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Shamli News: केनरा बैंक के शाखा प्रबंधक पर 6.10 लाख का जुर्माना
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शामली। जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग ने ऊंचा गांव स्थित केनरा बैंक और उसके शाखा प्रबंधक पर किसान वीरेंद्र को ट्रैक्टर लोन देने पर गबन करने के मामले में 6.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि 45 दिन के भीतर यह राशि अदा की जाए। साथ ही शाखा प्रबंधक पर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाते हुए इसे राजकोष में जमा करने को कहा गया है।
ऊंचा गांव निवासी वीरेंद्र कुमार चौहान ने आयोग में वाद दायर कर बताया कि उन्होंने सितंबर 2019 में खेती के लिए ट्रैक्टर लोन लेने हेतु बैंक से संपर्क किया था। शाखा प्रबंधक ने सभी कागजी कार्यवाही पूरी करने के बाद उन्हें आश्वासन दिया था कि अक्टूबर में दीपावली से पहले ट्रैक्टर लोन की रकम का ड्राफ्ट दे दिया जाएगा। किसान ने एजेंसी पर एडवांस देकर ट्रैक्टर बुक भी करा लिया, लेकिन डिलीवरी से एक दिन पहले जब वह ड्राफ्ट लेने बैंक पहुंचे तो शाखा प्रबंधक ने देने से इन्कार कर दिया। मजबूर होकर उन्होंने ब्याज पर रुपये लेकर ट्रैक्टर खरीदा।
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बाद में खतौनी निकलवाने पर उन्हें पता चला कि उनकी और उनके पिता की जमीन को बंधक बनाकर बैंक प्रबंधक ने पांच लाख रुपये का लोन दर्ज करा लिया, जबकि उन्होंने कोई लोन नहीं मिला। आरोप है कि लोन के नाम पर रकम निकालकर गबन कर ली गई। पीड़ित ने इसे लेकर आयोग में वाद दायर किया था।जिसकी सुनवाई चल रही थी।
आयोग के चेयरमैन हेमंत गुप्ता और सदस्य अभिनव अग्रवाल व अमरजीत कौर को मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी पर आरोप सिद्ध पाया। आयोग ने बैंक को आदेश दिया कि परिवादी को मानसिक और आर्थिक क्षति के मद में पांच लाख रुपये और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये दिए जाएं।इसके अलावा सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी मानते हुए शाखा प्रबंधक पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया, जो राजकोष में जमा कराना होगा।
आयोग ने इस संबंध में शाखा प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई के लिए बैंक अधिकारियों और एसपी को पत्र भी भेजा है।
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आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि 45 दिन के भीतर यह राशि अदा की जाए। साथ ही शाखा प्रबंधक पर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाते हुए इसे राजकोष में जमा करने को कहा गया है।
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ऊंचा गांव निवासी वीरेंद्र कुमार चौहान ने आयोग में वाद दायर कर बताया कि उन्होंने सितंबर 2019 में खेती के लिए ट्रैक्टर लोन लेने हेतु बैंक से संपर्क किया था। शाखा प्रबंधक ने सभी कागजी कार्यवाही पूरी करने के बाद उन्हें आश्वासन दिया था कि अक्टूबर में दीपावली से पहले ट्रैक्टर लोन की रकम का ड्राफ्ट दे दिया जाएगा। किसान ने एजेंसी पर एडवांस देकर ट्रैक्टर बुक भी करा लिया, लेकिन डिलीवरी से एक दिन पहले जब वह ड्राफ्ट लेने बैंक पहुंचे तो शाखा प्रबंधक ने देने से इन्कार कर दिया। मजबूर होकर उन्होंने ब्याज पर रुपये लेकर ट्रैक्टर खरीदा।
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बाद में खतौनी निकलवाने पर उन्हें पता चला कि उनकी और उनके पिता की जमीन को बंधक बनाकर बैंक प्रबंधक ने पांच लाख रुपये का लोन दर्ज करा लिया, जबकि उन्होंने कोई लोन नहीं मिला। आरोप है कि लोन के नाम पर रकम निकालकर गबन कर ली गई। पीड़ित ने इसे लेकर आयोग में वाद दायर किया था।जिसकी सुनवाई चल रही थी।
आयोग के चेयरमैन हेमंत गुप्ता और सदस्य अभिनव अग्रवाल व अमरजीत कौर को मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी पर आरोप सिद्ध पाया। आयोग ने बैंक को आदेश दिया कि परिवादी को मानसिक और आर्थिक क्षति के मद में पांच लाख रुपये और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये दिए जाएं।इसके अलावा सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी मानते हुए शाखा प्रबंधक पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया, जो राजकोष में जमा कराना होगा।
आयोग ने इस संबंध में शाखा प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई के लिए बैंक अधिकारियों और एसपी को पत्र भी भेजा है।