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पराली के बाद अब पत्ती बड़ी चुनौती

Thu, 12 Nov 2020 12:47 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Nov 2020 12:47 AM IST
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After the straw, now the leaf is a big challenge
शामली। बढ़ रहे प्रदूषण के बीच अब पराली के बाद गन्ने की पत्ती बड़ी चुनौती बनेगी। किसान गन्ने का खेत खाली होते ही गेहूं की बुवाई के लिए पत्ती जलाएंगे और इससे एक बार फिर प्रदूषण बढ़ेगा। उधर, दिवाली भी नजदीक है। त्योहार पर होने वाली आतिशबाजी से भी प्रदूूषण में इजाफा होगा। बीते दिनों एक्यूआई 400 के नजदीक पहुंच गया था जो फिर से बढ़ने लगा है। सोमवार को भी एक्यूआई 330 के आसपास रहा।
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हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं खूब हुईं हैं। इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों में भी किसानों ने खेतों में पराली जलाई। उद्योगों, वाहनों, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और पराली के धुएं से वातावरण में स्मॉग छाया हुआ है। चार दिन पहले शामली में एक्यूआई 400 के नजदीक था, लेकिन इसके बाद कुछ राहत मिलने लगी। एक्यूआई 350 से नीचे चल रहा है। इसके पीछे पराली जलाने की घटनाएं कम होना भी एक वजह है, लेकिन आने वाले दिनों में पराली से बढ़ी चुनौती गन्ने की पत्ती को लेकर है। किसान खेतों में पत्ती जलाते हैं जिससे प्रदूषण बढ़ने का खतरा है।
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जनपद में पराली जलाने की 20 घटनाएं
जिले में पराली जलाने से रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाए गए। इसका परिणाम भी सामने आया है। इस बार पूरे जिले में पराली जलाने की 20 घटनाएं सेटेलाइट से पकड़ में आईं हैं। इन किसानों पर जुर्माना लगाया है। पिछले वर्ष लगभग 65 घटनाएं हुईं थीं।
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पूसा कैप्सूल से पत्ती को कंपोस्ट में बदलें
शामली। उप निदेशक कृषि शिवकुमार केसरी ने बताया कि पराली एवं पत्ती को पूसा कैप्सूल की मदद से दस दिन में कंपोस्ट में बदला जा सकता है। पांच लीटर पानी में 150 ग्राम गुड़ डालकर उबालें और हल्का गुनगुना रहने पर 50 ग्राम बेसन मिला लें। इसके बाद चार पूसा कैप्सूल को इस मिश्रण में डालकर अच्छी तरह मिला लें। दो दिन रखने के बाद इसे और गुड़ का घोल डालकर बढ़ाने के बाद फसल अवशेष पर छिड़क सकते हैं। दस दिन में फसल अवशेष कंपोस्ट में बदल जाएगी। यह कैप्सूल मात्र 20 रुपये में मिलता है।
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