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स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रो में विकसित होंगी पोषण वाटिकाएं

Thu, 17 Sep 2020 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 12:15 AM IST
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Nutrition schools will be developed in schools, Anganwadi centers
शामली में आंगनवाडी केंद्र पर लगाई पोषण वाटिका - फोटो : SHAMLI
स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों में विकसित होंगी पोषण वाटिकाएं
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शामली। जिले के परिषदीय स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका विकसित होंगी। यदि किसी के पास घर, घेर में खाली भूमि है तो वे भी उसमें मौसमी फल, सब्जियां उगाकर पोषण वाटिका के रूप में विकसित कर सकते हैं। इनमें उगाए गए फल एवं सब्जियां स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होंगी।
राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जिले के सभी प्राइमरी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिका विकसित करने की तैयारी है। डीएम जसजीत कौर के निर्देश पर 400 पोषण वाटिकाएं बनाई जाएंगी। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. हरित कुमार ने बताया कि जिले के किसान, आम नागरिक घर, घेर के आंगन, पशुशाला आसपास खाली भूमि को समतल करके रबी सीजन में मटर, टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च, धनिया, मेथी, पालक, चुकंदर, मूली, शलजम, फूलगोभी, पत्ता गोभी, गांठ गोभी, चौलाई, बथुआ एवं आलू आदि उगा सकते हैं। जायद के मौसम में लौकी, तरोई, करेला, खीरा, टिंडा, परवल, भिंडी, बैंगन, टमाटर, मिर्च, खरीफ में भी भिंडी, मिर्च, उड़द तथा मचान बनाकर लौकी, तरोई, करेला, खीरा आदि बेल वाली आदि उगा सकते हैं।
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कैैसे करे पोषण वाटिका को विकसित
जिला उद्यान अधिकारी के मुताबिक भूमि को समतल व साफ कर कंपोस्ट खाद या पुरानी सड़े हुए गोबर की खाद डालकर उसे अच्छी तरह मिट्टी में मिला लें। दीमक व कुरमुला आदि कीटों के लिए विवेरिया वेसियाना तथा फफूंदी जनक रोगों के लिए ट्राइकोडर्मा दवाइयों का प्रयोग करें। यह दवाइयां जैविक हैं। पोषण वाटिका से जहां ताजी व स्वच्छ सब्जियां खाने को मिलेगी, वहीं स्वच्छता व साफ सफाई भी बनी रहती है। वाटिका के चारों ओर नीबू, अनार, अमरूद आदि कम ऊंचाई वाले फलों के पौधे भी लगाए जा सकते हैं। छोटे मोटे कीड़े या बीमारियों का प्रकोप दिखाई दे, तो जैविक दवाइयों, जैविक खादों का ही प्रयोग करें। उपलों की राख, गोमूत्र, नीम का तेल, लहसुन व मिर्च का घोल डाला जा सकता है।
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इन्होंने कहा...
जिला कार्यक्रम अधिकारी संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर 30 सितंबर तक पोषण माह में किचेन गॉर्डन हेतु पौधे लगाए जाने हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों, विद्यालयों, शासकीय भवनों के परिसरों में अधिक से अधिक वाटिकाएं विकसित की जाएंगी।
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