जलालाबाद (शामली)। मैं और मेरी पत्नी मजदूरी कर परिवार का पालन करते हैं। मेरे तीन बच्चे हैं, जब बड़ा बेटा प्रदीप पुलिस में भर्ती हुआ तो सोचा कि अब हमारा जीवन सुधर जाएगा। दोनों छोटे बच्चे भी अपने भाई के भरोसे पढ़-लिखकर कामयाब हो जाएंगे और हमारी भी मजदूरी छूट जाएगी। मगर आज जो कुछ भी हुआ, उसने सब कुछ खत्म कर दिया। अब मेरे पास कहने को कुछ नहीं है। जैसे ही प्रदीप की सड़क दुघर्टना में मौत की खबर गांव में पहुंची, परिवार सहित पूरा गांव शोक में डूब गया।
परिवार में पिता कर्म सिंह, मां राधा, बहन मनीषा व भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। मां और बहन तो बेसुध है। पत्नी सपना तो पति के साथ घायल होने के कारण अस्पताल में भर्ती है। उसे तो पता ही नहीं कि अब उसका पति इस दुनिया में ही नहीं रहा। ग्रामीणों ने बताया कि प्रदीप की शादी डेढ़ साल पहले हुई थी। जब से प्रदीप पुलिस में भर्ती हुआ था, तब से परिवार में खुशहाली आ गई थी। इस हादसे से परिवार को तोड़ कर रख दिया है। परिवार तो गमजदा है ही, साथ ही पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है। लोगों का कहना है कि प्रदीप की नौकरी लगने के बाद बहन व भाई को भी सहारा मिलने लगा था।