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गन्ने की फसल को सफेद गिडार से बचाएं किसान

Sun, 30 Jun 2019 12:05 AM IST
Deepak Sharma शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
शामली/अमर उजाला/ब्यूरो Published by: Deepak Sharma Updated Sun, 30 Jun 2019 12:05 AM IST
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Farmers save the sugarcane crop from white guider
farmer - फोटो : अमर उजाला
  शामली। हर साल पहली बरसात के बाद गन्ने की फसल में सफेद गिडार का प्रकोप शुुरू जाता है। पहली बरसात के बाद  गन्ने की फसल में शुरू होने वाले सफेद गिडार (व्हाइट ग्रब) से रोगों से फसल को बचाने के लिए किसानों को जागरूक होना पड़ेगा। यदि किसान जागरूक नहीं हुए, तो सफेद गिडार गन्ने की फसल को भारी क्षति पहुंचा सकता है।
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वेस्ट यूपी के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, बिजनौर समेत कई जिले गन्ने की बेल्ट है। जुलाई के प्रथम मानसून आने वाला है। मानसून के बाद  गन्ने की फसल में सफेद गिडार सक्रिय हो जाता है। कृषि वैैैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले कई वर्षों से सफेद गिडार कीट गन्ने की फसल में  मुख्य समस्या है।
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सफेद गिडार कीट गन्ना फसल पर एकल गुच्छों (कलम्प) पर हमला करते हैं। गर्मियों की पहली बौछार में सफेद गिडार के  प्रौढ़ सक्रिय होते हैं। जुलाई से लेकर सितंबर महीने के दौरान गिडार (ग्रब) सक्रिय होते हैं। गिडार (ग्रब) जड़ों को खाता है और स्तंभ (स्टाक) के भूमिगत भाग और सभी अवस्थाओं पर आक्रमण करता है।  शामली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर विकास मलिक के अनुसार पहली बरसात के बाद गन्ने की फसल में सफेद गिडार के प्रौढ़ सक्रिय हो जाता है। इससे गन्ने की फसल के आसपास नीम, तून, जामुन आदि पेड़ पौधो में सक्रिय रहता है। पहली बारिश के बाद व जमीन पर आकर नर मादा के रूप में गन्ने की फसल को सूखा देता है। सफेद गिडार गन्ने की फसल को तीस से लेकर चालीस प्रतिशत नुकसान पहुंचा देता है। पैदावार को रोक देता है।  जिले के किसानों को गन्ने की फसल को बचाने के लिए किसानों को पहल करनी होगी।
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क्या है लक्षण
सफेद गिडार गन्ने के जड़ तंत्र तथा जमीन की सतह के नीचे वाले भाग को जुलाई से सितंबर माह तक खाते रहते हैं। इसके द्वारा जड़ तंत्र के क्षतिग्रस्त हो जाने पर पौधों की पत्तियां पीली पड़कर सूख जाती हैं, जो इस कीट द्वारा की गई क्षति को  दर्शाती है। कुछ समय के बाद प्रभावित पौधे खेत में गिर जाते हैं। इसका शुरूआती आक्रमण खेत में कहीं-कहीं तथा बाद में पूरे खेत में हो जाता है।

क्या है रोग के प्रबंधन और बचाव
- इस कीट के प्रौढ़ जो भृंग होते हैं, गर्मी की प्रथम वर्षा के साथ जमीन के नीचे से निकलकर गन्ना फसल के आसपास पाए जाने वाले पैड पौधों पर उड़कर चले जाते हैं तथा उनकी पत्तियों को रात भर खाते हैं।  फिर सूर्योदय से पूर्व खेत में जमीन के नीचे जाकर अंडे देते हैं। रात्रि के समय बांस के हुक लगे डंडे से पेड़ की डालियों को हिलाकर उपस्थित प्रौढ़ों को जमीन पर गिराकर एकत्रित कर कीटनाशी मिश्रित जल में डुबाकर मार दे। इस काम को अभियान के रूप में एक सप्ताह लगातार करना चाहिए।


सफेद गिडार प्रौढ़ों को मारने हेतु आसपास के पेड़ों पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत तरल कीटनाशी की एक मिली लीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर बीज टुकड़ों पर छिड़काव कर भृंगों को नियंत्रित किया जा सकता है।  गन्ने की बिजाई से पूर्व खेत की मिट्टी पलट हल से कई बार जुताई करने से खेत में उपस्थित इस कीट के विकास की विभिन्न अवस्थाओं के ऊपर आ जाने से पक्षियों द्वारा खाकर इनकी संख्या घट जाती है। इस कीट से प्रभावित खेत में धान-गन्ने का फसल चक्र अपनाएं। क्लोथियानिदीन 50 प्रतिशत घुलनशील कीटनाशी की 100 ग्राम मात्रा प्रति 200 लीटर पानी में घोल बनाकर जुलाई माह में गन्ने की जड़ों पर ट्रेचिंग करने से सूडियों की गतिविधि को कम किया जा सकता है।
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