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खेड़ीकरमू आंदोलन : आज भी घटना को याद कर सिहर उठते हैं किसान

Sun, 01 Mar 2026 12:30 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sun, 01 Mar 2026 12:30 AM IST
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Khedikaramu movement: Even today, farmers shudder at the memory of the incident.
शामली क्षेत्र  के गांव लिसाढ़  निवासी ​ ​​ऋ​षिपाल
शामली। एक मार्च 1987 खेड़ीकरमू आंदोलन में किसानों की शहादत आज भी किसानों के जेहन में ताजा है। आंदोलन के दौरान दो किसानों और एक पीएसी जवान की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। आज इस घटना को 39 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन किसानों के परिजनों को अपनों के खोने का दर्द आज भी है।
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वर्ष 1987 में बिजली दरों में बढ़ोतरी और विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों के विरोध में किसानों ने करमूखेड़ी बिजलीघर पर आंदोलन का ऐलान किया था। आंदोलन की रणनीति सिसौली में तैयार हुई और कमान भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को सौंपी गई। उनके नेतृत्व में किसानों का काफिला शामली स्थित करमूखेड़ी बिजलीघर की ओर कूच कर गया।
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प्रशासन ने किसानों को रोकने के लिए जगह-जगह बैरियर लगाए थे। एक मार्च 1987 को पुलिस और किसानों के बीच टकराव हुआ जिसमें लिसाढ़ निवासी जयपाल सिंह मलिक और सिंभालका निवासी अकबर अली की गोली लगने से मौत हो गई। इस हंगामे में एक पीएसी जवान की भी जान चली गई थी। दो दिन बाद गृहमंत्री के आश्वासन पर धरना समाप्त किया गया था।
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किसान संगठन आज भी जयपाल सिंह मलिक और अकबर अली को शहीद मानते हुए सिंभालका की मजार और लिसाढ़ गांव के शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हैं। संवाद
13 दिसंबर को की थी आवाज बुलंद
भाकियू ने 13 दिसंबर 1986 को पहली बार करमूखेड़ी बिजलीघर पर किसानों की आवाज बुलंद की थी। पिछले 39 वर्षों में संगठन किसानों की आवाज बनकर उभरा है और देश के बड़े किसान संगठनों में शामिल हो चुका है। रविवार को करमूखेड़ी बिजलीघर आंदोलन में मारे गए किसानों का बलिदान दिवस मनाया जाएगा।

भाई की शहादत पर गर्व है — ऋषिपाल
लिसाढ़ निवासी जयपाल सिंह मलिक के भाई ऋषिपाल सिंह बताते हैं कि उस समय जयपाल कक्षा दस के छात्र थे। एक मार्च 1987 को वह गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन मलिक, सीताराम मलिक, धर्मपाल मलिक, सुल्तान सिंह फुगाना और बड़े भाई ब्रह्मपाल मलिक के साथ आंदोलन में शामिल हुए थे।
काबड़ौत नदी और बुढ़ाना रोड रेलवे फाटक पर लगाए गए बैरियर तोड़ते हुए जब किसान आगे बढ़े तो पुलिस और पीएसी से टकराव हो गया था। इसी दौरान जयपाल सिंह और अकबर अली की मौत हो गई थी। आज भी उस दिन को याद कर आंखें नम हो जाती हैं।

अकबर अली के परिजन अब बागपत-लोनी में बसे
सिंभालका निवासी अकबर अली के रिश्तेदार हासिम बताते हैं कि एक मार्च 1987 की घटना को याद कर आज भी गांव के लोग सिहर उठते हैं। अकबर अली का परिवार अब बागपत और लोनी में बस गया है, लेकिन गांव में बनी मजार पर हर वर्ष फूल चढ़ाकर उन्हें याद किया जाता है।


खापों ने दिया था आंदोलन को समर्थन
भाकियू को मजबूत करने के उद्देश्य से देशखाप, गठवाला खाप, बत्तीसा खाप सहित कई खापों ने आंदोलन का समर्थन किया था। देशखाप के चौधरी सुखवीर सिंह, छपरौली के कैप्टन भोपाल सिंह, चौगामा खाप के चौधरी मांगेराम पंवार और गठवाला खाप के चौधरी हरिकिशन मलिक समेत अन्य नेताओं ने करमूखेड़ी बिजलीघर पर धरने का एलान किया था।

शामली क्षेत्र  के गांव लिसाढ़  निवासी  ऋषिपाल

शामली क्षेत्र  के गांव लिसाढ़  निवासी ऋषिपाल

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