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थानाभवन गन्ना समिति में 74.78 लाख रूपये का घपला
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थानाभवन।थानाभवन गन्ना समिति में लगभग 75 लाख रूपये के घपले का मामला प्रकाश में आया है। समिति के के नाम से खतौली के एक गांव में समिति का खाता खुलवाकर चार कंपनियों को 74.78 लाख रूपये भुगतान किया गया। अब उक्त कपंनियों का कोई पता नहीं है। संभावना है कि ये कंपनी कथित रुप से फर्जी हैं। कंपनियों को का भुगतान कर दिया। मामला सामने आने के बाद से समिति में हड़कंप मचा हुआ है। साथ ही समिति के सचिव ने तीन अधिकारियों एक बैंक मैनेजर सहित नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
थानाध्यक्ष के अनुसार गन्ना समिति के सचिव भास्कर सिंह की ओर सेे दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार 25 मार्च 2019 में समिति के नाम से खतौली क्षेत्र के गांव गालिबपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक में खाता खुलवाया गया। इस खाते में समिति की ओर से 50-50 लाख के दो और 32.21 लाख रुपये कुल एक करोड़ 32 लाख रुपये चेक के माध्यम से तीन बार में जमा कराए गए। इस खाते में तत्कालीन सचिव और लेखाकार जैसे हस्ताक्षर भी हैं। इसके बाद समिति के लेखाकार की ओर से 1.32 करोड़ की एक स्टेटमेंट समिति में जमा की गई। जिसमें स्पष्ट किया गया था कि यह पैसा खतौली में समिति के सेंट्रल बैंक के खाते में जमा किया गया है। इसके बाद समिति की ओर से सेंट्रल बैंक से एक करोड़ 32 लाख रुपये निकालकर किसानों के खाते में डाल दिया। इसके बाद समिति ने पीएनबी के खाते से 58 लाख रुपये एडवाइज के जरिए सेंट्रल बैंक में जमा कराए। अब पीएनबी के खाते में 74 लाख 78 हजार रूपये बचे। इस धनराशि को समिति की ओर से चार कंपनियों को क्रमश: 50 लाख, 09.78 लाख, 09.37 लाख व 05.13 लाख रुपये डीडी और आरटीजीएस के माध्यम से जमा कराए गए। आरोप है कि उक्त चारों कंपनियां फर्जी हैं। समिति सचिव अब यह भी दावेे कर रहा हैै कि समिति की ओर से गालिब के पीएनबी बैंक में कोई खाता ही नहीं खुलवाया गया था। ये खाता कैसे खुला, किसने रकम जमा कराई ,यदि ये चारों फर्म फर्जी हैं तो अब कहां हैं। ये सब बिंदु जांच का विषय है।
इनके खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट
थाना प्रभारी प्रभाकर कैंतुरा ने बताया कि समिति सचिव की तहरीर के आधार पर तत्कालीन सचिव धनंजय सिंह, लेखाकार योगेंद्र सिंह, सतीश, बैंक मैनेजर मुकेश, चार कंपनियों व खाता खुलवाने वाले व्यक्ति प्रणव राणा कुल नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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कई दिनों से दबा था मामला, सचिव ने चुप्पी साधी
इस मामले को गन्ना समिति अफसरों ने दबाने की कोशिश भी की। रिपोर्ट करीब एक सप्ताह पूर्व दर्ज हो चुकी थी लेकिन ये सब गन्ना समिति अफसरों ने चुपचाप कर दिया गया। मामले का पता चलने पर केस के वादी गन्ना समिति सचिव भास्कर सिंह रघुवंशी ने इस मामले में ज्यादा कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसके अलावा वह कोई जानकारी सार्वजनिक करने में असमर्थ हैं।
कोट
मैं थानाभवन गन्ना समिति सचिव के पद पर रहा हूं। अप्रैल 2019 में सरकार ने मेरा दूसरे स्थान पर तबादला कर दिया गया था। जबकि, यह मामला मई के बाद हुआ। जब मैं उस समय सचिव ही नहीं था तो फिर इसमें मैं कैसे शामिल हो सकता हूं। मेरे खिलाफ गलत तरीके से मुकदमा दर्ज कराया गया है। -धनंजय सिंह, तत्कालीन सचिव, गन्ना समिति
कोट
नियमानुसार बैंक खाता समिति क्षेत्र के अंतर्गत की बैंक में खुलना चाहिए। जहां पर खाता खुला है, वह गन्ना समिति क्षेत्र भी नहीं पड़ता बल्कि जिला भी दूसरा हो जाता है। गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए केस दर्ज करने और दोषियों को सख्त सजा दिलाने के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर केस दर्ज कराया गया है। ये खाता किसने खुलवाया। इस केस में कौन दोषी है। ये सब स्थिति जांच के बाद ही पता लगेगा। उन्हें ये भी पता चला है कि बैंक द्वारा भी इस संबंध में इंटरनल जांच कराई जा रही है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहना संभव होगा।
विजय बहादुर, जिला गन्नाधिकारी शामली
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थानाध्यक्ष के अनुसार गन्ना समिति के सचिव भास्कर सिंह की ओर सेे दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार 25 मार्च 2019 में समिति के नाम से खतौली क्षेत्र के गांव गालिबपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक में खाता खुलवाया गया। इस खाते में समिति की ओर से 50-50 लाख के दो और 32.21 लाख रुपये कुल एक करोड़ 32 लाख रुपये चेक के माध्यम से तीन बार में जमा कराए गए। इस खाते में तत्कालीन सचिव और लेखाकार जैसे हस्ताक्षर भी हैं। इसके बाद समिति के लेखाकार की ओर से 1.32 करोड़ की एक स्टेटमेंट समिति में जमा की गई। जिसमें स्पष्ट किया गया था कि यह पैसा खतौली में समिति के सेंट्रल बैंक के खाते में जमा किया गया है। इसके बाद समिति की ओर से सेंट्रल बैंक से एक करोड़ 32 लाख रुपये निकालकर किसानों के खाते में डाल दिया। इसके बाद समिति ने पीएनबी के खाते से 58 लाख रुपये एडवाइज के जरिए सेंट्रल बैंक में जमा कराए। अब पीएनबी के खाते में 74 लाख 78 हजार रूपये बचे। इस धनराशि को समिति की ओर से चार कंपनियों को क्रमश: 50 लाख, 09.78 लाख, 09.37 लाख व 05.13 लाख रुपये डीडी और आरटीजीएस के माध्यम से जमा कराए गए। आरोप है कि उक्त चारों कंपनियां फर्जी हैं। समिति सचिव अब यह भी दावेे कर रहा हैै कि समिति की ओर से गालिब के पीएनबी बैंक में कोई खाता ही नहीं खुलवाया गया था। ये खाता कैसे खुला, किसने रकम जमा कराई ,यदि ये चारों फर्म फर्जी हैं तो अब कहां हैं। ये सब बिंदु जांच का विषय है।
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इनके खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट
थाना प्रभारी प्रभाकर कैंतुरा ने बताया कि समिति सचिव की तहरीर के आधार पर तत्कालीन सचिव धनंजय सिंह, लेखाकार योगेंद्र सिंह, सतीश, बैंक मैनेजर मुकेश, चार कंपनियों व खाता खुलवाने वाले व्यक्ति प्रणव राणा कुल नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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कई दिनों से दबा था मामला, सचिव ने चुप्पी साधी
इस मामले को गन्ना समिति अफसरों ने दबाने की कोशिश भी की। रिपोर्ट करीब एक सप्ताह पूर्व दर्ज हो चुकी थी लेकिन ये सब गन्ना समिति अफसरों ने चुपचाप कर दिया गया। मामले का पता चलने पर केस के वादी गन्ना समिति सचिव भास्कर सिंह रघुवंशी ने इस मामले में ज्यादा कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसके अलावा वह कोई जानकारी सार्वजनिक करने में असमर्थ हैं।
कोट
मैं थानाभवन गन्ना समिति सचिव के पद पर रहा हूं। अप्रैल 2019 में सरकार ने मेरा दूसरे स्थान पर तबादला कर दिया गया था। जबकि, यह मामला मई के बाद हुआ। जब मैं उस समय सचिव ही नहीं था तो फिर इसमें मैं कैसे शामिल हो सकता हूं। मेरे खिलाफ गलत तरीके से मुकदमा दर्ज कराया गया है। -धनंजय सिंह, तत्कालीन सचिव, गन्ना समिति
कोट
नियमानुसार बैंक खाता समिति क्षेत्र के अंतर्गत की बैंक में खुलना चाहिए। जहां पर खाता खुला है, वह गन्ना समिति क्षेत्र भी नहीं पड़ता बल्कि जिला भी दूसरा हो जाता है। गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए केस दर्ज करने और दोषियों को सख्त सजा दिलाने के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर केस दर्ज कराया गया है। ये खाता किसने खुलवाया। इस केस में कौन दोषी है। ये सब स्थिति जांच के बाद ही पता लगेगा। उन्हें ये भी पता चला है कि बैंक द्वारा भी इस संबंध में इंटरनल जांच कराई जा रही है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहना संभव होगा।
विजय बहादुर, जिला गन्नाधिकारी शामली