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पालिका के लेखा विभाग में गंभीर अनियमितता
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पालिका के लेखा विभाग में अनियमितता
शामली। नगर पालिका शामली के लेखा विभाग में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। पालिका की कैश बुक और बैंक अकाउंट में चार करोड़ रुपये का अंतर मिला है। इससे लेखा विभाग के रिकार्ड में बड़ा हेर फेर होने की आशंका है। पालिका चेयरपर्सन ने डीएम से जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
चेयरपर्सन अंजना बंसल ने डीएम जसजीत कौर को भेजे पत्र में लेखा विभाग की कैश बुक व बैंक खाते के बैलेंस में करीब चार करोड़ का अंतर बताया है। चेयरपर्सन के मुताबिक कैश बुक में व्यय पक्ष में सस्पेंस अकाउंट के नाम से 114001 रुपये के एंट्री डाली गई है। इस बारे में पूर्व मेें डीएम को अवगत कराया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऑडिटर द्वारा दी गई रिपोर्ट में 31 मार्च 2019 को 15639665 रुपये का अंतर बैंक व कैश बुक में होना बताते हुए गंभीर अनियमितता होने की टिप्पणी की गई है। करीब दो साल बाद भी इस प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अब यह अंतर बढ़कर चार करोड़ हो गया है। चेयरपर्सन ने लेखा विभाग की गंभीर लापरवाही बताते हुए डीएम से जिम्मेदार के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की और साथ ही यह मार्गदर्शन मांगा है कि क्या उनके स्तर से इस प्रकरण में कोई सीए नियुक्त करना चाहिए और क्या इस संबंध में उन्हें एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।
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इन्होंने कहा-
पालिका की कैश बुक और बैंक अकाउंट में चार करोड़ रुपये का अंतर सामने आया है। लेखा विभाग में कुछ एंट्री अपडेट न होने की वजह से बैंक खाते में अधिक हो रहे हैं। दो साल से अधिक समय से अकाउंटेंट न होने के कारण उनके स्थान पर लिपिक कार्य कर रहा है। इसमें कोई वित्तीय अनियमितता नहीं है। यह लिपिकीय त्रुटि हुई है। रिकार्ड की जांच के लिए सीए लगाया गया है। इसमें कुछ त्रुटि पकड़ में आ गई हैं।
- सुरेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका।
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शामली। नगर पालिका शामली के लेखा विभाग में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। पालिका की कैश बुक और बैंक अकाउंट में चार करोड़ रुपये का अंतर मिला है। इससे लेखा विभाग के रिकार्ड में बड़ा हेर फेर होने की आशंका है। पालिका चेयरपर्सन ने डीएम से जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
चेयरपर्सन अंजना बंसल ने डीएम जसजीत कौर को भेजे पत्र में लेखा विभाग की कैश बुक व बैंक खाते के बैलेंस में करीब चार करोड़ का अंतर बताया है। चेयरपर्सन के मुताबिक कैश बुक में व्यय पक्ष में सस्पेंस अकाउंट के नाम से 114001 रुपये के एंट्री डाली गई है। इस बारे में पूर्व मेें डीएम को अवगत कराया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऑडिटर द्वारा दी गई रिपोर्ट में 31 मार्च 2019 को 15639665 रुपये का अंतर बैंक व कैश बुक में होना बताते हुए गंभीर अनियमितता होने की टिप्पणी की गई है। करीब दो साल बाद भी इस प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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अब यह अंतर बढ़कर चार करोड़ हो गया है। चेयरपर्सन ने लेखा विभाग की गंभीर लापरवाही बताते हुए डीएम से जिम्मेदार के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की और साथ ही यह मार्गदर्शन मांगा है कि क्या उनके स्तर से इस प्रकरण में कोई सीए नियुक्त करना चाहिए और क्या इस संबंध में उन्हें एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।
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इन्होंने कहा-
पालिका की कैश बुक और बैंक अकाउंट में चार करोड़ रुपये का अंतर सामने आया है। लेखा विभाग में कुछ एंट्री अपडेट न होने की वजह से बैंक खाते में अधिक हो रहे हैं। दो साल से अधिक समय से अकाउंटेंट न होने के कारण उनके स्थान पर लिपिक कार्य कर रहा है। इसमें कोई वित्तीय अनियमितता नहीं है। यह लिपिकीय त्रुटि हुई है। रिकार्ड की जांच के लिए सीए लगाया गया है। इसमें कुछ त्रुटि पकड़ में आ गई हैं।
- सुरेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका।