{"_id":"5f63b0d18ebc3e2cc51b5484","slug":"grow-organic-crops-if-you-want-adequate-nutrition-shamli-news-mrt501841736","type":"story","status":"publish","title_hn":"भरपूर पोषण यदि चाहें तो जैविक फसल उगाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भरपूर पोषण यदि चाहें तो जैविक फसल उगाएं
विज्ञापन
भरपूर पोषण यदि चाहें तो जैविक फसल उगाएं
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन की रिपोर्ट है कि फल, सब्जी, दाल एवं अन्य अनाजों में पहले जैसी अब ताकत नहीं रही। उनमें 20 साल पहले जैसे पोषक तत्व नहीं हैं। शामली जनपद में भी हालात ऐसे ही हैं। खेती में रसायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के अनियंत्रित प्रयोग से मिट्टी में जीवांश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो रही है। इससे फसलों में भी पर्याप्त पोषण नहीं पहुंच पाता। पुरानी स्थिति को वापस पाने के लिए कृषि विशेषज्ञ जैविक खेती पर जोर दे रहे हैं...
शामली। जिले में मृदा के नमूनों की जांच से साफ होता है कि यहां की मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की काफी कमी है। जिंक, पोटाश, फास्फोरस जैसे सूक्ष्म तत्वों के अलावा मिट्टी में जीवांश की मात्रा एक प्रतिशत होने चाहिए लेकिन जनपद यहां की मिट्टी में जीवांश कार्बन 0.3 से 0.5 प्रतिशत ही है। उप निदेशक कृषि शिवकुमार केसरी बताते हैं कि रसायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अनियंत्रित प्रयोग से यह स्थिति बनती है। इससे मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व कम हो जाते हैं। लाभदायक बैक्टीरिया भी मर जाते हैं। ऐसी भूमि में होने वाली फसल में भी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। उन्होंने बताया कि जिले में लगभग एक लाख सात हजार 770 मृदा स्वास्थ्य कार्ड बने हैं। इनमें मृदा की रिपोर्ट के साथ ही उसमें क्या डालना है, यह जानकारी दी गई है। जिले में ढाई हेक्टेयर भूमि पर एक मृदा कार्ड बनाया गया है। एक कार्ड में कई किसानों की भूमि शामिल हो सकती है।
हरी खाद का प्रयोग करें और फसल चक्र अपनाएं
उप निदेशक कृषि शिवकुमार केसरी का कहना है कि भूमि में जीवांश की मात्रा बढ़ाने के लिए ढैंचे की फसल उगाकर उसे खेत में ही जोत दें। फसल चक्र अपनाना बेहद जरूरी है। जनपद में 80 प्रतिशत कृषि भूमि पर गन्ना उगाया जाता है। किसान फसल चक्र नहीं अपनाते। इससे भूमि में पोषक तत्वों की कमी हो रही है। वह बताते हैं कि इसकी पूर्ति के लिए हमें जैविक खेती को बढ़ावा देना होगा।
विज्ञापन
स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित आहार जरूरी
पोषण का मुख्य आधार सब्जी, फल और दालों में पोषक तत्वों की कमी चिंता का विषय है। जनरल फिजिशियन डा. रीतिनाथ शुक्ला बताते हैं कि पोषक तत्वों की कमी हमारे शरीर में कई बीमारियों का कारण बन सकती है। सबसे ज्यादा समस्या आयरन और फॉलिक एसिड की है। इसकी कमी से खून की कमी हो जाती है। विटामिन-सी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यह खट्टे फलों से मिलता है। विटामिन-डी हड्डियों के लिए जरूरी है। महिलाओं में कई बीमारियां इसकी कमी से होती हैं। विटामिन ई की कमी से प्रजनन क्षमता में कमी, त्वचा रोग हो सकते हैं। वह बताते हैं कि हमारा भोजन पोषण से भरपूर होना चाहिए। उसमें अंकुरित बीज, खट्टे एवं मौसमी फसलों के साथ केला, दूध, दही, पीले फल, अनाज, दालें, हरी सब्जियां आदि शामिल होनी चाहिए। जैविक विधि से उगाए गए फसल, सब्जियों एवं अनाज को ही सबसे अच्छा माना जाता है।
विज्ञापन
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन की रिपोर्ट है कि फल, सब्जी, दाल एवं अन्य अनाजों में पहले जैसी अब ताकत नहीं रही। उनमें 20 साल पहले जैसे पोषक तत्व नहीं हैं। शामली जनपद में भी हालात ऐसे ही हैं। खेती में रसायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के अनियंत्रित प्रयोग से मिट्टी में जीवांश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो रही है। इससे फसलों में भी पर्याप्त पोषण नहीं पहुंच पाता। पुरानी स्थिति को वापस पाने के लिए कृषि विशेषज्ञ जैविक खेती पर जोर दे रहे हैं...
शामली। जिले में मृदा के नमूनों की जांच से साफ होता है कि यहां की मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की काफी कमी है। जिंक, पोटाश, फास्फोरस जैसे सूक्ष्म तत्वों के अलावा मिट्टी में जीवांश की मात्रा एक प्रतिशत होने चाहिए लेकिन जनपद यहां की मिट्टी में जीवांश कार्बन 0.3 से 0.5 प्रतिशत ही है। उप निदेशक कृषि शिवकुमार केसरी बताते हैं कि रसायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अनियंत्रित प्रयोग से यह स्थिति बनती है। इससे मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व कम हो जाते हैं। लाभदायक बैक्टीरिया भी मर जाते हैं। ऐसी भूमि में होने वाली फसल में भी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। उन्होंने बताया कि जिले में लगभग एक लाख सात हजार 770 मृदा स्वास्थ्य कार्ड बने हैं। इनमें मृदा की रिपोर्ट के साथ ही उसमें क्या डालना है, यह जानकारी दी गई है। जिले में ढाई हेक्टेयर भूमि पर एक मृदा कार्ड बनाया गया है। एक कार्ड में कई किसानों की भूमि शामिल हो सकती है।
विज्ञापन
हरी खाद का प्रयोग करें और फसल चक्र अपनाएं
उप निदेशक कृषि शिवकुमार केसरी का कहना है कि भूमि में जीवांश की मात्रा बढ़ाने के लिए ढैंचे की फसल उगाकर उसे खेत में ही जोत दें। फसल चक्र अपनाना बेहद जरूरी है। जनपद में 80 प्रतिशत कृषि भूमि पर गन्ना उगाया जाता है। किसान फसल चक्र नहीं अपनाते। इससे भूमि में पोषक तत्वों की कमी हो रही है। वह बताते हैं कि इसकी पूर्ति के लिए हमें जैविक खेती को बढ़ावा देना होगा।
विज्ञापन
स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित आहार जरूरी
पोषण का मुख्य आधार सब्जी, फल और दालों में पोषक तत्वों की कमी चिंता का विषय है। जनरल फिजिशियन डा. रीतिनाथ शुक्ला बताते हैं कि पोषक तत्वों की कमी हमारे शरीर में कई बीमारियों का कारण बन सकती है। सबसे ज्यादा समस्या आयरन और फॉलिक एसिड की है। इसकी कमी से खून की कमी हो जाती है। विटामिन-सी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यह खट्टे फलों से मिलता है। विटामिन-डी हड्डियों के लिए जरूरी है। महिलाओं में कई बीमारियां इसकी कमी से होती हैं। विटामिन ई की कमी से प्रजनन क्षमता में कमी, त्वचा रोग हो सकते हैं। वह बताते हैं कि हमारा भोजन पोषण से भरपूर होना चाहिए। उसमें अंकुरित बीज, खट्टे एवं मौसमी फसलों के साथ केला, दूध, दही, पीले फल, अनाज, दालें, हरी सब्जियां आदि शामिल होनी चाहिए। जैविक विधि से उगाए गए फसल, सब्जियों एवं अनाज को ही सबसे अच्छा माना जाता है।