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धान फसल को मिथ्या कंडुवआ व फफूंद रोग पहुंचा सकता है नुकसान: अमित
Mon, 18 Sep 2023 12:36 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Mon, 18 Sep 2023 12:36 AM IST
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शामली। धान फसल की बुवाई शुरू हो चुकी है और ऐसे में मिथ्या कंडुवआ व फफूंद रोग लगने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में किसानों को फसल बचाने के लिए कीटनाशक दवाई का छिड़काव कर फसल बचाने का आह्वान किया है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि वर्तमान में जनपद में वर्षा एवं तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण धान में लगने वाले सामायिक कीट/रोग के प्रकोप की संभावना के चलते बचाव, प्रबंधन के लिए किसानों को जागरूक होना होगा। मिथ्या कंडुवआ व फफूंद रोग जनित रोग है। इस रोग के प्रकोप के बाद धान की बाली के दाने पीले और काले रंग के आवरण से ढक जाते है जिनको हाथ से छूने पर हाथ में पीले, काले रंग के पाउडर जैसे रोग के स्पोर लग जाते है। प्रकोप की संभावना को देखते हुए स्यूडोमोनास फ्लोरिसेंस 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से 15-20 दिन के अंदर सुरक्षात्मक छिड़काव करना चाहिए। रोग के लक्षण दिखाई देने पर कापर हाइड्राक्साइड 77 प्रति डब्ल्यूपी 1500 ग्राम मात्रा व पिकोसीस्ट्रोबिन 7.05 प्रति प्रोपिकोनाजोल 11.7 प्रति एसीसी की 1000 ग्राम मात्रा 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।
झोका रोग में पत्तियों पर आंख की आकृति के धब्बे बनते है, जो मध्य में राख के रंग के तथा किनारे पर गहरे कत्थे रंग के होते है। पत्तियों के अतिरिक्त बालियों, डंठलों, पुष्प शाखाओं एवं गांठों पर काले भूरे धब्बे बनते हैं। इससे बचने के लिए नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का संस्तुत प्रयोग करना चाहिए। इस रोग के नियंत्रण के लिए इडीफेनफॉश 50 प्रति ईसी 500 से 600 मिली मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 750 से 1000 लीटर पानी में मैंकोजेब 75 प्रति डब्ल्यूपी 1500 से 2000 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
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शीथ ब्लाइटरोट रोग में धान की बालियों पर फफूंदी का प्रकोप होता है। बाली जहां पौधों से जुड़ी होती है उस स्थान से टूट कर सूख जाती है। इसकी रोकथाम के लिए कार्बंडाजिम 12 प्रति हेक्टेयर मैंकोजेब 63 प्रति. की एक कि.ग्रा. मात्रा प्रति हैक्टेयर 600 से 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इस रोग के नियंत्रण के लिए वैलीडा माइसिन 3 प्रति हेक्टेयर की एक लीटर मात्रा प्रति हैक्टेयर 600 से 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि वर्तमान में जनपद में वर्षा एवं तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण धान में लगने वाले सामायिक कीट/रोग के प्रकोप की संभावना के चलते बचाव, प्रबंधन के लिए किसानों को जागरूक होना होगा। मिथ्या कंडुवआ व फफूंद रोग जनित रोग है। इस रोग के प्रकोप के बाद धान की बाली के दाने पीले और काले रंग के आवरण से ढक जाते है जिनको हाथ से छूने पर हाथ में पीले, काले रंग के पाउडर जैसे रोग के स्पोर लग जाते है। प्रकोप की संभावना को देखते हुए स्यूडोमोनास फ्लोरिसेंस 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से 15-20 दिन के अंदर सुरक्षात्मक छिड़काव करना चाहिए। रोग के लक्षण दिखाई देने पर कापर हाइड्राक्साइड 77 प्रति डब्ल्यूपी 1500 ग्राम मात्रा व पिकोसीस्ट्रोबिन 7.05 प्रति प्रोपिकोनाजोल 11.7 प्रति एसीसी की 1000 ग्राम मात्रा 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।
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झोका रोग में पत्तियों पर आंख की आकृति के धब्बे बनते है, जो मध्य में राख के रंग के तथा किनारे पर गहरे कत्थे रंग के होते है। पत्तियों के अतिरिक्त बालियों, डंठलों, पुष्प शाखाओं एवं गांठों पर काले भूरे धब्बे बनते हैं। इससे बचने के लिए नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का संस्तुत प्रयोग करना चाहिए। इस रोग के नियंत्रण के लिए इडीफेनफॉश 50 प्रति ईसी 500 से 600 मिली मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 750 से 1000 लीटर पानी में मैंकोजेब 75 प्रति डब्ल्यूपी 1500 से 2000 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
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शीथ ब्लाइटरोट रोग में धान की बालियों पर फफूंदी का प्रकोप होता है। बाली जहां पौधों से जुड़ी होती है उस स्थान से टूट कर सूख जाती है। इसकी रोकथाम के लिए कार्बंडाजिम 12 प्रति हेक्टेयर मैंकोजेब 63 प्रति. की एक कि.ग्रा. मात्रा प्रति हैक्टेयर 600 से 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इस रोग के नियंत्रण के लिए वैलीडा माइसिन 3 प्रति हेक्टेयर की एक लीटर मात्रा प्रति हैक्टेयर 600 से 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।