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मातमी जुलूस में लहूलुहान हुए शिया सोगवार
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Thu, 13 Oct 2016 12:17 AM IST
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Muharram
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कैराना। मोहर्रम पर कैराना में शिया समुदाय के सोगवारों द्वारा नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 खानदान के सदस्यों की शहादत की याद में जलूस ए ताजिया निकाला गया। वहीं, सुन्नी समुदाय के लोगों ने दो दिन के रोजे रखने के साथ ही करबला के शहीदों की रूह को सबाब पहुंचाते हुए गरीबों को भोजन वितरित किया।
बुधवार को नगर के मोहल्ला अंसारियान में स्थित छोटे इमाम बारगाह से बाद नमाज जोहर जुलूस ए ताजिया निकाला गया। जिसमें जुलजुना के साथ साथ शिया सोगवार अलम उठाए हुए थे। जुलूस में या हुसैन या हुसैन व अली मौला आदि नारों के साथ सीनाजनी करते हुए सिदरयान चौक होते हुए जैसे ही बड़ा इमाम बारगाह पर पहुंचे।
सोगवारों ने जंजीरों, छुरियों से मातम किया। जलूस ए ताजिया से पूर्व दोनों इमाम बारगाहों में मजलिसे की गई। जिसमें अजमेर शरीफ से आये मौलाना सैय्यद गुलजार हुसैन जाफरी साहब और मौलाना सैय्यद तुराब अली ने खिताब फरमाया। उधर, दूसरी ओर सुन्नी समुदाय के लोगों दो दिवसीय रोजे रखकर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार के 72 सदस्यों की शहादत पर कुरानख्वानी की गई। इसके पश्चात गरीब लोगो में खाना वितरित किया गया।
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इमाम हुसैन की याद में आंखों से बहे आंसू
झिंझाना। गांव बिड़ोली सादात में मोहर्रम की 10 तारीख पर शिया सोगवारों ने नवासे रसूल इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में मातमी जुलूस निकाला। जुलजुना और अलम बरामद हुआ। शिया सोगवारों ने मातमी जुलूस में सीनाजनी की। तलवार और जंजीरों से खुद को लहूलुहान कर लिया। करबला पर पहुंचकर जुलूस का समापन हुआ।
इससे पूर्व सैय्यद वसी हैदर, सैय्यद हसन अली, सैय्यद जिया मेहंदी, नफीस शाह, सैय्यद कमर अब्बास आदि ने मरसिया खानी की। इसके बाद मजलिस को मौलाना रजा अब्बास जलालपुरी मेरठ ने खिताब फरमाते कहा कि करबला में नवासे रसूल इमाम हुसैन अलेहिस्सलाम को तीन दिन का भूखा प्यासा कत्ल कर दिया गया। इमाम हुसैन अलेहिस्सलाम ने दीन ए इस्लाम को बचाया। जुल्म के आगे सर नहीं झुकाया। इसके बाद इमाम हुसैन अलेहिस्सलाम के मसायब बयान किए गए। सोगवार रोते रहे मौलाना बयान करते रहे। हसन मेहंदी ने बयान किया कि नवासे रसूल इमाम हुसैन ने सर कटाकर बता दिया की इस्लाम जिंदा है यही अपने नेक रास्ते पर थे।
इन्ही के रास्तो चलना चाहिए यही इस्लाम का रास्ता है। इसके बाद जुलूस बरामद हुआ जलूस में नोहेख्वानी की गई। नोहे ख्वान सहजाद केसर, नन्ने मियां, शहजाद शाह, शौकीन शाह, कासिम शाह, सैय्यद सबीउल आदि ने नोहेख्वानी की। जुलूस इमाम बारगाह से निकलकर गलियों से गुजरता हुआ करबला में समाप्त हुआ।
जुलूस के दौरान झिंझाना थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। इस दौरान पूर्व प्रमुख सैयद हसन मेहंदी, गुड्डू मियां, सैय्यद फजले अली, सैय्यद महताब मेहंदी, कमर रजा, बाकिर शाह, मन्नन मियां, सैय्यद नोनिहाल मेहंदी, अब्बास मियां, हामिद शाह, जाफर शाह, कल्लन शाह, आफ़ताब मेहंदी, मोम्मद अली, इक़बाल हैदर, कमर अब्बास, जैनुल अब्बास, हैदर अब्बास, जिंदा शाह, साजिद शाह, खालिद शाह, सलीम शाह, तस्लीम शाह, मंसूर शाह, नदीम शाह, मटरू, राशिद शाह, नासिर अली, रजबअली, शाह रजा, शाकिर शाह बाकर आदि का सहयोग रहा
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बुधवार को नगर के मोहल्ला अंसारियान में स्थित छोटे इमाम बारगाह से बाद नमाज जोहर जुलूस ए ताजिया निकाला गया। जिसमें जुलजुना के साथ साथ शिया सोगवार अलम उठाए हुए थे। जुलूस में या हुसैन या हुसैन व अली मौला आदि नारों के साथ सीनाजनी करते हुए सिदरयान चौक होते हुए जैसे ही बड़ा इमाम बारगाह पर पहुंचे।
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सोगवारों ने जंजीरों, छुरियों से मातम किया। जलूस ए ताजिया से पूर्व दोनों इमाम बारगाहों में मजलिसे की गई। जिसमें अजमेर शरीफ से आये मौलाना सैय्यद गुलजार हुसैन जाफरी साहब और मौलाना सैय्यद तुराब अली ने खिताब फरमाया। उधर, दूसरी ओर सुन्नी समुदाय के लोगों दो दिवसीय रोजे रखकर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार के 72 सदस्यों की शहादत पर कुरानख्वानी की गई। इसके पश्चात गरीब लोगो में खाना वितरित किया गया।
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इमाम हुसैन की याद में आंखों से बहे आंसू
झिंझाना। गांव बिड़ोली सादात में मोहर्रम की 10 तारीख पर शिया सोगवारों ने नवासे रसूल इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में मातमी जुलूस निकाला। जुलजुना और अलम बरामद हुआ। शिया सोगवारों ने मातमी जुलूस में सीनाजनी की। तलवार और जंजीरों से खुद को लहूलुहान कर लिया। करबला पर पहुंचकर जुलूस का समापन हुआ।
इससे पूर्व सैय्यद वसी हैदर, सैय्यद हसन अली, सैय्यद जिया मेहंदी, नफीस शाह, सैय्यद कमर अब्बास आदि ने मरसिया खानी की। इसके बाद मजलिस को मौलाना रजा अब्बास जलालपुरी मेरठ ने खिताब फरमाते कहा कि करबला में नवासे रसूल इमाम हुसैन अलेहिस्सलाम को तीन दिन का भूखा प्यासा कत्ल कर दिया गया। इमाम हुसैन अलेहिस्सलाम ने दीन ए इस्लाम को बचाया। जुल्म के आगे सर नहीं झुकाया। इसके बाद इमाम हुसैन अलेहिस्सलाम के मसायब बयान किए गए। सोगवार रोते रहे मौलाना बयान करते रहे। हसन मेहंदी ने बयान किया कि नवासे रसूल इमाम हुसैन ने सर कटाकर बता दिया की इस्लाम जिंदा है यही अपने नेक रास्ते पर थे।
इन्ही के रास्तो चलना चाहिए यही इस्लाम का रास्ता है। इसके बाद जुलूस बरामद हुआ जलूस में नोहेख्वानी की गई। नोहे ख्वान सहजाद केसर, नन्ने मियां, शहजाद शाह, शौकीन शाह, कासिम शाह, सैय्यद सबीउल आदि ने नोहेख्वानी की। जुलूस इमाम बारगाह से निकलकर गलियों से गुजरता हुआ करबला में समाप्त हुआ।
जुलूस के दौरान झिंझाना थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। इस दौरान पूर्व प्रमुख सैयद हसन मेहंदी, गुड्डू मियां, सैय्यद फजले अली, सैय्यद महताब मेहंदी, कमर रजा, बाकिर शाह, मन्नन मियां, सैय्यद नोनिहाल मेहंदी, अब्बास मियां, हामिद शाह, जाफर शाह, कल्लन शाह, आफ़ताब मेहंदी, मोम्मद अली, इक़बाल हैदर, कमर अब्बास, जैनुल अब्बास, हैदर अब्बास, जिंदा शाह, साजिद शाह, खालिद शाह, सलीम शाह, तस्लीम शाह, मंसूर शाह, नदीम शाह, मटरू, राशिद शाह, नासिर अली, रजबअली, शाह रजा, शाकिर शाह बाकर आदि का सहयोग रहा