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एक डॉक्टर, 30 बेड और 300 बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Wed, 11 Oct 2017 12:39 AM IST
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Gas in school
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। सर शादीलाल शुगर मिल की डिस्टलरी यूनिट से मंगलवार सुबह गैस रिसाव होने के कारण सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के करीब 300 बच्चों की हालत बिगड़ते ही स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई। सरकारी अस्पताल में व्यवस्था केवल 30 बेड की है, जबकि सैकड़ों की संख्या में बच्चे उपचार के लिए पहुंच गए। केवल एक बाल रोग विशेषज्ञ होने से स्टाफ भी संसाधनों के अभाव में उपचार के दौरान लाचार दिखाई दिया।
जनपद बनने के सात साल बाद भी जिला अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। सीएचसी ही जिला अस्पताल के रूप में काम कर रही है। अस्पताल की क्षमता 30 बेड की है। सरकारी अस्पताल में करीब सात डॉक्टर तैनात हैं, इनमें से मात्र एक ही डॉक्टर बाल रोग विशेषज्ञ हैं। अस्पताल में ऑक्सीजन के 10 सिलेंडर तो हैं, लेकिन पाइपलाइन नहीं है।
अस्पताल में एक साथ अधिकतम 40 बच्चों को ऑक्सीजन दी जा सकती है। मंगलवार सुबह नौ बजे इस स्कूल के बच्चों की सेहत बिगड़ी तो हर कोई घबरा गया। पहले 20 बच्चों को अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। इस बीच अस्पताल में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ने लगी। सभी को ऑक्सीजन और तत्काल उपचार की जरूरत पड़ने लगी। देखते-देखते सरकारी अस्पताल में करीब 300 बच्चे पहुंच गए। एक-एक बेड पर कई-कई बच्चों को लेटाया गया और ऑक्सीजन मास्क लगाए गए।
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वहीं, शामली सीएचसी में बच्चों को समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण प्राइवेट अस्पतालों का भी रुख करना पड़ा। स्कूल स्टाफ का कहना था कि यहां तो बच्चों के हाथ मसले जा रहे हैं और पैरों पर थपकी दी जा रही है, इस तरह उपचार क्या होगा। इसके चलते करीब 57 बच्चों को प्राइवेट अस्पतालों में उपचार दिलाया गया।
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जनपद बनने के सात साल बाद भी जिला अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। सीएचसी ही जिला अस्पताल के रूप में काम कर रही है। अस्पताल की क्षमता 30 बेड की है। सरकारी अस्पताल में करीब सात डॉक्टर तैनात हैं, इनमें से मात्र एक ही डॉक्टर बाल रोग विशेषज्ञ हैं। अस्पताल में ऑक्सीजन के 10 सिलेंडर तो हैं, लेकिन पाइपलाइन नहीं है।
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अस्पताल में एक साथ अधिकतम 40 बच्चों को ऑक्सीजन दी जा सकती है। मंगलवार सुबह नौ बजे इस स्कूल के बच्चों की सेहत बिगड़ी तो हर कोई घबरा गया। पहले 20 बच्चों को अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। इस बीच अस्पताल में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ने लगी। सभी को ऑक्सीजन और तत्काल उपचार की जरूरत पड़ने लगी। देखते-देखते सरकारी अस्पताल में करीब 300 बच्चे पहुंच गए। एक-एक बेड पर कई-कई बच्चों को लेटाया गया और ऑक्सीजन मास्क लगाए गए।
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वहीं, शामली सीएचसी में बच्चों को समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण प्राइवेट अस्पतालों का भी रुख करना पड़ा। स्कूल स्टाफ का कहना था कि यहां तो बच्चों के हाथ मसले जा रहे हैं और पैरों पर थपकी दी जा रही है, इस तरह उपचार क्या होगा। इसके चलते करीब 57 बच्चों को प्राइवेट अस्पतालों में उपचार दिलाया गया।