{"_id":"5d17af0c8ebc3e3c6609b53a","slug":"drying-crops-due-to-fierce-heat-farmers-worry","type":"story","status":"publish","title_hn":"भीषण गर्मी से सूख रहीं फसलें, किसान परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भीषण गर्मी से सूख रहीं फसलें, किसान परेशान
Mon, 01 Jul 2019 01:47 AM IST
Deepak Sharma
शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
Published by: Deepak Sharma
Updated Mon, 01 Jul 2019 01:47 AM IST
विज्ञापन
summer
- फोटो : अमर उजाला
शामली। अधिक तापमान होने से फसलों और सब्जियों पर व्यापक असर पड़ने लगा है। धान, मक्का, गन्ना हरा चारे ज्वार और फल सब्जियों को बचाने के लिए अतिरिक्त पानी दिया जा रहा है। जिससे किसानों को ज्यादा खर्चा आ रहा है।
अप्रैल से लेकर जून तक भीषण गर्मी पड़ने और तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से धान, मक्का, बाजरा, गन्ना, ज्वार, सब्जियों में बैंगन, टमाटर, भिंडी, ककड़ी, फूल व बंदगोभी, लौकी, खीरा आदि फसलें प्रभावित होने लगी हैं। किसानों का कहना है कि अधिक गर्मी से गोभी के पत्ते फूल सूखने लगे हैं लौकी-तरबूज की खेती पर व्यापक असर पड़ा है। टमाटर को बचाने के लिए प्रतिदिन पानी दिए जाने से सब्जियों की लागत बढ़ गई है
- जलालाबाद के गंगोह रोड पर 30 बीघा गोभी की खेती करने वाले किसान मतलूब मलिक का कहना कि ज्यादा गर्मी होने से गोभी के पत्ते सूख जाते हैं। फूल नीचे झड़कर गिर जाते हैं। गोभी की फसल को बचाने के लिए एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है।
विज्ञापन
- जलालाबाद के दिल्ली रोड पर टमाटर की खेती करने वाले किसान नाजिम मौहम्मद का कहना है कि टमाटर को फसल को बचाने के लिए प्रतिदिन पानी दिया जा रहा है। जिस कारण 14 हजार से लेकर 15 हजार प्रति बीघा पर अतिरिक्त खर्चा आ रहा है।
- चौसाना क्षेत्र के बल्ला माजरा निवासी रिजवान का कहना है कि वह गांव में लौकी की चार बीघा भूमि में आठ बीघा भूमि में तरबूज की खेती करते हैं। ज्यादा गर्मी पड़ने से लोकी और तरबूज की खेती सूखनी शुरू हो गई है। फसल को काफी नुकसान है।
धान लगाने के लिए किसान करे बारिश का इंतजार
शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डाक्टर विकास मलिक का कहना है कि ज्यादा तापमान आने से गन्ने की पत्तियां सुखना शुरू होगी है। ज्यादा तापमान गन्ने की पेड़ी को प्रभावित कर रही है। बेंगन, टमाटर, खीरा, ककड़ी, भिंडी लौकी , मक्का, गन्ना, धान- हरा चारा ज्वार आदि फसलें पानी वाली है। ज्यादा पानी देकर सब्जी और फसल को बचाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि किसान धान की नर्सरी को खेतों में लगाने के लिए बारिश का इंतजार करें। ज्यादा धूप में किसानों को अतिरिक्त व्यवस्था करनी होगी।
- जनवरी से लेकर 29 जून तक पिछले सालों की अपेक्षा इस साल सामान्य से भी कम बारिश हुई है। किसान फसलों को बचाने के ज्यादा से ज्यादा पानी दें। 6-7 जुलाई तक मानसून आसकता है। - डॉक्टर अशोक कुमार अहलुवालिया अध्यक्ष मृदा विभाग सरदार बल्लभ भाई, कृषि विश्वविद्यालय मेरठ।
विज्ञापन
अप्रैल से लेकर जून तक भीषण गर्मी पड़ने और तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से धान, मक्का, बाजरा, गन्ना, ज्वार, सब्जियों में बैंगन, टमाटर, भिंडी, ककड़ी, फूल व बंदगोभी, लौकी, खीरा आदि फसलें प्रभावित होने लगी हैं। किसानों का कहना है कि अधिक गर्मी से गोभी के पत्ते फूल सूखने लगे हैं लौकी-तरबूज की खेती पर व्यापक असर पड़ा है। टमाटर को बचाने के लिए प्रतिदिन पानी दिए जाने से सब्जियों की लागत बढ़ गई है
विज्ञापन
- जलालाबाद के गंगोह रोड पर 30 बीघा गोभी की खेती करने वाले किसान मतलूब मलिक का कहना कि ज्यादा गर्मी होने से गोभी के पत्ते सूख जाते हैं। फूल नीचे झड़कर गिर जाते हैं। गोभी की फसल को बचाने के लिए एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है।
विज्ञापन
- जलालाबाद के दिल्ली रोड पर टमाटर की खेती करने वाले किसान नाजिम मौहम्मद का कहना है कि टमाटर को फसल को बचाने के लिए प्रतिदिन पानी दिया जा रहा है। जिस कारण 14 हजार से लेकर 15 हजार प्रति बीघा पर अतिरिक्त खर्चा आ रहा है।
- चौसाना क्षेत्र के बल्ला माजरा निवासी रिजवान का कहना है कि वह गांव में लौकी की चार बीघा भूमि में आठ बीघा भूमि में तरबूज की खेती करते हैं। ज्यादा गर्मी पड़ने से लोकी और तरबूज की खेती सूखनी शुरू हो गई है। फसल को काफी नुकसान है।
धान लगाने के लिए किसान करे बारिश का इंतजार
शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डाक्टर विकास मलिक का कहना है कि ज्यादा तापमान आने से गन्ने की पत्तियां सुखना शुरू होगी है। ज्यादा तापमान गन्ने की पेड़ी को प्रभावित कर रही है। बेंगन, टमाटर, खीरा, ककड़ी, भिंडी लौकी , मक्का, गन्ना, धान- हरा चारा ज्वार आदि फसलें पानी वाली है। ज्यादा पानी देकर सब्जी और फसल को बचाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि किसान धान की नर्सरी को खेतों में लगाने के लिए बारिश का इंतजार करें। ज्यादा धूप में किसानों को अतिरिक्त व्यवस्था करनी होगी।
- जनवरी से लेकर 29 जून तक पिछले सालों की अपेक्षा इस साल सामान्य से भी कम बारिश हुई है। किसान फसलों को बचाने के ज्यादा से ज्यादा पानी दें। 6-7 जुलाई तक मानसून आसकता है। - डॉक्टर अशोक कुमार अहलुवालिया अध्यक्ष मृदा विभाग सरदार बल्लभ भाई, कृषि विश्वविद्यालय मेरठ।