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न्यायप्रिय अंग्रेज अफसर की याद दिलाती है मंडी मार्शगंज

Fri, 24 Jul 2020 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2020 12:12 AM IST
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Mandi Marshganj reminds me of a fair English officer
गिरिराज सिंह
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शामली। शहर की मंडी मार्श गंज जिले के कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसका नाम मार्श गंज क्यों रखा गया, इससे शायद ही कोई वाकिफ हो। यह मंडी 1917 में जिले में तैनात रहे अंग्रेज कलक्टर पीडब्ल्यू मार्श की याद दिलाती है, जो अपनी न्याय प्रियता के लिए प्रसिद्ध थे। उनके यहां तैनात रहते ही मंडी का नाम मार्श गंज रखा गया था।
कभी शामली शहर मंडी मार्श गंज के आसपास ही सिमटा हुआ था और मुजफ्फरनगर जिले का हिस्सा था। मंडी के व्यापारी अनुज बंसल बताते हैं कि मंडी मार्श गंज को भालेराम मंडी के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन दस्तावेजों में इसका नाम मार्शगंज ही है। किसी अंग्रेज अफसर के नाम पर मंडी का नाम मार्श गंज रखा गया। मंडी की स्थापना कब हुई इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। नगरपालिका के ईओ सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि शामली नगरपालिका 1951 में बनी। मंडी मार्श गंज इससे पहले की स्थापित है। पालिका के पास मंडी की स्थापना से संबंधित कोई रिकार्ड नहीं है। वह इस बात से इंकार नहीं करते कि अंग्रेज अधिकारी के नाम पर मंडी का नाम रखा गया होगा।
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स्वामी कल्याणदेव के शिक्षा कार्यों से प्रभावित थे मार्श
शामली। अंग्रेज कलक्टर पीडब्ल्यू मार्श से संबंधित दस्तावेज मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में उपलब्ध हैं। वह शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याणदेव के शिक्षा के प्रति समर्पण को लेकर काफी प्रभावित थे। जिले में कलक्टर के बाद वह मेरठ मंडल के कमिश्नर भी रहे। जन समस्याओं के निस्तारण में स्वामी जी का सहयोग लेते थे। दस नवंबर 1940 और 18 जुलाई 1941 को पीडब्ल्यू मार्श द्वारा स्वामी जी को लिखे दो पत्र आज भी शुकतीर्थ में मौजूद हैं। मार्श ने सूखे और विभिन्न समस्याओं पर स्वामी जी द्वारा लिखे गए पत्रों का जवाब दिया था।
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न्याय की अनोखी शैली थी मार्श की
हापुड़ के पिलखुवा निवासी साहित्यकार शिवकुमार गोयल के लिखे लेख भी शुकतीर्थ में मौजूद हैं। उन्होंने अपने लेख में पीडब्ल्यू मार्श का जिक्र किया है। लिखा है कि 1930 में मेरठ में एक अंग्रेज कमिश्नर थे पीडब्ल्यू मार्श। भगवान श्रीराम पर उनकी अनन्य श्रद्धा थी। एक दिन अदालत में पटवारी के खिलाफ मुकदमा आया जिसने जमीन किसी दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज कर दी थी। पटवारी जानता था कि साहब श्रीराम के भक्त हैं। इसलिए उसने रामायण की एक चौपाई सुनाते हुए अपनी सफाई पेश की लेकिन मार्श ने भी रामायण की चौपाई सुनाते हुए उसका जवाब दिया। पटवारी दंड से नहीं बच पाया। एक अन्य मामले में मार्श बाग मालकिन को उसका हक दिलाने के लिए खुद मौके पर चले गए थे और गांव वालों की मौजूदगी में न्याय किया था।
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