फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Bishambar was recruited in Azad Hind Army after rebelling from British

अंग्रेजों से बगावत कर आजाद हिंद फौज में भर्ती हुए थे बिशंबर

Thu, 23 Jan 2020 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2020 12:15 AM IST
विज्ञापन
Bishambar was recruited in Azad Hind Army after rebelling from British
एलम निवासी आजाद हिन्दू फौज के शैनानी स्व बिसम्बर सिंह का फाइल फोटो - फोटो : SHAMLI
अंग्रेजों से बगावत कर आजाद हिंद फौज में भर्ती हुए थे बिशंबर
विज्ञापन

शामली, कांधला। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में आजाद हिंद फौज के कई वीर सैनिकों का योगदान रहा है। आजाद हिंद फौज के सिपाही कई दिन तक भूखे, प्यासे रहे, लेकिन उनका हौसला नहीं डिगा और पूरी बहादुरी के साथ अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। एलम के बिशंबर सिंह पंवार नेताजी सुभाष चंद बोस के नेतृत्व में आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। इनके अलावा गांव पंजोखरा निवासी पल्टूराम 17 साल की उम्र में आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए थे। उनके परिवार और गांव के लोग उनके जोश और जज्बे को आज भी याद करते हैं।
कांधला क्षेत्र के कस्बा एलम निवासी बिशंबर सिंह पंवार आजाद हिंद फौज के सिपाही रहे थे। उनका जन्म 17 नवंबर 1917 को एलम में हुआ था। छह सितंबर 1906 को उनका निधन हुआ। उनके बेटे बलराज पंवार ने बताया कि उनके पिता 1944 में बच्चा पलटन मे भर्ती हुए थे। देश में आजादी को लेकर अंग्रेजों से लड़ाई चल रही थी। आजादी की जंग में उनके पिता अंग्रेेजों से बगावत कर हथियार सहित आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए थे। उन्होंने बताया कि बिशंबर सिंह नेताजी सुभाषचंद बोस के बेहद नजदीकी थे। इसी कारण जर्मनी से भागने के बाद उन्हें आजाद की फौज में कैप्टन बनने का मौका मिला। नेताजी के साथ में उन्होंने आजादी के लिए कई बड़े कार्यों में हिस्सा लिया। आगे चलकर नेताजी द्वारा उन्हें सेना की कमान सौंपी गई थी। विश्वयुद्ध के समय वह लाल किले में कैद हुए थे। जिन्हें बाद में रिहा किया गया था। इसके बाद वह यूपी पुलिस में एसआई बने। सिंगापुर में अंग्रेजों से लड़ाई के दौरान बिशंबर सिंह दाहिने हाथ में गोली लगने से घायल हो गए थे। बलराज पंवार ने बताया कि उनके पिता बताते थे कि सिंगापुर में नेताजी के साथ कई दिन तक जंगल में रहे थे। खाने से कुछ नहीं था, लेकिन फौज के सिपाहियों का हौसला नहीं डिगा था और वह आजादी की लड़ाई में डटे रहे थे।
विज्ञापन

17 वर्ष की उम्र में भर्ती हुए थे पल्टूराम
गांव पंजोखरा निवासी आजाद हिन्द फौज के सिपाही पलटूराम का भी आजादी की लड़ाई में योगदान रहा है। उनका जन्म दो जनवरी 1932 को गांव पंजोखरा में हुआ था। परिवार के देवेंद्र सिंह ने बताया कि पल्टूराम अविवाहित थे। वह अक्सर आजादी की लड़ाई के किस्से सुनाते थे। देवेंद्र के मुताबिक पल्टूराम करीब 17 वर्ष की उम्र में आजाद हिंद फौज में वह भर्ती हो गए थे। तभी से वह नेता जी के साथ रहे और उनके साथ काम करते हुए करीब चार वर्षों तक गांव में नहीं आए थे। देवेंद्र के मुताबिक आजाद हिंद के सिपाही के रूप में नेताजी के साथ उनका अधिकतर समय सिंगापुर में बिताया और उन्होंने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। 21 जुुलाई 2019 को उनका निधन हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed