। जलालाबाद कृषि उत्पादन मंडी में भारतीय खाद्य निगम का धान खरीद केंद्र संचालित हैं। यहां किसान धान का सैंपल लेकर आ रहे हैं, लेकिन उसमें नमी बताकर सुखाकर लाने के लिए कहा जा रहा है। खरीद केंद्र के प्रभारी अमित कुमार यादव ने बताया कि अभी धान की खरीद नहीं हुई है। कोई भी किसान फसल लेकर नहीं आया, बल्कि नमूना लेकर आए थे। उसमें नमी होने के कारण धान नहीं लिया जा सका। उन्हें बताया गया है कि 17 प्रतिशत से ज्यादा नमी वाला धान नहीं लिया जाएगा।
कैराना में आर्यपुरी बाईपास पर चल रहे धान खरीद केंद्र पर अब तक केवल 3-4 किसान केवल भाव पूछने के लिए ही पहुंचे हैं। 10-12 दिन में धान लाने के बात कह कर वापस चले गए। मन्ना माजरा निवासी किसान महबूब ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्र पर मोटा धान खरीदा जाता है, जबकि क्षेत्र में अधिकतर किसान बासमती की पैदावार करते हैं। बासमती का भाव ज्यादा है। मोहल्ला आलकला निवासी आरिफ चौधरी का कहना है कि क्षेत्र के किसान मोटा धान कम ही उगाते हैं। इसलिए केंद्रों पर बिक्री करने नहीं जा रहे। कुछ किसान गए हैं, लेकिन अभी धान में नमी ज्यादा बताई जा रही है। उधर, धान क्रय केंद्र प्रभारी सुशील कुमार साहू ने बताया कि तीन दिन में केंद्र पर धान नहीं आया है। यहां बासमती की पैदावार अधिक होने के कारण मोटा धान कम ही आता है। ऊन में भी धान खरीद केंद्र पर कुछ किसान सैंपल लेकर आए, लेकिन उसमें भी नमी बताकर सुखाकर लाने के लिए कहा गया। कांधला में क्षेत्र के किसानों को गंगेरू में ही धान खरीद केंद्र होने का पता है, जबकि धान का खरीद केंद्र कांधला समिति में मनाया गया है। गांव चढाव निवासी किसान सोनू ने बताया कि वह दो दिन से गंगेरू सेंटर पर आ रहे हैं, लेकिन यह बंद है। गांव गंगेरू निवासी महबूब अंसारी का कहना है कि गांव के बस स्टैंड पर सरस हाट पर धान खरीद केंद्र को बनाया जाता था, लेकिन अब तक यहां पर कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। उधर, थानाभवन के धान खरीद केंद्र पर भी किसान धान लेकर नहीं पहुंचे हैं। वहां तैनात कर्मचारियों ने बताया कि कुछ किसान सैंपल लेकर आए थे लेकिन उसमें नमी ज्यादा थी।
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22 प्रतिशत से ज्यादा आ रही नमी
डिप्टी आरएमओ निहारिका सिंह ने बताया कि जनपद में अभी धान की खरीद नहीं हुई है। अभी धान में नमी का स्तर 22 प्रतिशत से ज्यादा आ रहा है। मानक के अनुरूप 17 प्रतिशत से ज्यादा नमी नहीं होनी चाहिए। केंद्र पर आने वाले धान की नमी की जांच की जाती है। नमी का स्तर 17 प्रतिशत से ज्यादा होता है खरीद नहीं होती। उनका कहना है कि कांधला में समिति में धान क्रय केंद्र संचालित है।
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शामली। जिले में धान खरीद केंद्र 29 सितंबर से शुरू कर दिए गए, लेकिन अभी तक इन पर एक क्विंटल धान भी नहीं खरीदा गया। धान में नमी अधिक बताकर किसानों को केंद्रों से लौटाया जा रहा है। कई किसान सैंपल लेकर जा रहे हैं, तो उन्हें धान सुखाकर लाने के लिए कहा जा रहा है। नतीजा यह है कि पांच दिन बीतने के बावजूद खरीद केंद्र सूने पड़े हैं। शनिवार को जिले के केंद्रों का जायजा लिया गया तो उन पर धान की खरीद होना नहीं पाया गया।
जिले में धान की खरीद के लिए सात खरीद केंद्र बनाए गए हैं। कागजों में इन केंद्रों पर धान की खरीद शुरू होने की बात कही जा रही है, लेकिन खरीदा एक भी दाना नहीं गया। जलालाबाद कृषि उत्पादन मंडी में भारतीय खाद्य निगम का धान खरीद केंद्र संचालित हैं। यहां किसान धान का सैंपल लेकर आ रहे हैं, लेकिन उसमें नमी बताकर सुखाकर लाने के लिए कहा जा रहा है। खरीद केंद्र के प्रभारी अमित कुमार यादव ने बताया कि अभी धान की खरीद नहीं हुई है। कोई भी किसान फसल लेकर नहीं आया, बल्कि नमूना लेकर आए थे। उसमें नमी होने के कारण धान नहीं लिया जा सका। उन्हें बताया गया है कि 17 प्रतिशत से ज्यादा नमी वाला धान नहीं लिया जाएगा।
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कैराना में आर्यपुरी बाईपास पर चल रहे धान खरीद केंद्र पर अब तक केवल 3-4 किसान केवल भाव पूछने के लिए ही पहुंचे हैं। 10-12 दिन में धान लाने के बात कह कर वापस चले गए। मन्ना माजरा निवासी किसान महबूब ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्र पर मोटा धान खरीदा जाता है, जबकि क्षेत्र में अधिकतर किसान बासमती की पैदावार करते हैं। बासमती का भाव ज्यादा है। मोहल्ला आलकला निवासी आरिफ चौधरी का कहना है कि क्षेत्र के किसान मोटा धान कम ही उगाते हैं। इसलिए केंद्रों पर बिक्री करने नहीं जा रहे। कुछ किसान गए हैं, लेकिन अभी धान में नमी ज्यादा बताई जा रही है। उधर, धान क्रय केंद्र प्रभारी सुशील कुमार साहू ने बताया कि तीन दिन में केंद्र पर धान नहीं आया है। यहां बासमती की पैदावार अधिक होने के कारण मोटा धान कम ही आता है। ऊन में भी धान खरीद केंद्र पर कुछ किसान सैंपल लेकर आए, लेकिन उसमें भी नमी बताकर सुखाकर लाने के लिए कहा गया। कांधला में क्षेत्र के किसानों को गंगेरू में ही धान खरीद केंद्र होने का पता है, जबकि धान का खरीद केंद्र कांधला समिति में मनाया गया है। गांव चढाव निवासी किसान सोनू ने बताया कि वह दो दिन से गंगेरू सेंटर पर आ रहे हैं, लेकिन यह बंद है। गांव गंगेरू निवासी महबूब अंसारी का कहना है कि गांव के बस स्टैंड पर सरस हाट पर धान खरीद केंद्र को बनाया जाता था, लेकिन अब तक यहां पर कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। उधर, थानाभवन के धान खरीद केंद्र पर भी किसान धान लेकर नहीं पहुंचे हैं। वहां तैनात कर्मचारियों ने बताया कि कुछ किसान सैंपल लेकर आए थे लेकिन उसमें नमी ज्यादा थी।
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22 प्रतिशत से ज्यादा आ रही नमी
डिप्टी आरएमओ निहारिका सिंह ने बताया कि जनपद में अभी धान की खरीद नहीं हुई है। अभी धान में नमी का स्तर 22 प्रतिशत से ज्यादा आ रहा है। मानक के अनुरूप 17 प्रतिशत से ज्यादा नमी नहीं होनी चाहिए। केंद्र पर आने वाले धान की नमी की जांच की जाती है। नमी का स्तर 17 प्रतिशत से ज्यादा होता है खरीद नहीं होती। उनका कहना है कि कांधला में समिति में धान क्रय केंद्र संचालित है।

थानाभवन में खाली पडा राजकीय धान क्रय केन्द्र- फोटो : SHAMLI