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गन्ना भुगतान न मिलने से गेहूं की बुवाई में हो रही देरी
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झिंझाना। किसानों को गन्ना भुगतान न मिलने से मध्यम वर्गीय किसानों को गेहूं की बुवाई के संसाधन जुटाने में पैसों की कमी आड़े आ रही है। इस वजह से काफी किसानों को गेहूं बुवाई में देर हो रही है। गन्ना बुवाई का समय 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक माना जाता है।
पैसे की कमी के चलते किसान गेहूं की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए खाद बीज समेत अनेक संसाधनों की कमी आड़े आ रही है। लपराना गांव के किसान चौधरी हितेंद्र खैवाल, चाहिराम तोमर, विनेश कुमार तोमर, डॉ. रविंद्र खैवाल, चौधरी जयकिरण, कालूराम, बिजेंद्र सिंह, धर्मवीर सिंह आदि बताते हैं कि शामली शुगर मिल ने अभी तक पिछले सत्र में 24 मार्च तक का ही गन्ने का भुगतान किया है।
ऊन शुगर मिल ने 15 अप्रैल तक का भुगतान किया हुआ है। किसानों ने बताया कि गेहूं की बुवाई अधिकतम 15 जनवरी तक की जा सकती है। शुगर मिल से भुगतान में देरी होने से होने के कारण किसानों को भारी असुविधा हो रही हैं, क्योंकि किसान पूरी तरह मिलों के भुगतान पर ही निर्भर होते हैं।
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पैसे की कमी के चलते किसान गेहूं की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए खाद बीज समेत अनेक संसाधनों की कमी आड़े आ रही है। लपराना गांव के किसान चौधरी हितेंद्र खैवाल, चाहिराम तोमर, विनेश कुमार तोमर, डॉ. रविंद्र खैवाल, चौधरी जयकिरण, कालूराम, बिजेंद्र सिंह, धर्मवीर सिंह आदि बताते हैं कि शामली शुगर मिल ने अभी तक पिछले सत्र में 24 मार्च तक का ही गन्ने का भुगतान किया है।
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ऊन शुगर मिल ने 15 अप्रैल तक का भुगतान किया हुआ है। किसानों ने बताया कि गेहूं की बुवाई अधिकतम 15 जनवरी तक की जा सकती है। शुगर मिल से भुगतान में देरी होने से होने के कारण किसानों को भारी असुविधा हो रही हैं, क्योंकि किसान पूरी तरह मिलों के भुगतान पर ही निर्भर होते हैं।
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