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लाइलाज बीमारी नहीं है अस्थमा
Mon, 06 May 2019 11:40 PM IST
NAVEEN GUPTA
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Mon, 06 May 2019 11:40 PM IST
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file photo
- फोटो : amarujala
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जिले में मंगलवार को मनाए जाने वाले विश्व अस्थमा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वेदभानू मलिक ने कहा कि अस्थमा या सांस रोग लाइलाज बीमारी नहीं है। ऐसे मरीजों को नियमित उपचार की आवश्यकता है।
सोमवार को शहर के बुढ़ाना रोड स्थित अपने आवास पर आयोजित कार्यक्रम में बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वेदभानू मलिक ने कहा कि जिले में हर वर्ग के भारी संख्या में बूढ़े बच्चे और युवा अस्थमा रोग से पीड़ित हैं। उनके यहां अस्थमा रोग के प्रतिदिन दस से लेकर पंद्रह तक मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। अस्थमा या दमा सांस फूलने से की बीमारी है। जिसमें मरीज की श्वांस नली में सिकुड़न और सूजन से आ जाती है। जिसमें मरीज को सांस लेने में दिक्कत आती है। इस बीमारी के बारे में बहुत सी भ्रांतियां समाज में फैली हैं। ग्लोबल इनिशियटिव फार अस्थमा वैश्विक इकाई है, जो इस सभी भ्रांतियों को दूर करने के लिए प्रत्येक साल सात मई को एक कार्यक्रम आयोजन करती है। जिसमें मरीजों में फैली भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया जाता है। प्रमुख दवा कंपनी फ्री कंप्यूटाराईज्ड लंग फक्शन टेस्ट करते हैं। दमा व अस्थमा रोग को लोग सामान्य समझते है। यह रोग केवल किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। चाहे इसमें बच्चे को क्यों न हो। इस मौके पर डॉक्टर पंकज गर्ग ने बताया कि अस्थमा कप्यूंटाराइज लग फक्शन टेस्ट से बीमारी की स्थिति का सही अंदाजा लगाया जा सकता है।
रोग के लक्षण
यदि बार-बार खांसी का होना, पसली का चलना, सांस का बार बार फूलना।
छाती से घर-घराहट, सिटी सी आवाज का आना, सर्दी में होने वाली खांसी।
धूल मिट्टी, फूलों की सुगंध, अन्य चीजों से एलर्जी होना, सीने में जकड़न का होना।
रात को सोते समय खासी का आना, सीढ़ियां पर उतरने चढ़ने पर सांस का फूलना।
काम करते समय जल्दी थक जाना, मौसम बदलने से बार बार खांसी होना।
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सोमवार को शहर के बुढ़ाना रोड स्थित अपने आवास पर आयोजित कार्यक्रम में बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वेदभानू मलिक ने कहा कि जिले में हर वर्ग के भारी संख्या में बूढ़े बच्चे और युवा अस्थमा रोग से पीड़ित हैं। उनके यहां अस्थमा रोग के प्रतिदिन दस से लेकर पंद्रह तक मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। अस्थमा या दमा सांस फूलने से की बीमारी है। जिसमें मरीज की श्वांस नली में सिकुड़न और सूजन से आ जाती है। जिसमें मरीज को सांस लेने में दिक्कत आती है। इस बीमारी के बारे में बहुत सी भ्रांतियां समाज में फैली हैं। ग्लोबल इनिशियटिव फार अस्थमा वैश्विक इकाई है, जो इस सभी भ्रांतियों को दूर करने के लिए प्रत्येक साल सात मई को एक कार्यक्रम आयोजन करती है। जिसमें मरीजों में फैली भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया जाता है। प्रमुख दवा कंपनी फ्री कंप्यूटाराईज्ड लंग फक्शन टेस्ट करते हैं। दमा व अस्थमा रोग को लोग सामान्य समझते है। यह रोग केवल किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। चाहे इसमें बच्चे को क्यों न हो। इस मौके पर डॉक्टर पंकज गर्ग ने बताया कि अस्थमा कप्यूंटाराइज लग फक्शन टेस्ट से बीमारी की स्थिति का सही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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रोग के लक्षण
यदि बार-बार खांसी का होना, पसली का चलना, सांस का बार बार फूलना।
छाती से घर-घराहट, सिटी सी आवाज का आना, सर्दी में होने वाली खांसी।
धूल मिट्टी, फूलों की सुगंध, अन्य चीजों से एलर्जी होना, सीने में जकड़न का होना।
रात को सोते समय खासी का आना, सीढ़ियां पर उतरने चढ़ने पर सांस का फूलना।
काम करते समय जल्दी थक जाना, मौसम बदलने से बार बार खांसी होना।