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ऋण के बोझ में दबे उद्योगों को रियायत की दरकार

Sat, 12 Jun 2021 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 12 Jun 2021 12:06 AM IST
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Debt burdened industries need concession
शामली। कोरोना कर्फ्यू से चरमराए उद्योगों को सरकार से रियायत की दरकार है। उद्यमी लिए गए ऋण पर ब्याज और बिजली के फिक्स चार्ज में छूट की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही पूंजी की कमी से चरमरा रहे उद्योगों को आसानी से ऋण मिले तो उन्हें कुछ राहत मिलेगी। जिले में एमएसएमई सेक्टर पर लगभग 425 करोड़ रुपये का ऋण है।
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कोरोना कर्फ्यू के दौरान इस बार उद्योगों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई थी, लेकिन बाजार पूरी तरह बंद होने के कारण मांग नहीं थी। उद्यमियों का कहना है कि उद्योगों का खर्च बदस्तूर जारी रहा, जबकि मांग नहीं होने के कारण आपूर्ति नहीं हुई। बिजली बिलों के अलावा अन्य कई खर्चें हैं, जो लगातार चलते रहे। बैंकों का ब्याज भी चढ़ता रहा। सरकार को पिछले वर्ष की तरह उद्योगों के लिए कुछ घोषणाएं करनी चाहिए।
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आईआईए शामली के सचिव अनुज गर्ग कहते हैं कि सरकार को उद्योगों को ऋण देने की प्रक्रिया को आसान करना चाहिए। इस समय उद्योग पूंजी के संकट से जूझ रहे हैं। इसके साथ ही लिए गए ऋण पर ब्याज की छूट मिलनी चाहिए। उद्यमी कमल गोयल कहते हैं कि इस समय उद्योग बहुत ही दिक्कत में हैं। बैंक का लोन, बिजली का फिक्स चार्ज तो चुकाना ही होगा। कोरोना कर्फ्यू के दौरान फैक्टरियां भले ही चली हों, लेकिन माल नहीं बिका। ऐसे में उद्यमियों को भारी नुकसान है। बैंक ब्याज और फिक्स चार्ज में छूट तो मिलनी ही चाहिए।
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उद्यमी शिशिर जैन का कहना है कि जिस तरह सरकार ने पिछले साल लॉकडाउन में उद्यमियों के लिए घोषणा की थी, उसी तरह इस बार लाभ दिया जाना चाहिए। बैंक ब्याज में छूट के साथ ही उद्योगों को ऋण की प्रक्रिया को आसान किया जाए ताकि उद्योगों के लिए चल रहा पूंजी का संकट दूर हो सके।

शामली इंडस्ट्रीयल एस्टेट मैनुफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकित गोयल कहते हैं कि विद्युत फिक्स चार्ज में छूट पिछले वर्ष की तरह दी जानी चाहिए। जीएसटी रिटर्न की तारीख बढ़े क्योंकि उद्यमी अभी टैक्स जमा करने की स्थिति में नहीं हैं। बैंकों से ली गई लोन लिमिट में लॉकडाउन समय का व्याज माफ किया जाए तथा इनकम टैक्स जमा करने की तारीख भी बढ़ाई जाए।
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