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स्वस्थ रहने के लिए आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों का करें सेवन
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शामली। आयोडीन की कमी से मानसिक व शारीरिक विकास प्रभावित होता है। मानसिक मंदता आयोडीन की कमी की वजह से होती है। आयोडीन जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो सेहत के लिए जरूरती है। इसकी कमी से कई तरह के रोग होने की संभावना रहती है। इसलिए लोगों को स्वस्थ रहने के लिए आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
हर साल 21 अक्तूबर को विश्व आयोडीन अल्पता दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आयोडीन के पर्याप्त उपयोग शरीर में आयोडीन की जरूरत के बारे में लोगों को जागरूक करना है। आयोडीन की पूर्ति के लिए नमक सामान्य स्रोत है, लेकिन नमक पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। नमक का बहुत ज्यादा या कम सेवन करना दोनों ही स्थिति में शरीर के लिए नुकसानदायक होता है। आयोडीन की संतुलित मात्रा के लिए आयोडीनयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। आयोडीन की पूर्ति के लिए दूध, अंडा दालें, अनाज आदि का सेवन करना रहना चाहिए। शरीर में आयोडीन की कमी से गर्भवती महिला और बच्चों का शारीरिक व मानसिक प्रभावित होने के साथ ही घेंघा रोग, अपंगता, गूंगापन, बहरापन, रूखी त्वचा, बालों का गिरना, मांस पेशियों में दर्द रहना आदि समस्याएं आती है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि शरीर और दिमाग के विकास के लिए आयोडीन जरूरी है। आयोडीन की पूर्ति भोजन में नमक से होती है। हालांकि कम या ज्यादा मात्रा दोनों ही शरीर के लिए नुकसानदायक होती है। इसलिए पूरी तरह नमक पर निर्भर न रहे। आयोडीन की सही मात्रा लेनी चाहिए। सही मात्रा में सेवन करने से मन और दिमाग स्वस्थ रहता है। आयोडीन की कमी वाले लक्षण नजर आने पर चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराना चाहिए।
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आयोजन की कमी से होने वाले रोग
थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ना।
मानसिक रोग, मंदबुद्धि, मानसिक मंदता।
तंत्रिका पेशी व मांस पेशियों में जकड़न।
शारीरिक व मानसिक विकास में रूकावट होना।
बहरापन, गूंगापन ओर बौनापन होना।
देखने, सुनने व बोलने में कमी होना।
चेहरे व गले पर सूजन आना।
कोलेस्ट्राल का स्तर बढ़ना।
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हर साल 21 अक्तूबर को विश्व आयोडीन अल्पता दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आयोडीन के पर्याप्त उपयोग शरीर में आयोडीन की जरूरत के बारे में लोगों को जागरूक करना है। आयोडीन की पूर्ति के लिए नमक सामान्य स्रोत है, लेकिन नमक पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। नमक का बहुत ज्यादा या कम सेवन करना दोनों ही स्थिति में शरीर के लिए नुकसानदायक होता है। आयोडीन की संतुलित मात्रा के लिए आयोडीनयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। आयोडीन की पूर्ति के लिए दूध, अंडा दालें, अनाज आदि का सेवन करना रहना चाहिए। शरीर में आयोडीन की कमी से गर्भवती महिला और बच्चों का शारीरिक व मानसिक प्रभावित होने के साथ ही घेंघा रोग, अपंगता, गूंगापन, बहरापन, रूखी त्वचा, बालों का गिरना, मांस पेशियों में दर्द रहना आदि समस्याएं आती है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि शरीर और दिमाग के विकास के लिए आयोडीन जरूरी है। आयोडीन की पूर्ति भोजन में नमक से होती है। हालांकि कम या ज्यादा मात्रा दोनों ही शरीर के लिए नुकसानदायक होती है। इसलिए पूरी तरह नमक पर निर्भर न रहे। आयोडीन की सही मात्रा लेनी चाहिए। सही मात्रा में सेवन करने से मन और दिमाग स्वस्थ रहता है। आयोडीन की कमी वाले लक्षण नजर आने पर चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराना चाहिए।
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आयोजन की कमी से होने वाले रोग
थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ना।
मानसिक रोग, मंदबुद्धि, मानसिक मंदता।
तंत्रिका पेशी व मांस पेशियों में जकड़न।
शारीरिक व मानसिक विकास में रूकावट होना।
बहरापन, गूंगापन ओर बौनापन होना।
देखने, सुनने व बोलने में कमी होना।
चेहरे व गले पर सूजन आना।
कोलेस्ट्राल का स्तर बढ़ना।