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शहर से डस्टबिन हुए गायब, सड़कों पर डाला जा रहा कूड़ा
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शामली। शहर में सूखा और गीला कूड़ा अलग करने की कोई व्यवस्था नहीं है। शहर में तीन साल पहले लगाए गए डस्टबिन अब गायब हो गए है, अगर इक्का दुक्का जगह कहीं है तो वह टूटे हुए हैं। डस्टबिन नहीं होने से सड़कों पर ही कूड़ा डाला जाता है। इससे स्वच्छता अभियान के नाम पर खानापूर्ति हो रही है।
स्वच्छता सर्वेक्षण के मानकों में सूखा-गीला कूड़ा अलग करना भी मुख्य रूप से शामिल है, लेकिन शहर में सूखा-गीला कूड़ा अलग करने की व्यवस्था होना तो दूर, यहां पर डस्टबिन तक नजर नहीं आते। करीब तीन साल पहले स्वच्छ भारत मिशन के तहत पालिका को मिले बजट से शहर में मुख्य स्थानों और बाजारों में सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग डालने के लिए प्लास्टिक के डस्टबिन लगाए गए थे। धीरे-धीरे डस्टबिन टूटतेे चले गए और आज हालात ये है कि शहर से ये डस्टबिन गायब हो गए। इक्का दुक्का जगह अगर कहीं पर डस्टबिन है तो वह टूटी फूटी हालत में है। फलों व अन्य खाद्य पदार्थ बेचने वाले अधिकतर ठेले वाले डस्टबिन नहीं रखते। शहर से निकलने वाला कूड़ा डंपिंग ग्राउंड पर डाला जाता है। डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के पहाड़ बने हुए हैं। डस्टबिन न होने से शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं।
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कूड़ा डालने पर नहीं लगता जुर्माना
शामली। सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा डालने या फेंकने पर जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन शामली में जुर्माना लेने की कोई व्यवस्था नहीं है। अभी तक किसी नागरिक या दुकानदार से जुर्माना नहीं लिया गया है। शायद इसी वजह से लोग सड़क पर कूड़ा फेंकने में किसी को जरा भी हिचक नहीं होती। इसके चलते घरों व दुकानों के बाहर अक्सर कूड़ा पड़ा रहता है। पालिका की टीम सुबह को कूड़ा उठाकर ले जाती है, लेकिन उसके बाद बाजार खुलने पर फिर कूड़ा डाल दिया जाता है।
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कोट
शहर में करीब तीन साल पहले अलग-अलग कूड़ा डालने के लिए प्लास्टिक के डस्टबिन लगाए गए थे। शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन किया जाता है। इसके अलावा शहर में सात-आठ स्थानों पर कूड़ा डालने के लिए लोहे के बड़े डस्टबिन रखे गए हैं, जिनमें मोहल्लेवासी कूड़ा डालते हैं। - आदेश सैनी, सफाई एवं खाद्य निरीक्षक नगरपालिका।
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स्वच्छता सर्वेक्षण के मानकों में सूखा-गीला कूड़ा अलग करना भी मुख्य रूप से शामिल है, लेकिन शहर में सूखा-गीला कूड़ा अलग करने की व्यवस्था होना तो दूर, यहां पर डस्टबिन तक नजर नहीं आते। करीब तीन साल पहले स्वच्छ भारत मिशन के तहत पालिका को मिले बजट से शहर में मुख्य स्थानों और बाजारों में सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग डालने के लिए प्लास्टिक के डस्टबिन लगाए गए थे। धीरे-धीरे डस्टबिन टूटतेे चले गए और आज हालात ये है कि शहर से ये डस्टबिन गायब हो गए। इक्का दुक्का जगह अगर कहीं पर डस्टबिन है तो वह टूटी फूटी हालत में है। फलों व अन्य खाद्य पदार्थ बेचने वाले अधिकतर ठेले वाले डस्टबिन नहीं रखते। शहर से निकलने वाला कूड़ा डंपिंग ग्राउंड पर डाला जाता है। डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के पहाड़ बने हुए हैं। डस्टबिन न होने से शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं।
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कूड़ा डालने पर नहीं लगता जुर्माना
शामली। सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा डालने या फेंकने पर जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन शामली में जुर्माना लेने की कोई व्यवस्था नहीं है। अभी तक किसी नागरिक या दुकानदार से जुर्माना नहीं लिया गया है। शायद इसी वजह से लोग सड़क पर कूड़ा फेंकने में किसी को जरा भी हिचक नहीं होती। इसके चलते घरों व दुकानों के बाहर अक्सर कूड़ा पड़ा रहता है। पालिका की टीम सुबह को कूड़ा उठाकर ले जाती है, लेकिन उसके बाद बाजार खुलने पर फिर कूड़ा डाल दिया जाता है।
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कोट
शहर में करीब तीन साल पहले अलग-अलग कूड़ा डालने के लिए प्लास्टिक के डस्टबिन लगाए गए थे। शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन किया जाता है। इसके अलावा शहर में सात-आठ स्थानों पर कूड़ा डालने के लिए लोहे के बड़े डस्टबिन रखे गए हैं, जिनमें मोहल्लेवासी कूड़ा डालते हैं। - आदेश सैनी, सफाई एवं खाद्य निरीक्षक नगरपालिका।