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न कोई जांच और न पड़ताल, कैसे बन गए दस्तावेज

Tue, 30 Jul 2019 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jul 2019 11:54 PM IST
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no inqury no investigation, how the document made
शामली। अक्सर देखने में आता है कि आम नागरिकों को दस्तावेज बनवाने या उनमें संशोधन कराने के लिए कई विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं। मगर म्यांमार के पकड़े गए एक रोहिंग्या और तीन छात्रों ने फर्जी सूचना के आधार पर भी कई महत्वपूर्ण भारतीय दस्तावेज बनवा लिए। इस मामले में कई विभागों की लापरवाही सामने आ रही है। जांच पड़ताल होने पर कई विभागीय अधिकारियों की पर गाज गिरनी संभव है।
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आमतौर पर नागरिकों को कोई भी सरकारी दस्तावेज या प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। मगर म्यांमार के मूल निवासी अब्दुल मजीद जो करीब 18 साल पहले भारत में अवैध रूप से सीमा पार कर घुसा था, उसने भारतीय दस्तावेज आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते, एटीएम कार्ड आदि हासिल कर लिए। इतना नहीं नहीं जलालाबाद में मकान भी खरीद लिया गया। मकान खरीदते समय भी गवाहों की जरूरत पड़ी होगी। बैंक में खाता खुलवाने के लिए गारंटी देने वाले खाताधारक भी रहे होंगे। इसके अलावा टूरिस्ट वीजा पर आए तीनों छात्र भाई नोमान, रिजवान और फुरकान वीजा अवधि समाप्त के बाद वतन लौटने के बजाए उन्होंने अपनी पहचान छिपाई और नाम बदलकर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय नई दिल्ली में शरणार्थी का दर्जा पाने को आवेदन कर लिया। ऐसे में सवाल उठता है कि आसानी से भारतीय दस्तावेज बनाने या बनवाने में विदेशी नागरिक के साथ कोई बड़ा नेटवर्क सोची समझी रणनीति के तहत को देश के अंदर काम तो नहीं कर रहा। इस बिंदू पर भी अधिकारियों का फोकस बना हुआ है।
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