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जीने की कला सिखाती है भागवत कथा
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शामली की कमला कॉलोनी में आयोजित श्री राम कथा में प्रवचन करते अरविन्द दृष्टा जी महाराज
- फोटो : SHAMLI
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जीने की कला सिखाती है भागवत कथा
शामली। कमला कॉलोनी में डॉ. अशोक सिंघल के यहां श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन अरविंद दृष्टा महाराज ने कहा कि भागवत कथा सभी का कल्याण करने वाली है। भागवत कथा जीने की कला सिखाती है।
उन्होंने कहा कि धन को पवित्र कामों में लगाकर सदुपयोग करें। सब यहीं रह जाएगा। पापी व्यक्ति भी श्रीमद्भागवत कथा के रसपान से मोक्ष की प्राप्ति करता है। मन को भटकने से बचाने के लिए हमेशा भागवत चर्चा में लीन रहना चाहिए। जीवन में हमें तीन प्रकार की दुख प्राप्त होते हैं। पहला दुख परिवार से प्राप्त होता है, दूसरा दुख सगे संबंधियों व संपर्क के व्यक्तियों से होता है। तीसरा दुख दैवीय आपदा से मिलता है। हम सभी सुख चाहते हैं। दुख कोई नहीं चाहता। हमें पुरुषार्थ करने की जरूरत है। वह भी धर्म के अनुरूप करना पड़ेगा। हमारे कर्म के अनुसार ही हमें सुख दुख प्राप्त होता है।
श्रीमद्भागवत कथा हमें जीने की कला को सिखाती है। हमारा जीवन किस प्रकार से होना चाहिए। शरीर बदलता रहता है। जन्म मृत्यु का चक्र चलता रहता है। परमात्मा सब के अंदर विराजमान रहता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ परिवार द्वारा कराई जा रही है। शाम 5:00 से 8:00 तक। कथा का समापन तीन अक्तूबर 2021 को किया जाएगा।
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मौके डॉ. मुकुट मोहन सिंघल, अशोक मित्तल, अशोक बंसल, डॉ. अशोक सिंघल, अर्चना सिंघल, खुशीराम अरोरा, संगीता सिंघल, इंदु अरोड़ा, प्रदीप सिंघल, डॉ. प्रदीप गोयल, यशपाल पंवार, गिरधारी लाल नारंग मौजूद रहे। संचालन डॉ. कृष्ण गोपाल ने किया।
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शामली। कमला कॉलोनी में डॉ. अशोक सिंघल के यहां श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन अरविंद दृष्टा महाराज ने कहा कि भागवत कथा सभी का कल्याण करने वाली है। भागवत कथा जीने की कला सिखाती है।
उन्होंने कहा कि धन को पवित्र कामों में लगाकर सदुपयोग करें। सब यहीं रह जाएगा। पापी व्यक्ति भी श्रीमद्भागवत कथा के रसपान से मोक्ष की प्राप्ति करता है। मन को भटकने से बचाने के लिए हमेशा भागवत चर्चा में लीन रहना चाहिए। जीवन में हमें तीन प्रकार की दुख प्राप्त होते हैं। पहला दुख परिवार से प्राप्त होता है, दूसरा दुख सगे संबंधियों व संपर्क के व्यक्तियों से होता है। तीसरा दुख दैवीय आपदा से मिलता है। हम सभी सुख चाहते हैं। दुख कोई नहीं चाहता। हमें पुरुषार्थ करने की जरूरत है। वह भी धर्म के अनुरूप करना पड़ेगा। हमारे कर्म के अनुसार ही हमें सुख दुख प्राप्त होता है।
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श्रीमद्भागवत कथा हमें जीने की कला को सिखाती है। हमारा जीवन किस प्रकार से होना चाहिए। शरीर बदलता रहता है। जन्म मृत्यु का चक्र चलता रहता है। परमात्मा सब के अंदर विराजमान रहता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ परिवार द्वारा कराई जा रही है। शाम 5:00 से 8:00 तक। कथा का समापन तीन अक्तूबर 2021 को किया जाएगा।
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मौके डॉ. मुकुट मोहन सिंघल, अशोक मित्तल, अशोक बंसल, डॉ. अशोक सिंघल, अर्चना सिंघल, खुशीराम अरोरा, संगीता सिंघल, इंदु अरोड़ा, प्रदीप सिंघल, डॉ. प्रदीप गोयल, यशपाल पंवार, गिरधारी लाल नारंग मौजूद रहे। संचालन डॉ. कृष्ण गोपाल ने किया।