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हुकुम सिंह की आन-बान-शान को कायम रखेंगे
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली
Updated Mon, 05 Feb 2018 11:56 PM IST
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Hukum Singh Panchtatta merged
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सांसद हुकुम सिंह उत्कृष्ट कोटि के सांसद थे। हमेशा उनका चिंतन किसान और जरूरतमंदों को लेकर होता था। अपने कार्य में कुशल, मधुर व्यवहार और उनकी शानदार कार्यशैली का हर कोई मुरीद था। हुकुम सिंह की आन, बान और शान को कायम रखेंगे।
सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कैराना मेें मायापुर फार्म हाउस पर पहुंचकर दिवंगत सांसद हुकुम सिंह के चित्र के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद काफी देर लोगों के बीच बैठे रहे। फिर परिवार के सदस्यों से कमरे में वार्ता कर धीरज बंधाया और दुख की घड़ी में साहस से कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद, केंद्रीय गृहमंत्री ने पत्रकारों और अन्य लोगों के बीच पहुंचकर सांसद हुकुम सिंह की कार्यशैली के संबंध में चर्चा की। राजनाथ सिंह ने कहा कि बाबू हुकुम सिंह के बारे में ज्यादा कुछ किसी को बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनकी कार्यशैली से हर व्यक्ति वाकिफ है।
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हुकुम सिंह यूपी सरकार में रहे या संसद में रहे, उनके व्यवहार और कार्यशैली का हर व्यक्ति मुरीद था। संसद और विधानसभा में वह जिस भी विषय पर बोलते थे, उसकी सर्वत्र चर्चा होती थी। वास्तव में हुकुम सिंह उत्कृष्ट कोटि के सांसद थे। चर्चा चाहे कोई भी चलती हो, मगर हुकुम सिंह का केंद्र बिंदु गांव, गरीब और किसान ही रहते थे। क्योंकि उन्हें गांव, गरीब और किसानों की हमेशा चिंता रहती थी।
सामाजिक न्याय समिति के मसौदे को तैयार करने वाले संस्मरण को याद करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि जब मैं यूपी का सीएम था, तो हुकुम सिंह ऊर्जा मंत्री थे। बहुत महत्वपूर्ण आरक्षण से संबंधी कार्य को पूर्ण कराने के लिए मैं उपयुक्त व्यक्ति को तलाश रहा था, जिसे उस कार्य समिति का चेयरमैन बनाना था और शीघ्रता से कार्य पूर्ण कराना था। उस जिम्मेदारी को निभाने के लिए हुकुम सिंह ही सबसे उपयुक्त व्यक्ति थे और उन्हें वह जिम्मेदारी देते हुए मैंने कहा था कि यह काम बड़ा है, लंबा समय लग सकता है, लेकिन इसे जल्दी ही कराना है।
उस कार्य को हुकुम सिंह ने महज तीन महीने में पूरा कर दिया था, आज वह कार्य पूरे देश के लिए नजीर बन गया है। कैराना की पहचान बाबू हुकुम सिंह से होती थी। उनकी आन,बान, शान को कायम रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। क्योंकि उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यशैली से जो पहचान दी, वह अविस्मरणीय है। इस दौरान प्रदेश के गन्ना विकास राज्यमंत्री सुरेश राणा, भाजपा किसान प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजयपाल सिंह, शामली विधायक तेजेंद्र निर्वाल, लोनी विधायक नंदकिशोर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय मलिक और ठाकुर जगत सिंह भी मौजूद रहे।
संसद में भी दी गई श्रद्धांजलि
सांसद हुकुम सिंह को संसद में भी सोमवार को श्रद्धांजलि दी गई। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि जब संसद में हुकुम सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की जाने वाली थी, तो वह प्रधानमंत्री के साथ ही संसद पहुंचे। कई सांसद कह रहे थे कि कुछ अजीबोगरीब लग रहा है, ठीक सा नहीं लग रहा है। सांसदों को हुकुम सिंह के जाने का गम रहा, क्योंकि सभी सांसदों के बीच हुकुम सिंह का मधुर व्यवहार था। उनकी शैली ऐसी थी कि सामने वाले का आक्रोश भी ठंडा हो जाता था।
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सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कैराना मेें मायापुर फार्म हाउस पर पहुंचकर दिवंगत सांसद हुकुम सिंह के चित्र के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद काफी देर लोगों के बीच बैठे रहे। फिर परिवार के सदस्यों से कमरे में वार्ता कर धीरज बंधाया और दुख की घड़ी में साहस से कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
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इसके बाद, केंद्रीय गृहमंत्री ने पत्रकारों और अन्य लोगों के बीच पहुंचकर सांसद हुकुम सिंह की कार्यशैली के संबंध में चर्चा की। राजनाथ सिंह ने कहा कि बाबू हुकुम सिंह के बारे में ज्यादा कुछ किसी को बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनकी कार्यशैली से हर व्यक्ति वाकिफ है।
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हुकुम सिंह यूपी सरकार में रहे या संसद में रहे, उनके व्यवहार और कार्यशैली का हर व्यक्ति मुरीद था। संसद और विधानसभा में वह जिस भी विषय पर बोलते थे, उसकी सर्वत्र चर्चा होती थी। वास्तव में हुकुम सिंह उत्कृष्ट कोटि के सांसद थे। चर्चा चाहे कोई भी चलती हो, मगर हुकुम सिंह का केंद्र बिंदु गांव, गरीब और किसान ही रहते थे। क्योंकि उन्हें गांव, गरीब और किसानों की हमेशा चिंता रहती थी।
सामाजिक न्याय समिति के मसौदे को तैयार करने वाले संस्मरण को याद करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि जब मैं यूपी का सीएम था, तो हुकुम सिंह ऊर्जा मंत्री थे। बहुत महत्वपूर्ण आरक्षण से संबंधी कार्य को पूर्ण कराने के लिए मैं उपयुक्त व्यक्ति को तलाश रहा था, जिसे उस कार्य समिति का चेयरमैन बनाना था और शीघ्रता से कार्य पूर्ण कराना था। उस जिम्मेदारी को निभाने के लिए हुकुम सिंह ही सबसे उपयुक्त व्यक्ति थे और उन्हें वह जिम्मेदारी देते हुए मैंने कहा था कि यह काम बड़ा है, लंबा समय लग सकता है, लेकिन इसे जल्दी ही कराना है।
उस कार्य को हुकुम सिंह ने महज तीन महीने में पूरा कर दिया था, आज वह कार्य पूरे देश के लिए नजीर बन गया है। कैराना की पहचान बाबू हुकुम सिंह से होती थी। उनकी आन,बान, शान को कायम रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। क्योंकि उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यशैली से जो पहचान दी, वह अविस्मरणीय है। इस दौरान प्रदेश के गन्ना विकास राज्यमंत्री सुरेश राणा, भाजपा किसान प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजयपाल सिंह, शामली विधायक तेजेंद्र निर्वाल, लोनी विधायक नंदकिशोर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय मलिक और ठाकुर जगत सिंह भी मौजूद रहे।
संसद में भी दी गई श्रद्धांजलि
सांसद हुकुम सिंह को संसद में भी सोमवार को श्रद्धांजलि दी गई। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि जब संसद में हुकुम सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की जाने वाली थी, तो वह प्रधानमंत्री के साथ ही संसद पहुंचे। कई सांसद कह रहे थे कि कुछ अजीबोगरीब लग रहा है, ठीक सा नहीं लग रहा है। सांसदों को हुकुम सिंह के जाने का गम रहा, क्योंकि सभी सांसदों के बीच हुकुम सिंह का मधुर व्यवहार था। उनकी शैली ऐसी थी कि सामने वाले का आक्रोश भी ठंडा हो जाता था।