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सरकार ने सही समय पर सही कदम उठाया: हिमांशु

Tue, 08 Mar 2022 12:08 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 12:08 AM IST
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Government took right step at right time: Himanshu
कैराना के ऊंचागांव निवासी हिमांशु करनाल में अपने परिवार के साथ - फोटो : SHAMLI
कैराना। यूक्रेन से 6 दिन के लंबे सफर के बाद अपने वतन वापस लौटे छात्र हिमांशु ने कहा कि केंद्र सरकार ने सही समय पर सही कदम उठाया है। सरकार को यूक्रेन के अंदर फंसे अन्य छात्रों को निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए। यूक्रेनियन फंसे हुए छात्रों से हंगरी बॉर्डर तक लाने के लिए 50 हजार रुपये प्रति छात्र के हिसाब से मांग रहे हैं। वहीं छात्र हिमांशु के वापस घर लौटने पर परिवार ने राहत की सांस ली।
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कैराना क्षेत्र के ऊंचागांव निवासी किसान रविंद्र चौहान का बेटा हिमांशु चौहान यूक्रेन के पोल्टावा मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। 12 दिन पहले रूस यूक्रेन के बीच भयंकर युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय छात्र भारत के लिए अन्य देशों की सीमाओं से होकर भारत आने शुरू हो गए थे। सोमवार की अलसुबह 6 दिन के लंबे सफर के बाद छात्र हिमांशु चौहान फ्लाइट के जरिए दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर पहुंचा। जिसके बाद छात्र का भाई रजत चौहान दिल्ली एयरपोर्ट से उसे अपने हाल निवास हरियाणा के करनाल लेकर पहुंचा। हिमांशु ने बताया कि एक बस में उसके हॉस्टल के 56 छात्र मौजूद थे। उनके द्वारा कड़ी परेशानियों के बीच हंगरी तक 1100-1200 किलोमीटर का सफर बस से तय किया। इस दौरान सभी जगह बस के आगे लगे भारतीय झंडे को देखकर सभी ने उन्हें जाने दिया। छात्र ने बताया कि यूक्रेनियन के लोगों का उन्हें ज्यादा सहयोग नहीं मिल सका। हंगरी बॉर्डर क्रॉस करने के बाद भारतीय एंबेसी ने उनका सहयोग किया। खाने-पीने व रहने की व्यवस्था की। वें हंगरी के अंदर बुडापोस्ट में हॉस्टल के अंदर पहुंचे तो वहां पर भारतीय एजेंसी ने उनकी खाने-पीने की निशुल्क व्यवस्था की। वहीं छात्र के सकुशल वापस लौटने पर परिवार में खुशी का माहौल हैं। उन्होंने भगवान का शुक्रिया अदा कर हिमांशु के उज्जवल भविष्य की कामना की हैं।
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खरकीव में फंसे दोस्तों के आ रहे फोन
हिमांशु चौहान ने बताया कि यूक्रेन के खरकीव में अभी भी उसके कुछ दोस्त फंसे हुए हैं। फ्लाइट में बैठने के बाद उसके पास एक दोस्त का फोन आया था। उसने बताया कि उनका यहां से निकलना चुनौतीपूर्ण बना हुआ हैं। भारतीय छात्रों से यूक्रेनियन करीब 50 हजार रुपये मांग रहे हैं। उनको बस से अन्य देशों के बॉर्डर तक पहुंचाने की बात कही जा रही हैं। जबकि छात्रों के पास उनको देने के लिए पैसे नहीं हैं।
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हालात सुधरे तो वापस लौटूंगा यूक्रेन
युद्ध ग्रस्त यूक्रेन से निकल कर अपने घर वापस लौटे छात्र हिमांशु चौहान ने कहा कि अभी तो 2-3 माह जून तक ऑनलाइन पढ़ाई होनी है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि जून के बाद आप यूनिवर्सिटी आ सकते हैं। छात्र ने कहा कि अगर हालात सुधरे तो वह वापस यूक्रेन जाकर अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करेगा।
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