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शामली से जुड़ी हैं गोपालदास नीरज के काव्य की यादें
Updated Fri, 20 Jul 2018 12:21 AM IST
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गोपालदास नीरज के निधन से साहित्यकार मायूस
शामली।
प्रख्यात कवि एवं साहित्यकार गोपालदास नीरज के निधन से शामली जिले के साहित्यकारों में भी गम का माहौल है। जैसे ही कवियों और शायरों को उनके निधन की सूचना मिली, तो एकाएक धक्का सा लगा।
पूर्व में शामली शुगर मिल की तरफ से कवि सम्मेलन कराया जाता था, जिसमें 1990 में आयोजित कवि सम्मेलन में गोपालदास नीरज, डाक्टर हरिओम पंवार सहित कई नामचीन कवियों को बुलाया गया था। लोग बताते हैं कि रात दस बजे के बाद शुरू हुए कवि सम्मेलन में तब गोपालदास नीरज को सबसे बाद में काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया गया था, जिसमें तड़के करीब चार बजे गोपालदास नीरज ने काव्य पाठ किया था और तब तक लोग उनको सुनने के लिए जागते रहे थे। वहीं, गोपालदास नीरज के निधन को कवियों ने साहित्य जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति बताया है।
अलीगढ़ जाकर भी मिलते थे शामली के कवि
गोपालदास नीरज के प्रति शामली के कवियों में अगाध प्रेम रहा है। यही वजह है कि शामली के कवि अलीगढ़ पहुंचकर गोपालदास नीरज से मुलाकात करते थे। शामली के गगन विहार निवासी प्रोफेसर एवं कवि विनोद शंकर अश्क ने बताया कि 1986 में वीवी पीजी कॉलेज शामली में आयोजित कवि सम्मेलन में भी गोपालदास नीरज को बुलाया गया था। इसके अलावा कॉलेज के हिंदी परिषद की तरफ से सम्मानित किया था। उन्होंने बताया कि तेरी आवाज और तेरे कदमो के निशां नामक गजल के अपने संकलनों का विमोचन उन्होंने गोपालदास नीरज से ही कराया था। इसके लिए वह अलीगढ़ गए थे। बाद में गोपालदास नीरज ने उनकी पुस्तकों को पढ़ने के बाद तेरी आवाज पुस्तक के बारे में तारीफ करते हुए पत्र भेजकर शुभकामना भी दीं। कवि विनोद अश्क ने कहा कि गोपालदास जी के निधन से साहित्य जगत को गहरा आघात लगा है।
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वहीं, कवि डाक्टर विपिन कौशिक का कहना है कि गोपालदास नीरज के रूप में एक युगपुरुष हमसे बिछड़ गया। वह अपनी कविताओं के माध्यम से समाज को आइना दिखाते थे और बेबाक टिप्पणी करते थे। मौजूदा दौर के कवियों को उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने बताया कि गोपालदास नीरज बेहद संवेदनशील और जनप्रिय रहे। उन्होंने हमेशा ही कविताओं के जरिये समाज के उन पहलुओं को छुआ, जो आने वाली पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। उनके रूप में साहित्य जगत का बेशकीमती हीरा हमसे खो गया है। कवि डाक्टर अनुराग शर्मा ने बताया कि गोपालदास नीरज का जाना हिन्दी साहित्य जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति है। उन्होंने कवि सम्मेलनों के मंचों का स्तर आसमान की ऊंचाई तक पहुंचाया और वास्तव में काव्य के सही मायने स माज के सामने पेश किए। वर्तमान पीढ़ी को गोपालदास नीरज का साहित्य सदैव मार्गदर्शक के रूप में लाभान्वित करेगा।
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शामली।
प्रख्यात कवि एवं साहित्यकार गोपालदास नीरज के निधन से शामली जिले के साहित्यकारों में भी गम का माहौल है। जैसे ही कवियों और शायरों को उनके निधन की सूचना मिली, तो एकाएक धक्का सा लगा।
पूर्व में शामली शुगर मिल की तरफ से कवि सम्मेलन कराया जाता था, जिसमें 1990 में आयोजित कवि सम्मेलन में गोपालदास नीरज, डाक्टर हरिओम पंवार सहित कई नामचीन कवियों को बुलाया गया था। लोग बताते हैं कि रात दस बजे के बाद शुरू हुए कवि सम्मेलन में तब गोपालदास नीरज को सबसे बाद में काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया गया था, जिसमें तड़के करीब चार बजे गोपालदास नीरज ने काव्य पाठ किया था और तब तक लोग उनको सुनने के लिए जागते रहे थे। वहीं, गोपालदास नीरज के निधन को कवियों ने साहित्य जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति बताया है।
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अलीगढ़ जाकर भी मिलते थे शामली के कवि
गोपालदास नीरज के प्रति शामली के कवियों में अगाध प्रेम रहा है। यही वजह है कि शामली के कवि अलीगढ़ पहुंचकर गोपालदास नीरज से मुलाकात करते थे। शामली के गगन विहार निवासी प्रोफेसर एवं कवि विनोद शंकर अश्क ने बताया कि 1986 में वीवी पीजी कॉलेज शामली में आयोजित कवि सम्मेलन में भी गोपालदास नीरज को बुलाया गया था। इसके अलावा कॉलेज के हिंदी परिषद की तरफ से सम्मानित किया था। उन्होंने बताया कि तेरी आवाज और तेरे कदमो के निशां नामक गजल के अपने संकलनों का विमोचन उन्होंने गोपालदास नीरज से ही कराया था। इसके लिए वह अलीगढ़ गए थे। बाद में गोपालदास नीरज ने उनकी पुस्तकों को पढ़ने के बाद तेरी आवाज पुस्तक के बारे में तारीफ करते हुए पत्र भेजकर शुभकामना भी दीं। कवि विनोद अश्क ने कहा कि गोपालदास जी के निधन से साहित्य जगत को गहरा आघात लगा है।
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वहीं, कवि डाक्टर विपिन कौशिक का कहना है कि गोपालदास नीरज के रूप में एक युगपुरुष हमसे बिछड़ गया। वह अपनी कविताओं के माध्यम से समाज को आइना दिखाते थे और बेबाक टिप्पणी करते थे। मौजूदा दौर के कवियों को उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने बताया कि गोपालदास नीरज बेहद संवेदनशील और जनप्रिय रहे। उन्होंने हमेशा ही कविताओं के जरिये समाज के उन पहलुओं को छुआ, जो आने वाली पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। उनके रूप में साहित्य जगत का बेशकीमती हीरा हमसे खो गया है। कवि डाक्टर अनुराग शर्मा ने बताया कि गोपालदास नीरज का जाना हिन्दी साहित्य जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति है। उन्होंने कवि सम्मेलनों के मंचों का स्तर आसमान की ऊंचाई तक पहुंचाया और वास्तव में काव्य के सही मायने स माज के सामने पेश किए। वर्तमान पीढ़ी को गोपालदास नीरज का साहित्य सदैव मार्गदर्शक के रूप में लाभान्वित करेगा।