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Shamli News: 60 दिन बाद तय होगा नवजात का भविष्य
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झिंझाना। पीरखेड़ा गांव में झाड़ियों से मिले नवजात शिशु को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद जारी है। फिलहाल, चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल कल्याण समिति ने शिशु को अपनी अभिरक्षा में लेकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण 60 दिन के इंतजार के बाद तय करेगा कि नवजात को किसे सौंपा जाए।
पीरखेड़ा निवासी संजीव ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपा और नवजात के पालन-पोषण की अनुमति देने की मांग की थी। संजीव ने बताया कि 26 नवंबर को गांव के प्रवीण और सुंदर उनके घर एक नवजात शिशु लेकर आए थे। बताया गया कि बच्चा झाड़ियों में पाया गया था। चूंकि संजीव की कोई संतान नहीं है, उन्होंने नवजात को स्वीकार कर लिया, लेकिन दो दिन बाद सुंदर ने नवजात को वापस मांग लिया, जबकि इस बीच संजीव के परिवार का बच्चे से भावनात्मक लगाव बन गया। विवाद बढ़ने पर चाइल्ड हेल्पलाइन ने नवजात को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। संजीव ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि चूंकि उसकी कोई संतान नहीं है, इसलिए नवजात का पालन-पोषण उसे सौंपा जाए। वहीं, सुंदर भी नवजात को पालने का दावा कर रहे हैं।
बाल कल्याण समिति शामली के चेयरमैन सतेंद्र कुमार ने बताया कि नवजात फिलहाल स्वस्थ है। नियमानुसार, अगले 60 दिन तक मासूम के वास्तविक परिजनों के बारे में पता लगाया जाएगा। यदि इस अवधि में कोई परिजन नहीं मिलते हैं तो गोद लेने वाले को केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण में आवेदन करना होगा। इसके बाद ही तय किया जाएगा कि बच्चा किसके सुपुर्द किया जाए।
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नहीं पसीजा दिल
मासूम को झाड़ियों में फेंकने के बावजूद उसकी जन्मदाता मां का दिल नहीं पसीजा। फिलहाल, मासूम जिला अस्पताल में सुरक्षित है।
बबीता की हालत बिगड़ी
विवाद के कारण नवजात को लेने के बाद संजीव की पत्नी बबीता की हालत अचानक बिगड़ गई, जिसका प्राइवेट अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। संजीव का कहना है कि नवजात के जाने के कारण ही पत्नी की हालत बिगड़ी है। प्रशासन से नवजात दिलाने की मांग की है।
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पीरखेड़ा निवासी संजीव ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपा और नवजात के पालन-पोषण की अनुमति देने की मांग की थी। संजीव ने बताया कि 26 नवंबर को गांव के प्रवीण और सुंदर उनके घर एक नवजात शिशु लेकर आए थे। बताया गया कि बच्चा झाड़ियों में पाया गया था। चूंकि संजीव की कोई संतान नहीं है, उन्होंने नवजात को स्वीकार कर लिया, लेकिन दो दिन बाद सुंदर ने नवजात को वापस मांग लिया, जबकि इस बीच संजीव के परिवार का बच्चे से भावनात्मक लगाव बन गया। विवाद बढ़ने पर चाइल्ड हेल्पलाइन ने नवजात को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। संजीव ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि चूंकि उसकी कोई संतान नहीं है, इसलिए नवजात का पालन-पोषण उसे सौंपा जाए। वहीं, सुंदर भी नवजात को पालने का दावा कर रहे हैं।
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बाल कल्याण समिति शामली के चेयरमैन सतेंद्र कुमार ने बताया कि नवजात फिलहाल स्वस्थ है। नियमानुसार, अगले 60 दिन तक मासूम के वास्तविक परिजनों के बारे में पता लगाया जाएगा। यदि इस अवधि में कोई परिजन नहीं मिलते हैं तो गोद लेने वाले को केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण में आवेदन करना होगा। इसके बाद ही तय किया जाएगा कि बच्चा किसके सुपुर्द किया जाए।
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नहीं पसीजा दिल
मासूम को झाड़ियों में फेंकने के बावजूद उसकी जन्मदाता मां का दिल नहीं पसीजा। फिलहाल, मासूम जिला अस्पताल में सुरक्षित है।
बबीता की हालत बिगड़ी
विवाद के कारण नवजात को लेने के बाद संजीव की पत्नी बबीता की हालत अचानक बिगड़ गई, जिसका प्राइवेट अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। संजीव का कहना है कि नवजात के जाने के कारण ही पत्नी की हालत बिगड़ी है। प्रशासन से नवजात दिलाने की मांग की है।