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अब एकल उपयोग प्लास्टिक का विकल्प बायोडिग्रेडेबल
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शामली की फैक्टरी में बनी गन्ने की खोई से डिस्पोजल पलेटे।
- फोटो : SHAMLI
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शामली। केंद्र सरकार ने अगले साल जुलाई से एकल उपयोग प्लास्टिक को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है, लेकिन शामली के व्यापारियों ने इसका विकल्प पूर्व में ही तलाश कर लिया है। यहां बायोडिग्रेडेबल से विभिन्न उत्पाद बनाए जा रहे हैं। जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं। इनका आसानी से निस्तारण हो जाता है।
एकल उपयोग प्लास्टिक का इस्तेमाल अब बंद हो चुका है। केंद्र सरकार ने एकल उपयोग प्लास्टिक और थर्मोकोल से बनी डिस्पोजेबल क्राकरी पर 2019 में ही रोक लगाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया था। जिससे कारोबारियों में बेचैनी बढ़ गई थी। ऐसे में एकल उपयोग प्लास्टिक का विकल्प तलाशा जाने लगा था। ऐसे में बायोडिग्रेडेबल सामने आया। जिसके बाद इससे डिस्पोजेबल क्राकरी बनाई जाने लगी।
बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक दाने से बनते हैं उत्पाद
शामली इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकित गोयल ने बताया कि अब एकल उपयोग प्लास्टिक से डिस्पोजेबल क्राकरी बनाना ज्यादातर व्यापारियों ने बंद कर दिया है। उनके यहां बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक दाने से बनते हैं चम्मच, कांटे और डिब्बे बनते हैं। एक बार इस्तेमाल होने के 48 घंटे बाद यह अपने आप ही निस्तारित हो जाते हैं।
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गन्ने की खोई से बनती हैं प्लेट और कटोरी
उद्यमी सुधीर गर्ग ने करीब दो वर्ष पूर्व गन्ने की खोई से डिस्पोजेबल क्राकरी बनाने का प्लांट लगाया था। प्लांट में प्लास्टिक की प्लेट व कटोरी गन्ने की खोई की लुगदी से बनाई जाती हैं। यह एकल इस्तेमाल प्लास्टिक से थोड़ा महंगा है। लेकिन पर्यावरण के लिए यह सुरक्षित है। इस्तेमाल के बार इधर-उधर फेंक दिए जाने के बाद कुछ दिन में यह अपने आप नष्ट हो जाता हैं।
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एकल उपयोग प्लास्टिक का इस्तेमाल अब बंद हो चुका है। केंद्र सरकार ने एकल उपयोग प्लास्टिक और थर्मोकोल से बनी डिस्पोजेबल क्राकरी पर 2019 में ही रोक लगाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया था। जिससे कारोबारियों में बेचैनी बढ़ गई थी। ऐसे में एकल उपयोग प्लास्टिक का विकल्प तलाशा जाने लगा था। ऐसे में बायोडिग्रेडेबल सामने आया। जिसके बाद इससे डिस्पोजेबल क्राकरी बनाई जाने लगी।
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बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक दाने से बनते हैं उत्पाद
शामली इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकित गोयल ने बताया कि अब एकल उपयोग प्लास्टिक से डिस्पोजेबल क्राकरी बनाना ज्यादातर व्यापारियों ने बंद कर दिया है। उनके यहां बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक दाने से बनते हैं चम्मच, कांटे और डिब्बे बनते हैं। एक बार इस्तेमाल होने के 48 घंटे बाद यह अपने आप ही निस्तारित हो जाते हैं।
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गन्ने की खोई से बनती हैं प्लेट और कटोरी
उद्यमी सुधीर गर्ग ने करीब दो वर्ष पूर्व गन्ने की खोई से डिस्पोजेबल क्राकरी बनाने का प्लांट लगाया था। प्लांट में प्लास्टिक की प्लेट व कटोरी गन्ने की खोई की लुगदी से बनाई जाती हैं। यह एकल इस्तेमाल प्लास्टिक से थोड़ा महंगा है। लेकिन पर्यावरण के लिए यह सुरक्षित है। इस्तेमाल के बार इधर-उधर फेंक दिए जाने के बाद कुछ दिन में यह अपने आप नष्ट हो जाता हैं।