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कई लोगों की जान बचा चुका है एनडीआरएफ
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शामली। नेशनल डिजास्टर रेस्पोंस फोर्स (एनडीआरएफ) की टीम जनपद में कई बार अभियान चला चुकी है। सबसे प्रमुख अभियान 2013 में आई बाढ़ के दौरान चलाया गया था। यमुना में बाढ़ आने से मामौर क्षेत्र में कई लोग फंस गए थे। एनडीआरएफ के जवान इन्हें बचाने के लिए कई दिनों तक डेरा डाले रहे थे। हालांकि बाढ़ में फंसे चार लोगों की मौत भी हो गई थी।
राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल यानी एनडीआरएफ को किसी भी आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य के लिए बुलाया जाता है। जनपद में बीते कुछ वर्षों में तीन बार एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। 2013 में यमुना में भयंकर बाढ़ आई थी। उस समय यमुना में सात लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। अधिक पानी आ जाने से हरियाणा की ओर यमुना पुल का संपर्क मार्ग बह गया था और कैराना क्षेत्र के मामौर में डेरों पर रहने वाले कई लोग बाढ़ के पानी में फंस गए थे। एनडीआरएफ की टीम ने 28 लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया था जबकि चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद 15 सितंबर 2019 में मलकपुर में यमुना में सात युवक बह गए थे। कैराना क्षेत्र के ही गांव मलकपुर के ये युवक जागरण की राख यमुना में प्रवाहित करने के लिए गए थे। इस दौरान सातों यमुना में धार में बह गए। रात में ही एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची थी जिनमें यमुना में बहे अजय को बचा लिया गया था जबकि छह अन्य की मौत हो गई थी। 18 जुलाई 2020 को कैराना यमुना पुल के पास हरियाणा की ओर तीन युवक तेज धार में डूब गए थे। एनडीआरएफ ने इन तीनों की भी तलाश की थी। उस समय एनडीआरएफ की टीम आईटीआई में रुकी हुई थी। काफी तलाश के बाद एनडीआरएफ टीम ने तीनों के शव बरामद किए थे।
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आपदा राहत एवं बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है एनडीआरएफ
शामली। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने की स्थापना 2006 में हुई थी। एनडीआरएफ आपदा प्रतिक्रिया अभियानों में मानव जीवन और राष्ट्रीय संपत्ति को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के साथ समन्वय कर आपदाग्रस्त क्षेत्रों में काम करता है।
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राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल यानी एनडीआरएफ को किसी भी आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य के लिए बुलाया जाता है। जनपद में बीते कुछ वर्षों में तीन बार एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। 2013 में यमुना में भयंकर बाढ़ आई थी। उस समय यमुना में सात लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। अधिक पानी आ जाने से हरियाणा की ओर यमुना पुल का संपर्क मार्ग बह गया था और कैराना क्षेत्र के मामौर में डेरों पर रहने वाले कई लोग बाढ़ के पानी में फंस गए थे। एनडीआरएफ की टीम ने 28 लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया था जबकि चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद 15 सितंबर 2019 में मलकपुर में यमुना में सात युवक बह गए थे। कैराना क्षेत्र के ही गांव मलकपुर के ये युवक जागरण की राख यमुना में प्रवाहित करने के लिए गए थे। इस दौरान सातों यमुना में धार में बह गए। रात में ही एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची थी जिनमें यमुना में बहे अजय को बचा लिया गया था जबकि छह अन्य की मौत हो गई थी। 18 जुलाई 2020 को कैराना यमुना पुल के पास हरियाणा की ओर तीन युवक तेज धार में डूब गए थे। एनडीआरएफ ने इन तीनों की भी तलाश की थी। उस समय एनडीआरएफ की टीम आईटीआई में रुकी हुई थी। काफी तलाश के बाद एनडीआरएफ टीम ने तीनों के शव बरामद किए थे।
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आपदा राहत एवं बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है एनडीआरएफ
शामली। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने की स्थापना 2006 में हुई थी। एनडीआरएफ आपदा प्रतिक्रिया अभियानों में मानव जीवन और राष्ट्रीय संपत्ति को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के साथ समन्वय कर आपदाग्रस्त क्षेत्रों में काम करता है।
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