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हरियाणा-यूपी सीमा विवाद पर मंथन
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 13 May 2017 12:25 AM IST
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Haryana-UP border dispute
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कैराना । हरियाणा-यूपी सीमा विवाद को हल कराने के लिए शुक्रवार को हरियाणा के बापौली कस्बे में दोनों प्रदेशों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें विवाद को हल करने के लिए तीन बिंदुओं पर काम करने की सहमति बनी।
गौरतलब है कि फसल जोतने को लेकर 10 दिन से भी हरियाणा और यूपी की सीमा पर दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच तनाव बना हुआ है। शुक्रवार को इसी विवाद को हल कराने के प्रयास में शुक्रवार को कैराना एसडीएम विजय प्रकाश तिवारी, सीओ भूषण वर्मा, तहसीलदार अभय राज पांडेय, कोतवाली प्रभारी राज कुमार शर्मा हरियाणा के बापौली कस्बे पहुंचे।
बापौली के सरकारी गेस्ट हाउस में यूपी के अधिकारियों ने बापौली तहसीलदार नवनीत कुमार, डीआरओ राजकुमार, डीएसपी जगदीश दुहन, सनौली एसएचओ नरेंद्र कुमार के साथ सीमा विवाद पर बैठक की। दोनों प्रदेशों के अधिकारियों ने दीक्षित आयोग द्वारा लगाए गए पिलरों से इस ओर यूपी की सीमा माना।
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18 मई से पहले कैराना और बापौली तहसीलदारों की देखरेख में दोनों राज्यों के हल्का लेखपाल खतौनी और भू अभिलेखों का मिलान करेंगे। दोनों राज्यों के भू अभिलेखों में जिसके नाम पर जमीन है, उसे ही मालिक माना जाएगा। सीओ ने बताया कि समाधान होने तक विवादित भूमि पर कोई भी न तो जुताई करेगा ओर न ही बुआई करेगा। शांति बनाई रखी जाएगी।
ये है दशकों पुराना हरियाणा-यूपी सीमा विवाद
यमुना की धारा के स्थान बदलने के कारण यूपी के किसानों की हजारों बीघा जमीन यमुना के पार हरियाणा में चली गई थी। इसके चलते केंद्र सरकार ने सन 1974 में दीक्षित आयोग का गठन किया था।
दीक्षित आयोग ने सर्वे के बाद यमुना की धारा को मध्य मानते हुए सीमा पर पिलर लगाए थे, जो आज भी हरियाणा।यूपी सीमा पर मौजूद है। यमुना के उस पार और दीक्षित आयोग द्वारा लगाए गए पिलर के इस ओर यूपी की जमीन है। मगर, हरियाणा के राजस्व रिकार्ड में उक्त भूमि हरियाणा राज्य के नाम पर ही दर्ज रह गई है।
हरियाणा राजस्व विभाग ने उक्त भूमि को अपने राजस्व रिकार्ड से हटाया नहीं था। जिस कारण आज तक सीमा विवाद ज्यो का त्यों बना हुआ है। इसी विवाद के चलते पूर्व में सीमा पर कई बार खूनी संघर्ष हो चुके है।
पलेज में लगाई आग, सीमा पर तनाव
कैराना(ब्यूरो)। हरियाणा के कुछ लोगों ने शुक्रवार को मवी के दो किसानों की खरबूजे और तरबूज की पलेज में आग लगा दी। आसपास के किसानों ने आग पर पानी डाल कर काबू पाया। शुक्रवार को हरियाणा-यूपी सीमा विवाद के चलते हरियाणा के गांव रीशपुुर और नन्हेड़ा के किसानों ने मवी के किसानों पर हमला कर दिया था। जिससे आधा दर्जन किसान घायल हो गए थे।
इसके अगले दिन भी सीमा पर स्थित मवी के किसानों की पांच झोपड़ी और इंजन में आग लगा दी थी। शुक्रवार को भी सुबह के समय हरियाणा के कुछ युवकों ने सीमा पर मवी के किसान मोमिन व कासिम की पलेज में आग लगा दी। आग लगाने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के समय मोमिन व कासिम गांव में थे जबकि पलेज के पास उसके परिवार के बच्चे मौजूद थे। आग पर आसपास के किसानों ने किसी तरह पानी डाल कर काबू पाया। ग्राम प्रधान दिलशाद और शिवकुमार ने बताया कि समय रहते आग को बुझा दिया गया और गांव के लोगों को शांत रहने के लिए कहा गया है।
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गौरतलब है कि फसल जोतने को लेकर 10 दिन से भी हरियाणा और यूपी की सीमा पर दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच तनाव बना हुआ है। शुक्रवार को इसी विवाद को हल कराने के प्रयास में शुक्रवार को कैराना एसडीएम विजय प्रकाश तिवारी, सीओ भूषण वर्मा, तहसीलदार अभय राज पांडेय, कोतवाली प्रभारी राज कुमार शर्मा हरियाणा के बापौली कस्बे पहुंचे।
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बापौली के सरकारी गेस्ट हाउस में यूपी के अधिकारियों ने बापौली तहसीलदार नवनीत कुमार, डीआरओ राजकुमार, डीएसपी जगदीश दुहन, सनौली एसएचओ नरेंद्र कुमार के साथ सीमा विवाद पर बैठक की। दोनों प्रदेशों के अधिकारियों ने दीक्षित आयोग द्वारा लगाए गए पिलरों से इस ओर यूपी की सीमा माना।
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18 मई से पहले कैराना और बापौली तहसीलदारों की देखरेख में दोनों राज्यों के हल्का लेखपाल खतौनी और भू अभिलेखों का मिलान करेंगे। दोनों राज्यों के भू अभिलेखों में जिसके नाम पर जमीन है, उसे ही मालिक माना जाएगा। सीओ ने बताया कि समाधान होने तक विवादित भूमि पर कोई भी न तो जुताई करेगा ओर न ही बुआई करेगा। शांति बनाई रखी जाएगी।
ये है दशकों पुराना हरियाणा-यूपी सीमा विवाद
यमुना की धारा के स्थान बदलने के कारण यूपी के किसानों की हजारों बीघा जमीन यमुना के पार हरियाणा में चली गई थी। इसके चलते केंद्र सरकार ने सन 1974 में दीक्षित आयोग का गठन किया था।
दीक्षित आयोग ने सर्वे के बाद यमुना की धारा को मध्य मानते हुए सीमा पर पिलर लगाए थे, जो आज भी हरियाणा।यूपी सीमा पर मौजूद है। यमुना के उस पार और दीक्षित आयोग द्वारा लगाए गए पिलर के इस ओर यूपी की जमीन है। मगर, हरियाणा के राजस्व रिकार्ड में उक्त भूमि हरियाणा राज्य के नाम पर ही दर्ज रह गई है।
हरियाणा राजस्व विभाग ने उक्त भूमि को अपने राजस्व रिकार्ड से हटाया नहीं था। जिस कारण आज तक सीमा विवाद ज्यो का त्यों बना हुआ है। इसी विवाद के चलते पूर्व में सीमा पर कई बार खूनी संघर्ष हो चुके है।
पलेज में लगाई आग, सीमा पर तनाव
कैराना(ब्यूरो)। हरियाणा के कुछ लोगों ने शुक्रवार को मवी के दो किसानों की खरबूजे और तरबूज की पलेज में आग लगा दी। आसपास के किसानों ने आग पर पानी डाल कर काबू पाया। शुक्रवार को हरियाणा-यूपी सीमा विवाद के चलते हरियाणा के गांव रीशपुुर और नन्हेड़ा के किसानों ने मवी के किसानों पर हमला कर दिया था। जिससे आधा दर्जन किसान घायल हो गए थे।
इसके अगले दिन भी सीमा पर स्थित मवी के किसानों की पांच झोपड़ी और इंजन में आग लगा दी थी। शुक्रवार को भी सुबह के समय हरियाणा के कुछ युवकों ने सीमा पर मवी के किसान मोमिन व कासिम की पलेज में आग लगा दी। आग लगाने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के समय मोमिन व कासिम गांव में थे जबकि पलेज के पास उसके परिवार के बच्चे मौजूद थे। आग पर आसपास के किसानों ने किसी तरह पानी डाल कर काबू पाया। ग्राम प्रधान दिलशाद और शिवकुमार ने बताया कि समय रहते आग को बुझा दिया गया और गांव के लोगों को शांत रहने के लिए कहा गया है।