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75 दिन बाद खुले धर्मस्थलों के कपाट
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झिंझाना में जैन मंदिर को सैनिटाइज टाइल करते फायरब्रिगेड के कर्मचारी।
- फोटो : SHAMLI
शामली। अनलॉक-1 के दूसरे चरण में सोमवार से धर्मस्थलों के कपाट भी खुल गए । 75 दिनों बाद श्रद्धालु यहां पहुंचे तो तमाम व्यवस्थाएं नई नजर आई। प्रवेश से लेकर भगवान के दर्शन तक कई तरह जांच से गुजरना पड़ा। पुजारी भी फेस शील्ड में नजर आए। भक्तों को ना टीका लगा और ना ही प्रसाद वितरण हुआ। घंटे तक बांध दिए गए थे। श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी कम रही। महिलाएं तो ना के बराबर नजर आई। अमर उजाला टीम ने सुबह सात से नौ बजे तक शहर के प्राचीन हनुमान धाम समेत कुछ धर्मस्थलों का हाल जाना। पेश है रिपोर्ट -
मंदिर गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद एंट्री
हनुमान धाम के मुख्य द्वार पर ही कर्मचारी को थर्मल स्क्रीनिंग गन लेकर बैठाया गया था। प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही तापमान 99 डिग्री से कम होने पर ही अंदर प्रवेश दिया जा रहा था। हालांकि सुबह के वक्त पारा कम होने की वजह से करीब करीब सभी श्रद्धालुओं को तापमान सही था।
हाथ सैनिटाइज करने के बाद ही हुए दर्शन
मंदिर में ऊपर से पहले श्रद्धालुओं के हाथ सैनिटाइज कराए जा रहे थे। जीने की सीढ़ियों के पास पैर से चलने वाली सैनिटाइज मशीन लगी थी। यहां तैनात कर्मचारी एक एक श्रद्धालुओं को इसके बारे में बता रहा था। हाथ सैनिटाइज करने के बाद ही ऊपर मंदिर में भगवान के दर्शन को जाने दिया जा रहा था।
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मैं तो नहा धो कर आया हूं जी
मंदिर में दर्शन को आया एक श्रद्धालु बिना हाथ सैनिटाइज किए ऊपर दर्शन को जाने लगा तो कर्मचारियों ने सैनिटाइज कराने को टोका। श्रद्धालु को शायद कर्मचारी का टोकना अच्छा नहीं लगा। उसने कहा भाई घर से अभी नहा धोकर आया हूं, कर्मचारी ने भी विनम्रता से कहा साहब यहां सभी नहा धोकर आते हैं, पर क्या करें कोरोना है ये सब जरूरी हो गया है।
पुजारी ने पहनी फेस शील्ड
हनुमान धाम में बने सभी छोटे बड़े मंदिरों में अपनी सीट पर बैठे पुजारी फेस शील्ड में नजर आए। कुछ श्रद्धालु पूजा के बाद तिलक और चरणामृत को आगे बढे़, लेकिन पुजारियों ने इसके लिए मना कर दिया। एक दो श्रद्धालु फूल माला लाए, लेकिन उन्हें भी नहीं लिया गया।
दरें हटा दिए, घंटे बांधे गए
मंदिरों में पडे़ रहने वाले दरों को हटा लिया गया था। वहां रखे रहने वाली आरती आदि की धार्मिक पुस्तकें हटा ली गई ताकि लोग ना बैठें। कुछ श्रद्धालु अपने बैठने के लिए आसान अपने साथ लाए। धर्मस्थलों में लगे घंटों पर भी कपड़े आदि बांध दिए गए थे। इसके अलावा भीड़ से बचने को मंदिर में प्रवेश मुख्य द्वार से हुआ, लेकिन निकासी गणेश द्वार से दी गई थी। मंदिर परिसर में बनी कैंटीन को भी बंद करा दिया गया था। परिसर में लगने वाली खाने पीने के सामने की ठेलियों को भी नहीं लगने दिया जाएगा।
दिगंबर जैन मंदिर में भी पुख्ता व्यवस्था
शहर के रेलवे रोड के निकट दिगंबर जैन मंदिर के मुख्य द्वार पर सिक्योरिटी गार्ड को बैठाया गया था। मंदिर में आने वाले सभी भक्तों के हाथ सैनिटाइज कराए जा रहे थे। चप्पलों को बाहर ही एक साइड में निकलवाया गया। हाथ सैनिटाइज के बिना किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया। कैराना रोड पर गुलजारी वाला मंदिर, बलभद्र मंदिर, सती वाला मंदिर और भाकू वाला मंदिरों में भी सरकारी गाइड लाइन के अनुसार व्यवस्था रहीं।
आर्यसमाज मंदिर में हुआ यज्ञ
शहर के धीमानपुरा स्थित आर्य समाज मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए यज्ञ किया गया। आर्य विधा सभा के प्रधान राजपाल आर्य, रघुवीर सिंह आर्य, सुभाष आर्य, वीरांगना परिषद से श्वेता आर्य, मोनिका आर्य आदि पांच लोग शामिल रहे।
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मंदिर गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद एंट्री
हनुमान धाम के मुख्य द्वार पर ही कर्मचारी को थर्मल स्क्रीनिंग गन लेकर बैठाया गया था। प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही तापमान 99 डिग्री से कम होने पर ही अंदर प्रवेश दिया जा रहा था। हालांकि सुबह के वक्त पारा कम होने की वजह से करीब करीब सभी श्रद्धालुओं को तापमान सही था।
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हाथ सैनिटाइज करने के बाद ही हुए दर्शन
मंदिर में ऊपर से पहले श्रद्धालुओं के हाथ सैनिटाइज कराए जा रहे थे। जीने की सीढ़ियों के पास पैर से चलने वाली सैनिटाइज मशीन लगी थी। यहां तैनात कर्मचारी एक एक श्रद्धालुओं को इसके बारे में बता रहा था। हाथ सैनिटाइज करने के बाद ही ऊपर मंदिर में भगवान के दर्शन को जाने दिया जा रहा था।
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मैं तो नहा धो कर आया हूं जी
मंदिर में दर्शन को आया एक श्रद्धालु बिना हाथ सैनिटाइज किए ऊपर दर्शन को जाने लगा तो कर्मचारियों ने सैनिटाइज कराने को टोका। श्रद्धालु को शायद कर्मचारी का टोकना अच्छा नहीं लगा। उसने कहा भाई घर से अभी नहा धोकर आया हूं, कर्मचारी ने भी विनम्रता से कहा साहब यहां सभी नहा धोकर आते हैं, पर क्या करें कोरोना है ये सब जरूरी हो गया है।
पुजारी ने पहनी फेस शील्ड
हनुमान धाम में बने सभी छोटे बड़े मंदिरों में अपनी सीट पर बैठे पुजारी फेस शील्ड में नजर आए। कुछ श्रद्धालु पूजा के बाद तिलक और चरणामृत को आगे बढे़, लेकिन पुजारियों ने इसके लिए मना कर दिया। एक दो श्रद्धालु फूल माला लाए, लेकिन उन्हें भी नहीं लिया गया।
दरें हटा दिए, घंटे बांधे गए
मंदिरों में पडे़ रहने वाले दरों को हटा लिया गया था। वहां रखे रहने वाली आरती आदि की धार्मिक पुस्तकें हटा ली गई ताकि लोग ना बैठें। कुछ श्रद्धालु अपने बैठने के लिए आसान अपने साथ लाए। धर्मस्थलों में लगे घंटों पर भी कपड़े आदि बांध दिए गए थे। इसके अलावा भीड़ से बचने को मंदिर में प्रवेश मुख्य द्वार से हुआ, लेकिन निकासी गणेश द्वार से दी गई थी। मंदिर परिसर में बनी कैंटीन को भी बंद करा दिया गया था। परिसर में लगने वाली खाने पीने के सामने की ठेलियों को भी नहीं लगने दिया जाएगा।
दिगंबर जैन मंदिर में भी पुख्ता व्यवस्था
शहर के रेलवे रोड के निकट दिगंबर जैन मंदिर के मुख्य द्वार पर सिक्योरिटी गार्ड को बैठाया गया था। मंदिर में आने वाले सभी भक्तों के हाथ सैनिटाइज कराए जा रहे थे। चप्पलों को बाहर ही एक साइड में निकलवाया गया। हाथ सैनिटाइज के बिना किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया। कैराना रोड पर गुलजारी वाला मंदिर, बलभद्र मंदिर, सती वाला मंदिर और भाकू वाला मंदिरों में भी सरकारी गाइड लाइन के अनुसार व्यवस्था रहीं।
आर्यसमाज मंदिर में हुआ यज्ञ
शहर के धीमानपुरा स्थित आर्य समाज मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए यज्ञ किया गया। आर्य विधा सभा के प्रधान राजपाल आर्य, रघुवीर सिंह आर्य, सुभाष आर्य, वीरांगना परिषद से श्वेता आर्य, मोनिका आर्य आदि पांच लोग शामिल रहे।

गढ़ीपुख्ता में शिव मंदिर को सैनिटाइजर करते पंचायत कर्मी।- फोटो : SHAMLI

शामली के हनुमान धाम में कुछ इस तरह की गई पूजा अर्चना।- फोटो : SHAMLI

शामली के हनुमान धाम में श्रद्धालुओं के आने पर थर्मल स्क्रीनिंग करते कर्मचारी।- फोटो : SHAMLI