हिंदी और अंग्रेजी की पढ़ाई कर रहे मदरसा छात्र
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पानीपत खटीमा राजमार्ग पर मदरसा इस्लामिया अरबिया अहसनुल उलूम 50 वर्षों से भी अधिक पुराना मदरसा है। मदरसे के संचालक मौलाना मुनव्वर ने बताया कि यह मदरसा मुसलिम गुर्जर समाज के दो कुनबों चानगा और गंधी के बुजुर्गों ने बनवाया था। उन्हीं दोनों कुनबों के नाम पर मदरसे में चानगा गंधी पब्लिक स्कूल चलाया जा रहा है। मदरसे में 450 छात्रों में से 250 छात्र-छात्राएं मदरसे में कक्षा एक से कक्षा 5 तक की पढ़ाई कर रहे है। बाकी 200 छात्र पूर्व में सिर्फ दीनी तालीम लेते थे लेकिन अब उनको दीनी तालीम के साथ ही
हिंदी और अंग्रेजी पाठ्यक्रम की पुस्तकें भी पढ़ाना शुरू कर दिया है।
चानगा गंधी पब्लिक स्कूल के प्रधानाध्यापक मोहम्मद गयूर ने बताया कि मदरसे के छात्रों से कोई फीस नहीं ली जाती है। साथ ही छात्रों को विज्ञान के पथ, इंग्लिश रीडर, हिंदी बंसत और गणित गोल्ड की किताबें पढ़ाई जा रही है। इतिहास और भूगोल कक्षा पांच के बाद पढ़ाया जाएगा। उनके मदरसे के छात्र कक्षा पांच उत्तीर्ण करने के बाद क्षेत्र के किसी भी प्राइवेट या सरकारी स्कूल में कक्षा छह में दाखिला ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पहले शासन से प्रति छात्र 300 रुपये वजीफा मिलता था। लेकिन योगी सरकार की 1000 रुपये वजीफे की घोषणा से मुसलिम बच्चों में आधुनिक शिक्षा लेने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इस कारण मदरसों में आधुनिक शिक्षा लेने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा होने की संभावना बन गई है।