Shamli: गौमाता ने रोका रास्ता, एक घंटे तक नहीं उठाने दी कांवड़, श्रद्धालुओं ने माना भोलेनाथ का चमत्कार
गढ़ीपुख्ता में कांवड़ ला रहे श्रद्धालुओं का रास्ता एक गौमाता ने एक घंटे तक रोक दिया। कभी सूंघती, कभी कांवड़ निहारती रहीं। श्रद्धालुओं ने इसे शिव कृपा और चमत्कारी संकेत माना।
विस्तार
श्रावण मास में कांवड़ यात्रा के दौरान शामली जनपद के गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के गांव गंदेवड़ा संगम के पास एक ऐसा वाकया हुआ, जिसे श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ की कृपा और गौमाता का आशीर्वाद माना।
गौमाता ने रोका रास्ता, रुकी रही यात्रा
पिंडौरा गांव के श्रद्धालु सावन भोला, जो 121 लीटर गंगाजल की कांवड़ ला रहे थे, उनके साथ श्रवण भोला (71 लीटर) और रवि भोला (21 लीटर) भी थे। जब ये लोग नहर किनारे की सड़क से गुजर रहे थे, तभी अचानक एक गौमाता उनके सामने आकर खड़ी हो गईं।
यह भी पढ़ें: Meerut News Today Live: मेरठ और आसपास की ताजा और अहम खबरें, पढ़ें 20 जुलाई को आपके शहर में क्या हुआ
बताया गया कि गौमाता करीब एक घंटे तक कांवड़ उठाने नहीं दे रही थीं। कभी वे कांवड़ को सूंघतीं, कभी गौर से देखतीं। श्रद्धालु हतप्रभ भी थे और भावुक भी।
पंडित ने बताया शुभ संकेत
श्रवण भोला ने बताया कि उन्होंने तुरंत गांव के पंडित से संपर्क किया। पंडित ने कहा कि यह कोई साधारण बात नहीं, बल्कि कोई शुभ संकेत हो सकता है। पंडित ने सुझाव दिया कि बरगद या गुल्लर के पेड़ के नीचे से निकलने से पहले दक्षिणा अर्पित करो और गौमाता को हाथ जोड़ो।
श्रद्धालुओं ने जैसे ही दक्षिणा अर्पित की तो गौमाता ने स्वयं रास्ता छोड़ दिया। इस यात्रा में उनके साथ अर्जुन, सूरज, प्रिंस और सुधीर जैसे सहयोगी भी मौजूद थे, जिन्होंने पूरी घटना को अत्यंत आस्था और सम्मान के साथ देखा।